गोवा के सीएम मनोहर पर्रिकर के निधन के बाद राज्य में सियासी हलचल तेज

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राजनीति में कभी कुछ स्थायी नहीं होता या फिर कह ले जीवन में सब कुछ अस्थायी है. ऐसा कुछ अस्थाई और दुखद सा घटित हुआ है गोवा में . बगैर पेरेंट्स के बच्चे जैसे अनाथ से हो जाते है और उनके कस्टडी के लिए खीचा  तानी सी मच जाती है, गोवा में, वहां के  मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर के निधन के बाद  कुछ ऐसा ही हाल देखने को मिल रहा है, वहां की सियासत में.

 “जाना हिंदी की  सबसे खौफनाक क्रिया है” और किसी राजनेता का ऐसे अचानक चले जाना न सिर्फ उनके परिवार के लिए बल्कि उनके राज्य और देश के लिए भी  बहुत बड़ा  नुकसान  है.

वहीं इस समय एक तरफ बीजेपी ने अपने एक वरिष्ट और कर्मठ नेता को खोया है वहीं दूसरी ओर कांग्रेस ने गोआ के राज्यपाल को चिट्ठी लिख फिर से सरकार बनाने का दावा किया है .

यह देख कर ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस के पास एक सिंगल पॉइंट एजेंडा रह गया है कि अपने अस्तित्व को कैसे बचाए. तभी तो  48 घंटे में दूसरी बार सरकार बनाने का दावा पेश करते हुए कांग्रेस ने कहा कि उनके पास बहुमत है. कांग्रेस ने इससे पहले मनोहर पर्रिकर की ज्यादा तबीयत खराब होने पर शनिवार को राज्यपाल के पास सरकार बनाने का दावा पेश किया था. हालांकि, कांग्रेस ने आरोप लगाते हुए कहा था कि राज्यपाल मृदुला सिन्हा ‘भाजपा कार्यकर्ता’ की तरह काम कर रही हैं. साथ ही कहा था कि राज्यपाल ने उनके पत्र का न कोई जवाब दिया और न ही मिलने का समय दिया. कांग्रेस ने कहा था कि भाजपा के विधायकों की संख्या कम हो गई है और कांग्रेस राज्य में सबसे बड़ी पार्टी है. इन सभी बातों से कांग्रेस की खलबलाहट नज़र आया रही है . तभी तो कांग्रेस पे लगे आरोपों को बे बुनियाद और मन्ह्ग्रहंत बता रहे है और कार्यपालिका, न्यायपालिका और विधायिका के ऊपर विश्वास ना रख कर उनपर इल्जाम पर इलज़ाम लगा रहे .

बीजेपी ने राज्य में नए सीएम की तलाश तेज कर दी है. पार्टी के वरिष्ठ नेता नितिन गडकरी रविवार देर रात पणजी में 6 घंटे से ज्यादा विधायकों संग बैठक की है. बैठक में विधानसभा अध्यक्ष प्रमोद सावंत और विश्वजीत राणे के नाम पर चर्चा हुई लेकिन इसपर अभीतक सहमति नहीं बन पाई है. इस बीच, कांग्रेस ने भी राज्य में सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया है.दो विधायकों सीएम पर्रिकर और फ्रांसिस डिसूजा के निधन तथा दो विधायकों के इस्तीफे के बाद राज्य की 40 सदस्यीय विधानसभा में मौजूदा संख्या बल 36 ही रह गया है. आइए जानते हैं गोवा विधानसभा में सिटों का गणित.

बीजेपी-12 

महाराष्ट्र गोमंतक पार्टी-3 

गोवा फॉरवर्ड पार्टी-3 

निर्दलीय-3 

कांग्रेस-14

एनसीपी-1 

कुल-36 

बहुमत का आंकड़ा-19 

-चार सीटें खाली 

40 विधानसभा सीटों वाले राज्य में भाजपा के पास 12 विधायक हैं. वहीं भाजपा को गोवा फॉरवर्ड पार्टी और एमजीपी के तीन-तीन और एक एनसीपी विधायक का समर्थन हासिल है. इसके अलावा एक निर्दलीय उम्मीदवार भी भाजपा के समर्थन में है. कांग्रेस के पास 14 विधायक हैं. इस साल के शुरु में भाजपा विधायक फ्रांसिस डिसूजा और रविवार को पर्रिकर के निधन तथा पिछले साल कांग्रेस के दो विधायकों सुभाष शिरोडकर और दयानंद सोपटे के इस्तीफे के कारण सदन में विधायकों की संख्या 36 रह गयी है.

बताया जा रहा है कि बीजेपी की ओर से सीएम के लिए दो नाम सुझाए गए थे। वे दो नाम प्रमोद सावंत और विश्वजीत राणे हैं। उधर, महाराष्ट्र गोमंतक पार्टी (एमजीपी) के सुदीन धावलिकर भी मुख्यमंत्री बनना चाह रहे हैं। प्रमोद सावंत गोवा विधानसभा के अध्यक्ष हैं। विश्वजीत राणे, मनोहर पर्रिकर कैबिनेट में स्वास्थ्य मंत्री थे। वह कांग्रेस को छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए हैं.

एक तरफ कांग्रेस की नीव हिल रही है और उनका मनोबल भी . “डूबते को तिनके का सहारा” तो सुना ही होगा आपने. वही हाल अभी कांग्रेस का दिख रहा है, गोवा की सियासत को लेकर . बिना समाय  जाया किए उन्होंने गोवा में सियासत का एक और खेल खेला है. बहरहाल अब यह देखते है कि इस राजनीतिक अघात से बीजेपी और गोवा खुद को कैसे उबारता है .