आखिर राहुल गाँधी कौन से मिशन पर विदेश जाते हैं, जहाँ सुरक्षाकर्मियों को भी ले जाने की इजाजत नही होती!

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राहुल गाँधी विदेशी दौरे से वापस आ गये है. दिल्ली कांग्रेस की बड़ी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के निधन के 6 दिन बाद राहुल गाँधी उनके आवास पर पहुंचे और श्रधान्जली अर्पित की. जिस वक्त शीला दीक्षित का निधन हुआ था उस समय राहुल गाँधी अमेरिका में थे. राहुल गाँधी ने शीला दीक्षित के परिजनों से लंबी मुलाक़ात की है, इस मुलाक़ात के बाद बाद कई ख़बरें निकल कर सामने आ रही है ये ख़बरें या बातें क्या है आपको आगे बतायेंगे लेकिन अभी जो सवाल खड़ा हो रहा है वो ये है कि जब जब देश में कोई बड़ी घटना होती है या फिर कोई बड़ी बात होती है तो राहुल गाँधी के बारे में यही सुनने को मिलता है कि वो विदेश में हैं,, या विदेश से वापस आये हैं! लेकिन क्यों गये है? नही पता! कहाँ गये हैं? ये भी नही पता!

एक बार लोकसभा में बोलते हुए देश के तत्कालीन गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि राहुल गांधी ने पिछले दो साल में अपनी 6 विदेश यात्राओं के दौरान SPG सुरक्षा लेने से इंकार कर दिया, आखिर राहुल अपनी विदेशी यात्राओं के दौरान क्या छुपाना चाहते हैं? वैसे देखा गया है कि राहुल गाँधी ज्यादातर यात्राएं इटली के लिए होती है जहाँ राहुल गाँधी अपने नानी के घर यानि मामा के यहाँ जाते हैं लेकिन कई यात्राएं तो ऐसी है जो उन्होंने एक देश से दुसरे देश फिर वहां से कही और.. इस प्रकार से तय की है और तो और उनके साथ एसपीजी के सुरक्षाकर्मी भी साथ में नही होते! सवाल तो यह भी है कि आखिर राहुल गाँधी ऐसे कौन से मिशन पर जाते हैं जिसमें उन्हें अपने सुरक्षाकर्मियों को भी ले जाने की इजाजत नही होती! साल 2015 में राहुल गाँधी 57 दिनों को विदेश यात्रा पर निकल गये थे इस दौरे से जुडी जानकारी किसी को नही थी लेकिन एक वेबसाईट ने दावा किया है कि कुछ पत्रकारों ने राहुल गाँधी से जुडी इस जानकारी इकट्ठी कर ली है कि इस दौरे के दौरान राहुल गाँधी कहाँ कहाँ गये!

16 फरवरी को दिल्ली से बैंकॉक के लिए उड़ान भरा.

• 17 फरवरी को बैंकॉक से कंबोडिया गये और वहां 11 दिनों तक ठहरे

• 28 फरवरी को वापस बैंकॉक आ गए

• अगले दिन म्यांमार पहुंच गये और वहां लगातार 21 दिनों तक विश्राम किया

• 22 मार्च को वापस थाइलैंड पहुंचे और अयुथ्या बौद्ध केन्द्र में 9 दिन रहे

• 31 मार्च को वियतनाम पहुंचे और 12 अप्रैल तक वहीं ठहरे

• 12 अप्रैल को एक बार फिर बैंकॉक पहुंच गये और 16 अप्रैल तक वहीं आराम किया। फिर वापस दिल्ली लौट आये।

हाल ही जब राहुल गाँधी अमेरिका गये तो कर्नाटक की सत्ता कांग्रेस के हाथ से चली गयी. इसके साथ 1 मार्च 2018 को राहुल गाँधी उस वक्त इटली चले गये थे, जब 2 मार्च को देश होली मना रहा था और 3 मार्च को त्रिपुरा, नागालैंड और मेघालय के नतीजे सामने आने वाले थे.. 3 मार्च को सामने आये इस परिणाम में कांग्रेस की करारी हार हुई थी. चुनाव के बाद ही राहुल छुट्टी पर चले गये थे. छुट्टी पर जाना मतलब विदेश चले गये थे. अपने नानी के घर भी जाते हैं जो इटली में है.

चुनाव में जीत या हार मिलने के बाद राहुल के विदेश के दौरे पर अक्सर चर्चा होती है. सोशल मीडिया से लेकर संसद तक राहुल गाँधी के विदेश जाने पर मज़े लेते रहें हैं लेकिन बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह शुरू से ही राहुल के विदेश दौरे का मजे लेते रहे हैं। उन्होंने कहा था कि जब राहुल विदेश चले जाते हैं तो उनकी मां को भी पता नहीं होता, बेटुआ कहां चला गया… वैसे इस बात में कोई दो राय नही है कि कई बार राहुल विदेश चले गये और उनके नेताओं को भी नही पता था कि आखिर राहुल गाँधी हैं कहाँ?

ज्यादातर दौरे बेहद गुप्त रखे जाते हैं. ऐसे लगता है कि भारत में राजनीति से ज्यादा राहुल गाँधी कहीं और ध्यान दे रहे हैं या किसी और देश में अपनी पैंठ बना रहें हैं क्योंकि इस समय कांग्रेस जिस स्थिति से गुजर रही है उसे एक कुशल और फुल टाइम अध्यक्ष की जरूरत हैं. पार्टी को खड़ा करने के लिए दिनरात मेहनत करने की जरूरत है और राहुल गाँधी रहते तो विदेशी दौरे पर हैं.अब भैया विदेश में जाते क्यों है? ये तो हमें भी नही पता.. पर जानने की इच्छा तो है.. आपको इसके बारे में कोई जानकारी हो तो जरूर बताइयेगा कमेंट करके.

अब बात करते हैं विदेश से दिल्ली वापस आने के बाद शीला दीक्षित के बेटे संदीप दीक्षित से लगभग तीन घंटे  तक मुलाक़ात की.. दरअसल ऐसा  अनुमान लगाया जा रहा है कि एक तरफ जहाँ शीला दीक्षित और पीसी चाको, सुरजेवाला के बीच मतभेद चल रहें थे वहीँ दूसरी तरफ शीला दीक्षित को बड़ी जिम्मेदारी दी जा रही थी. इसके बाद शीला दीक्षित के अंतिम खत में भी मतभेद की  बातें निकलकर सामने आई और राहुल गाँधी और संदीप दीक्षित की मुलाक़ात किसी और ही तरफ इशारा कर रही है. दरअसल संदीप दीक्षित ने कहा कि इस मुलाक़ात के दौरान राजनैतिक चर्चाएँ भी हुई है. अनुमान लगाया जा रहा है कि मतभेद के बीच राहुल का साथ शीला दीक्षित के खेमे को ही मिलने जा रहा है.

खैर इस पूरी खबर पर आपकी क्या राय है हमें कमेंट करके जरूर बताइये.