जितिन प्रसाद के भाजपा में शामिल होने पर कांग्रेस का बयान, ‘जाने वाले जाते रहते हैं…’

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आज उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का ब्राह्मण चेहरा माने जाने वाले और राहुल गाँधी के बेहद करीबी नेता रहे जितिन प्रसाद ने कांग्रेस को अलविदा कह कर भगवा खेमे का झंडा थाम लिया. यूपी में कांग्रेस के गिने चुने चेहरों में से एक माने जाने जितिन प्रसाद के जाने से पार्टी को कितना बड़ा झटका लगा है ये तो पार्टी भली भांति जानती होगी. लेकिन अब ऊपर से ऐसा दिखाया जा रहा है मानों किसी के जाने से पार्टी को कोई फर्क ही नहीं पड़ता. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के बयान से तो कुछ ऐसा ही लगता है.

जितिन प्रसाद के कांग्रेस छोड़ने के बाद उस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा ‘जाने वाले जाते रहते हैं, हम उन्हें नहीं रोक सकते हैं. यह उनका फैसला है, उनका भी कांग्रेस में ही भविष्य होता. जो भी हो, यह दुर्भाग्यपूर्ण है.’ कांग्रेस का यही रवैया तब था जब मध्य प्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया पार्टी छोड़ कर गए थे और हेमंत बिस्वा सरमा असम में पार्टी छोड़ कर भाजपा में शामिल हो गए थे. इन दोनों नेताओं के भाजपा में जाने के बाद ये दोनों ही राज्य कांग्रेस के हाथों से निकल गए. जनाधार के मामले में भले ही जितिन प्रसाद सिंधिया और सरमा के मुकाबले कमजोर नज़र आते हों लेकिन उस यूपी में उनका होना कांग्रेस के लिए बड़ा मायने रखता था, जिस यूपी में कांग्रेस का कोई नामलेवा भी नहीं बचा हो. और वो भी विधानसभा चुनाव से महज 6 महीने पहले.

कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने जितिन प्रसाद के बीजेपी में जाने पर उन्हें अवसरवादी कहा. श्रीनेत ने कहा, ‘जितिन प्रसाद कहते हैं कि वे 8-10 साल से विचार कर रहे थे. मेरा सवाल है कि क्या आप यह उस वक्त सोच रहे थे जब आप मंत्री थे? आपने जो किया है वह दुख देता है. जब देश कोरोना महामारी से घिरा है और केंद्र और उप्र सरकार के कुप्रबंधन से ये हालात पैदा हुए हैं, ऐसे में क्या आपने इनके साथ जाने की भूल नहीं की? क्या आप इनके साथ खड़े होकर सहज महसूस करेंगे?’