शराब और पैसे का लालच दिए बिना आख़िर भीड़ क्यो नही जुटा पाती कांग्रेस

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कांग्रेस को कभी देश की सबसे मज़बूत पार्टी माना जाता था। लेकिन समय ने करवट ली और 2014 आते आते जनता ने एक ही झटके में सारा हिसाब किताब करते हुए कांग्रेस की सत्ता से विदाई करा दी और नरेंद्र मोदी पीएम बन गए। उसके बाद से कॉंग्रेस सत्ता में आने का पूरा तिकड़म भिड़ा रही है। वो कभी पीएम को शिवलिंग पे बैठा बिच्छु बता रही है तो कभी मुलाकात में भी राफेल वाली राजनीति ढूंढ रही है। ख़ैर, छोड़िए ना ,अभी आपने प्रियंका वाड्रा का लखनऊ में हुआ रोड शो तो देखा ही होगा, कांग्रेस बता रही है कि ये अभूतपूर्व रोड शो था । पैर रखने तक को जगह तक नही थी। ये सब दिखाने के लिए कांग्रेसी प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने तो बाकायदा ट्विटर पर एक फोटो भी ट्विटर पर डाली थी जिसमे बड़ी भारी भीड़ दिख रही थी,लग रहा था जैसे दूसरे ग्रह के प्राणियों को भी इसी रैली में लाया गया हो ख़ैर बाद में ये तस्वीर फर्जी निकाली और प्रियंका चतुर्वेदी को भी अपने इस ट्वीट को हटाना पड़ा।


ख़ैर,इन सभी बातो को छोड़िए 
रैली में भीड़ जुटाने के लिए कांग्रेस मेहनत खूब करती है इस बात में कोई दोराय नही है। कैसे मेहनत करती है आइए जल्दी जल्दी आपको बता दिए देते है।
8 फरवरी को भोपाल के जंबूरी मैदान में कांग्रेस के मुखिया राहुल गांधी की आभार रैली थी। जिसमे कांग्रेस ने सीना तानकर मेहनत की,मीडिया में छाती तान तानकर लाखो लोगो की बात कह दी। लेकिन रैली में कम लोग ही आते दिखे। सरदार राहुल गांधी की नजरों में नम्बर कम ना हो जाए इसके लिए उनके सिपहसलार मिसरोद इलाके के 11 मील पर टेंट लगाके लोगो को शराब बांटने लगे।

पत्रिका अखबार की माने तो सभा मे लोगो को खीचकर लाने के लिए उन्हें शराब का लालच दिया गया। हम्म्म्म, लेकिन दारू बांटने वाली प्लानिंग भी फेल हो गई और लोग दारू पी पीक इधर उधर हो गए। बाद में कांग्रेसियों को खाली कुर्सियां हटाते भी देखा गया।
एक अकेली ही घटना नही है बल्कि इससे पहले भी कांग्रेस अपनी फ़जीहत करवा चुकी है।दैनिक भास्कर की 30 अक्टूबर 2018 की खबर के मुताबिक उज्जैन में राहुल गांधी की एक रैली में लोगो को लाने के लिए मजदूरो को 300 रुपए का लालच देकर मैदान में लाया गया पर 50 मजदूरो के सिर्फ 3000 रुपए ही दिए गए यानी कहाँ तो 1 मजदूर को 300 की बात तय हुई थी और कहां 50 मजदूरो को सिर्फ 3000 ही दिए गए। बाद में उन्ही पैसे को लेकर मजदूरो में आपस मे बीच सड़क पर ही लड़ाई भी हो गई थी। आपस मे जूते भी चले। ठीक है,यार बेज्जती ना हो जाये इसके लिए आपने मजदूरो को हायर किया होगा पर कम से कम उनका पेमेंट तो करना था ना। 
इसके अलावा वीडियो भी लगातार सामने आते गए,एक वीडियो सामने आया मणिपुर से जिसमे रैली में भीड़ जुटाने के लिए कांग्रेसी पैसा बांटते नजर आए।

ह्म्म्म,कई बार तो ऐसा भी हुआ कि अपना भौकाल टाइट करने के लिए कांग्रेसी नेता फ़ोटो शॉप के इस्तेमाल से भीड़ दिखाते नजर आए है,हालांकि बाद में सच्चाई सामने आने पर उनकी खूब थू थू भी हुई है। ऐसे ही जैसे प्रियंका चतुर्वेदी की हुई थी।

भाई हम तो यही कहेंगे कि अगर कांग्रेस को वाकई जनता के दिल मे पैठ बनानी है तो दारू,पैसे और फर्जी फ़ोटोशॉप के खेल से निकलकर जमीन पर उतरके जनहित से जुड़े मुद्दों को लेकर मेहनत करनी ही पड़ेगी वरना ऐसा दिन आते भी  देर नही लगेगी जब मैदान में जनता नही बल्कि अकेले नेता जी ही नज़र आएंगे। यकीन मानिए फिलहाल कांग्रेस को दारू नही दवा की जरूरत है