कांग्रेस के दिग्गज नेता और परिवारवाद…

ए. ओ. ह्यूम, दादा भाई नौरोजी और दिनशा वाचा का बनाया दल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस. देश की एक प्रमुख राजनीतिक पार्टी है. ये पार्टी आज परिवारवाद की पार्टी कही जाती है. ऐसा कहा जाता है कि यह पार्टी बस एक परिवार की पार्टी बनकर रह गई है. हमने जब ये जानना चाहा कि ऐसा क्यों कहा जाता है, तो पाया ये पार्टी उस वक़्त से है जब देश आजाद भी नहीं हुआ था. कांग्रेस में देश की राजनीति के बहुत से बड़े और नामी-गिरामी चेहरे रहे.

आज हम आपको कांग्रेस के कुछ ऐसे ही बड़े चेहरों के बारे में बताएँगे.

1. सरदार वल्लभ भाई पटेल-

Source- लौह पुरुष

जनता की नज़र में प्रधानमंत्री पद के सबसे योग्य उम्मीदवार थे. उन्हें देश का पहला गृह मंत्री और उप-प्रधानमंत्री बनाया गया, और जवाहरलाल नेहरू बने देश के प्रधानमंत्री. मृत्यु के बाद उन्हें भारत रत्न से नवाज़ा गया.

2. लाल बहादुर शास्त्री-

Source- AllinHindi

जी का नाम भी कांग्रेस के कद्दावर नेताओं में शामिल है. वो देश के दूसरे प्रधानमन्त्री बने. साल 1964 में जवाहरलाल नेहरू की मृत्यु के बाद उन्हें भारत का प्रधानमंत्री बनाया गया. 11 जनवरी 1966 की रात, रहस्यमय परिस्थितियों में उनकी मृत्यु हो गयी. मृत्यु के बाद उन्हें भी भारत रत्न से सम्मानित किया गया.

3. पीवी नरसिम्हाराव-

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फादर ऑफ़ इन्डियन इकनोमिक रिफॉर्म्स कहे जाने वाले पीवी नरसिम्हाराव भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का एक बड़ा नाम रहे, वो एक योग्य नेता थे. वो लम्बे वक़्त से कांग्रेस के साथ थे, लेकिन 29 मई 1991 को राजीव गांधी की ह्त्या हो जाने के बाद उन्हें भारत का 10वाँ प्रधानमंत्री बनाया गया… इंदिरा गांधी, राजीव गांधी के जीवनकाल में वो प्रधानमंत्री नहीं बन सके.

4. सीताराम केसरी-

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महज़ 13 साल की उम्र से राजनीति में सक्रिय नेता, सीताराम केसरी कांग्रेस के कद्दावर भारतीय राजनेता. देश की आज़ादी के लिए वो 1930 से 1942 के बीच वो ना जाने कितनी बार गिरफ्तार हुए. इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और पी॰ वी॰ नरसिम्हा राव के कार्यकाल में केन्द्रीय मंत्री रहे और 1997 में कांग्रेस अध्यक्ष बनना ही उनकी उपलब्धि बनकर रह गई.

5. माधवराव सिंधिया-

1984 में भाजपा के प्रखर नेता अटल बिहारी बाजपेई के खिलाफ ग्वालियर से खड़े हो उन्हें भारी मतों से हराने वाले नेता, माधवराव सिंधिया. ग्वालियर के शाही खानदान के चिराग माधवराव सिंधिया, अपने पूरे जीवनकाल में कोई चुनाव नहीं हारे. आखिर में उन्होने कांग्रेस का दामन छोड़ अलग पार्टी बनाई और फिर जीते. लेकिन एक विजयी नेता को अलग पार्टी बनाने की ज़रुरत क्यूँ पड़ती है पता नहीं.

6. राजेश पायलट-

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राजस्थान के दौसा से कई बार सांसद रहे राजेश पायलट राजेश कांग्रेस के एक बड़े नेता हैं. उनके संघर्ष की कहानी लम्बी है. गरीबी से उठकर उन्होंने वायुसेना के लिए क्वालीफाई किया. वो वायुसेना छोड़ राजनीति में आये और 1980 में लोकसभा चुनाव लड़े… एक सड़क हादसे में उनकी मृत्यु हो गई थी. उन्होंने कांग्रेस के लिए बहुत काम किया लेकिन क्या उन्हें वो मुकाम हासिल हुआ जिसके वो हकदार थे?

7. सचिन पायलट-

Source- DNA india

राजेश पायलट के पुत्र, जो अपनी योग्यता और राजनीतिक पकड़ के दम पर महज़ 26 साल की उम्र में भारतीय सांसद बने. भारतीय सांसद बनने वाले वो भारत के सबसे युवा व्यक्ति बने. वो भी राजस्थान के दौसा से कांग्रेस के प्रतिनिधि हैं. वर्तमान समय में वो राजस्थान सरकार में उपमुख्यमंत्री पद संभाल रहे हैं. ये हम नहीं उनके समर्थक कहते हैं कि उन्हें वो मुकाम नहीं मिला है जिसके वो हकदार हैं.

हमें जो मिला, हम आपके सामने लाए. अब आप हमें बताएँ कि आपको क्या लगता है. क्या सच में कांग्रेस एक परिवार की पार्टी भर है?

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