आखिरकार कांग्रेस के नेता खुद कांग्रेस को क्यों दे रहे है झटका

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पिछले कुछ दिनों से देखे तो कांग्रेस को झटके पर झटका लग रहा है..लोकसभा चुनाव के मौसम में कांग्रेस के कई विधायक पार्टी से नाराज होकर लगातार खेमा बदल रहे हैं। कुल मिलाकर देखें तो पिछले 5 सप्ताह में 4 राज्यों में कांग्रेस के 6 विधायकों ने बीजेपी का दामन थाम लिया। इसी सिलसिले में महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष के नेता राधाकृष्णन विखे पाटील के बेटे सुजय विखे पाटील बीजेपी में शामिल हो गए..सुजय विखे-पाटील का मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस समेत बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं ने स्वागत किया, नेता प्रतिपक्ष के बेटे के ही पार्टी बदल लेने से कॉन्ग्रेस को राज्य में मुसीबत का सामना करना पड़ा। सुजय ने बीजेपी में शामिल होने के बाद कहा- “मुझे नहीं पता कि मेरे पिता इस फैसले का कितना समर्थन करेंगे, लेकिन बीजेपी के नेतृत्व में मैं अपना सब कुछ झोंक दूंगा। ताकि सभी को गर्व हो।” मौजूदा संकेतों के अनुसार, सुजय विखे-पाटील को अहमदनगर लोकसभा सीट से चुनाव लड़वाया जा सकता है, बीजेपी संसदीय बोर्ड को उनका नाम लोकसभा उम्मीदवारी के लिए भेज दिया गया है। इसकी जानकारी खुद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दी..

गुजरात में कांग्रेस की हालत और बुरी बनती जा रही है..पिछले पाँच हफ्ते में गुजरात के 4 विधायकों ने बीजेपी का दामन थाम लिया है..हाल ही में विधायक वल्लभ धारविया कांग्रेस का दामन छोड़ बीजेपी में शामिल हो गए..धारविया ने जामनगर ग्रामीण के विधायक पद से इस्तीफा दे दिया है..उन्होंने बीजेपी में शामिल होकर पीएम मोदी के नेतृत्व की प्रशंसा की..बता दें कि बीजेपी में धारविया के लिए ये घर वापसी जैसा है..2017 के विधानसभा चुनावों से पहले कॉन्ग्रेस में जाने और विपक्षी पार्टी के टिकट पर जीतने से पहले वह बीजेपी के साथ थे।

वल्लभ धारविया से पहले 2 विधायकों पुरुषोत्तम सावरिया और जवाहर चावड़ा ने एक ही दिन में कॉन्ग्रेस को डबल झटका दिया था और बीजेपी में शामिल हो गए थे। बता दें कि जवाहर चावड़ा और पुरुषोत्तम सावरिया दोनों ही नेताओं की अपने इलाक़े में अच्छी पकड़ रही है। चावड़ा को तो विजय रुपानी सरकार में मंत्री भी बनाया गया है।

वही, इससे पहले भी कर्नाटक में कांग्रेस विधायक उमेश जाधव ने पार्टी से इस्तीफा देने के बाद बीजेपी में शामिल हो गए थे..ऐसी आशंका जाताई जा रही है कि वह लोकसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के ख़िलाफ़ गुलबर्गा से चुनाव लड़ सकते है..बता दें कि खड़गे के बेटे को राज्य सरकार में मंत्रीपद दिया गया था, जिससे उमेश जाधव नाराज चल रहे थे और इसलिए उन्होंने इस्तीफा दे दिया..

बंगाल में भी कॉन्ग्रेस की स्थिति अच्छी नहीं है। यहाँ पार्टी के विधायक दुलार चंद बार ने बीजेपी का दामन थाम लिया है। बंगाल में बीजेपी को डबल फ़ायदा हुआ है। राज्य में माकपा विधायक खगेन मुर्गु भी बीजेपी में शामिल हो गए हैं। तृणमूल कॉन्ग्रेस के लिए भी कोई अच्छी ख़बर नहीं है। तृणमूल से निष्काषित सांसद अनुपम हजारा भी बीजेपी में शामिल हुए हैं। ये देख तो यही लग रहा है कि बीजेपी की पहले से अपेक्षा बंगाल में स्थिती बेहतर हुई है..

चुनावी मौसम में बीजेपी भी बाहर से आ रहे नेताओं की खुले दिल से स्वागत कर रही है…बीजेपी इससे पहले जहां से जीत दर्ज नहीं की थी..वहां के विधायकों के पार्टी में शामिल होने को बीजेपी एक अच्छी निशानी के रूप में देख रही है ।