कांग्रेस ने किया मिशन शक्ति का राजनीतिकरण

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नमस्कार अभी तक आपको मिशन शक्ति के बारे में तो पता चल ही चुका होगा. मिशन शक्ति के अंदर भारत ने एंटी satellite मिसाइल यानी ASAT को विकसित करके एक बहुत बड़ा कीर्तिमान स्थापित कर दिया है. भारत अब अमेरिका, रूस और चीन के साथ चौथा ऐसा देश बन गया है जो कि जल, थल और नभ यानी वायु के साथ साथ अंतरिक्ष शक्ति भी हैं.

DRDO यानी Defence Research and Development Organization ने इस प्रोजेक्ट को सफलता पूर्वक अंजाम दिया. इसके लिए प्रधानमंत्री मोदी ने भी DRDO को बधाई भी दी.

Source-ANI

DRDO चीफ जी सतीश रेड्डी ने कहा कि ये प्रोजेक्ट सिर्फ दो साल पहले ही शुरू किया गया था. उन्होंने ये भी कहा कि इस प्रोजेक्ट को सीधा अजीत डोभाल देख रहे थे जिन्हें हम रिपोर्ट करते हैं और इस प्रोजेक्ट के लिए अजीत डोभाल को प्रधानमंत्री ने खुद स्वीकृति दी थी.

ये वाकई देश के लिए बहुत गर्व कि बात है कि सिर्फ दो सालों में भारत ने ये कीर्तिमान हासिल कर लिया. लेकिन इतना बड़ा कीर्तिमान भी भारत कि राजनीति की भेंट चढ़ गया. हुआ यूँ कि DRDO के पूर्व में अध्यक्ष VK Saraswat ने मोदी सरकार को बधाई देते हुए कहा कि ASAT मिसाइल का टेस्ट मोदी सरकार के नेतृत्व के कारण ही हुआ है जिसे पूर्व यूपीए सरकार ने अनुमति नहीं दी थी. इसके साथ पूर्व में रहे ISRO अध्यक्ष G Madhvan Nair ने भी मोदी सरकार कि इच्छा शक्ति कि तारीफ करते हुए कहा कि पिछली सरकारों में राजनीतिक इच्छा शक्ति नहीं थी तभी ASAT मिसाइल भारत को नहीं मिल सकी.

आपको बता दें 2012 में VK Saraswat मीडिया को ये बता चुके थे कि DRDO ASAT मिसाइल को विकसित कर सकता है लेकिन सरकार ने इसकी अनुमति अभी तक नहीं दी है.

आपको बता दें कि मोदी सरकार ने इस मामले में कांग्रेस पर कोई भी टिप्पणी नहीं की थी.

VK saraswat और G Madhvan Nair वैज्ञानिक हैं जिनका राजनीति से दूर से लेकर दूर तक कोई वास्ता नहीं है. मिशन शक्ति के बाद इनका जो भी बयान है उसे सभी को बहुत गंभीरता से लेना चाहिए था.

लेकिन इन साइंटिस्ट के बयान के पहले ही कांग्रेस ने अपनी राजनीति शुरू कर दी. उन्होंने नेहरु के ऊपर ऐसा अपना आभार दिखाया और प्रधानमंत्री मोदी पर ऐसे कटाक्ष किए कि DRDO का कीर्तिमान भारत का गर्व ही फीका पड़ गया.

अब आपको थोड़ा नेहरु जी के बारे में बताते हैं. नेहरु पहले से तैयार किए हुए भाषणों को संसद में पड़ा करते थे. एक बार नेहरु ने एटॉमिक प्लांट्स के ऊपर एक बहुत बड़ा भाषण दिया. इस भाषण के बाद Coimbatore से कांग्रेस के संसद NM Lingam ने इसी से जुड़ा एक बेहद आसन सा सवाल पूछ लिया कि एटॉमिक पॉवर प्लांट में यूरेनियम का इस्तेमाल होता है कि थोरियम का? इसके जवाब में नेहरु ने कहा कि ये बहुत टेक्निकल सवाल है और इसका जवाब में आपको नहीं दे सकता.

इसके आगे आपको ये पता होना चाहिए कि होमी भाभा को Father of Indian Nuclear programme कहा जाता है. भारत कि आज़ादी के बाद भारत का Nuclear programme शुरू ही हुआ था और ऐसे में पैसा और इस programme कि organization बहुत ज़रूरी थी. इसी को सुनिश्चित करने के लिए भाभा ने नेहरु से आग्रह किया था कि इन प्रावधानों को फाइव इयर प्लान में शामिल किया जाये. इसी को लेकर भाभा नेहरु से मिलना भी चाहते थे. लेकिन नेहरु ने सीधा कह दिया कि फाइव इयर प्लान में अब कोई बदलाव नहीं हो सकता. आप अभी मुझसे मिलने मत आइये. में व्यस्त हूँ और कश्मीर जा रहा हूँ.

इतना ही नहीं 1959 में एक प्रस्ताव आया कि हैदराबाद में इंस्टिट्यूट of nuclear physics कि स्थापना होनी चाहिए लेकिन इस मामले पर भी नेहरु ने अपना पलड़ा झाड़ लिया और ये प्रोजेक्ट को हमेशा के लिए भुला दिया गया.

आपको हम बता दें कि हमने ये खबर आप तक इसीलिए पहुंचाई क्योंकि ये ज़रूरी था. अगर कांग्रेस पार्टी और कुछ पत्रकार हर सफलता के लिए अगर नेहरु का गुणगान करेंगे तो ऐसे लोगों को इन सवालों का जवाब भी देना पड़ेगा.

अप्रैल 2012 में इंडिया टुडे में एक खबर छपी थी जिसमें DRDO चीफ VK Saraswat ने कहा था कि DRDO को चौदह हज़ार करोड़ रुपए कि ज़रूरत है लेकिन उनको सिर्फ दस हज़ार करोड़ रुपए ही मिले हैं. इसी का ने नतीजा था कि DRDO को अपने प्रोजेक्ट्स डिलीवर करने में बहुत देरी हो रही थी और इस देरी कि वजह से प्रोजेक्ट्स महंगे भी हो रहे थे जिसकी वजह से DRDO कि विश्वसनीयता पर ही सवाल खड़ा हो गया था.

लेकिन आपको जानकार हैरानी होगी कि 2018-19 में DRDO के बजट को बड़ा कर 18 हज़ार करोड़ तक कर दिया गया है. शायद इसी का नतीजा है कि DRDO ने 2014 के बाद नए कीर्तिमान हासिल किए हैं. माना प्रोजेक्ट्स पूरे होने में कई साल लगते हैं जिसमें सभी सरकारों का योगदान रहता है लेकिन अगर सरकार सिर्फ प्रोजेक्ट्स को स्वीकृति दे और पैसा ना दे तो ऐसे योगदान का क्या फायदा. इस लिहाज से देखा जाये तो मोदी सरकार ने DRDO का बजट बड़ा कर वाकई में DRDO कि बहुत मदद की है.

जब  केंद्र सरकार के नेतृत्व कि वजह से भारत ने मिशन शक्ति को अंजाम दिया तो सारा क्रेडिट नेहरु का लेकिन जब DRDO के पास रिसर्च करने का पैसा नहीं था और DRDO कि विश्वसनीयता पर सवालिया निशान खड़े हो गये थे तो ऐसे में ये जिम्मेदारी भी नेहरु जी की ही होनी चाहिए. साथ ही भारत आज डिफेन्स का 70% आयात यानी import विदेश से ही करता है क्योंकि भारत में वो टेक्नोलॉजी नहीं है तो इसके लिए भी नेहरु को ही जिम्मेदार ठहराना चाहिए.

नेहरु का झूठा महिमा मंडन करने वालों को ये जवाब भी देने होंगे. इसके साथ ये जवाब भी देने होंगे कि सेना ने सर्जिकल स्ट्राइक,  एयर स्ट्राइक और ASAT मिसाइल के लिए मनमोहन सरकार कि अनुमति मांगी लेकिन सरकार ने अनुमति क्यों नहीं दी .और हाँ ये वही लोग हैं जो कहते तो हैं कि प्रधानमंत्री हर बात के लिए नेहरु गाँधी परिवार को जिम्मेदार ठहरा देते हैं. लेकिन ऐसे लोग खुद ये बात भूलकर कश्मीर समस्या के लिए, गरीबी के लिए, भारत का चीन से पीछे होने के लिए, और अन्य सभी मामलों में भी नरेन्द्र मोदी को ही जिम्मेदार ठहरा देते हैं.

लोक सभा चुनाव 2019 अब बिलकुल नजदीक है ऐसे में ये हमारी जिम्मेदारी थी कि हम आप तक झूठा प्रोपगंडा नहीं सच को पहुंचाए.

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