कांग्रेस पार्टी के पास अब मोदी माला जपने के अलावा कुछ और नही बचा है

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स समय कॉन्ग्रेस पार्टी का यही हाल है पुश्तैनी रूप से राजनीति में बने रहने के कारण कांग्रेस को सत्ता खो देने का सदमा अभी तक लगा हुआ है भारतीय राजनीति उनके पुरखों द्वारा छोड़ी गई विरासत पर उसी का राज होना चाहिए कॉन्ग्रेस अपने इसी सपने को सालों से जीती आई है जिसकी उसे ऐसी लत लग गई है कि वो अब राजनीति में बने रहने के लिए किसी भी हद जाएगी इसका उदाहरण वो घोटाले हैं जिन्हें नज़रअंदाज़ करके वो फिर से सत्ता में अपनी वापसी का सपना सजाये बैठी है

मोदी सरकार के आने के बाद एक-एक करके कॉन्ग्रेस के वो सभी काले चिट्ठे सामने आने लगे जो सालों से दबे पड़े थे घोटालों पर घोटाले होते चले गए इन काले कारनामों में  मनी लॉड्रिंग, अगस्ता-वेस्टलैंड, खाद घोटाले, टैक्स चोरी से लेकर बोफ़ोर्स और पनडुब्बियों तक के हर घोटाले में कॉन्ग्रेस का हाथ शामिल था जिस पर से धीरे-धीरे पर्दा उठता चला गया

राहुल गाँधी जिस राफ़ेल को लेकर पीएम मोदी के इस्तीफ़े की माँग कर रहे थे, उस वक़्त उन्होंने मौन क्यों धारण कर लिया था जब राफ़ेल की असल क़ीमत पर से पर्दा उठा कि मोदी सरकार के दौरान हुई राफ़ेल डील यूपीए सरकार की तुलना में प्रति विमान ₹59 करोड़ रुपये सस्ती है ये राहुल गाँधी का ओवर कॉन्फ़िडेंस ही है, जो ख़ुद तमाम विवादों में घिरे होने के बावजूद मोदी सरकार को घेरने से नहीं चूकते

सत्ता से दूरी कांग्रेस को हजम नहीं हो पा रही है और अपनी वापसी के लिए उसे केवल मोदी को कोसने का ही मार्ग दिख रहा है, जिस पर वो बड़ी तेज़ी से बिना कुछ सोचे-समझे लगातार बढ़ती जा रही है मोदी सरकार ने अनेकों लाभकारी योजनाओं से जन-जीवन को सुधारने के अपने लक्ष्य को तो पूरा किया ही, साथ में वैश्विक स्तर पर अन्य देशों से जो संबंध आज भारत के साथ स्थापित हैं, उन्हें सही दिशा और मज़बूती भी प्रदान की विश्व में भारत की छवि एक ताक़तवर देश के रूप में बनकर उभरी है यह मोदी सरकार की सूझबूझ और सटीक रणनीति का ही परिणाम है

ऐसे में कांग्रेस के पास मोदी मोदी का राग जपने के अलावा कोई काम नही बचा है जनता सब जानती है ऐसे में कॉन्ग्रेस देश की जनता से किस आधार पर अपने पक्ष में वोट माँगने का साहस जुटा पाएगी जरा सब्र कीजिये अभी तो शायद बहुत कुछ देखना बाकी हो सकता है

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