जिस देशद्रोह का कानून खत्म करने की बात कांग्रेस कर रही हैं उसमें फंस चुके हैं ये बड़े नेता

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चुनावी घोषणाओं और वादों का एलान हो रहा है. मतलब आपके सामने लोलीपोप फेंका जा रहा है. आप पार्टियों के लोलीपॉप के लालच में आइये और अपना कीमती वोट देकर उन्हें सरकार और सत्ता में आने का मौका दीजिये… कांग्रेस पार्टी ने अपना घोषणापत्र जारी कर दिया है. इस घोषणापत्र में एक पॉइंट या एक घोषणा ऐसी है जिसपर इस समय खूब चर्चा हो रही है और कांग्रेस का घोषणापत्र विवादों में आ गया
दरअसल कांग्रेस पार्टी द्वारा जारी किये गये घोषणापत्र में कहा गया है कि अगर देश में कांग्रेस की सरकार बनती है तो देश से देशद्रोह का कानून खत्म कर दिया जाएगा मतलब देश के खिलाफ बोलने और लिखने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने वाले कानून को खत्म कर दिया जाएगा…इस देश में ऐसे कई लोग है जिनपर देशद्रोह का कानून लगाया है.. लेकिन आगे बढे उससे पहले आपको बताते चले कि कांग्रेस के घोषणा पत्र में कहा गया है कि सत्ता में आने पर भारतीय दंड संहिता की धारा 124ए (जो की देशद्रोह के अपराध को परिभाषित करती है) जिसका कि दुरूपयोग हुआ, और बाद में नये कानून बन जाने से उसकी महत्ता भी समाप्त हो गई है उसे खत्म किया जायेगा।


आईपीसी के सेक्शन 124-A के अंतर्गत किसी पर राजद्रोह का आरोप लगाया जा सकता है। इसके मुताबिक कोई भी व्‍यक्ति यदि बोलकर या लिकहकर, इशारों में या स्पष्ट रूप से दिखाकर, या किसी भी अन्य तरीके से ऐसे शब्दों का प्रयोग करता है, जो भारत में विधि द्वारा स्थापित सरकार के लिए घृणा या अवमानना, उत्तेजना या असंतोष पैदा करने का प्रयास करे, उस पर देशद्रोह का आरोप लगाया जा सकता है. देशद्रोह का आरोप सिद्ध होने पर उम्रकैद और जुर्माना या 3 साल की कैद और जुर्माना या केवल जुर्माने की सजा का प्रावधान है.
1891 में अखबार निकालने वाले संपादक जोगेन्द्र चंद्र बोस पर दर्ज किया गया था। इसके अलावा बाल गंगाधर तिलक पर भी इसके तहत मामला दर्ज किया गया था। 1870 में बने इस कानून का इस्तेमाल ब्रिटिश सरकार ने महात्मा गांधी के खिलाफ किया था. महात्मा गांधी पर इस कानून का इस्तेमाल वीकली जनरल में ‘यंग इंडिया’ नाम से आर्टिकल लिखे जाने की वजह से किया था। … साल 1962 में बिहार के केदारनाथ सिंह के खिलाफ भी एक भाषण की वजह से देशदोह के कानून का इस्तेमाल किया था हालाँकि बाद में इसे हाईकोर्ट ने इसे हटा दिया था. 2010 में बिनायक सेन पर नक्‍सल विचारधारा फैलाने का आरोप के बाद केस दर्ज किय गया था वहीं कोलकाता के कारोबारी पियूष गुहा पर देशद्रोह का केस दर्ज किया गया और बाद में उन्हें उम्र कैद की सजा सुनाई गयी.. वहीं इसी लिस्ट में साल 2015 में पाटीदार आन्दोलन से नेता बने हार्दिक पटेल और वामपंथी विचारधारा से प्रेरित जेएनयू के छात्र कन्हैया कुमार भी देश विरोधी नारे लगाने के आरोप में देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किया गया था.. इतना ही नहीं इस आरोप की चपेट में दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर एसएआर गिलानी, लेखिका अरुंधती रॉय भी आ चुके हैं।


हालाँकि कन्हैया कुमार, हार्दिक पटेल कई ऐसे लोग जिनपर देशद्रोह का आरोप लगा कांग्रेस उनके समर्थन में खड़ी रहती थी और अब ये एलान किया गया है कि देश में कांग्रेस की सरकार आने के बाद देश से देशद्रोह का क़ानून ही खत्म कार दिया जाएगा. इस पर बीजेपी नेता और केन्द्रीय मंत्री अरुण जेटली ने कड़ी प्रतिकिया देते हुए कहा है कि अगर कांग्रेस के मुताबिक यह कानून खत्म हो जाता है तो यह सीधे-सीधे सुरक्षाबलों को या तो कानूनी कार्रवाई में हमेशा के लिए उलझा देगा या वे आतंकियों के खिलाफ कोई कार्रवाई करने से बचने लगेंगे। यह देश की सुरक्षा के लिहाज से बेहद खतरनाक होगा। वहीं प्रधानमंत्री मोदी ने एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि विपक्ष देश के टुकड़े-टुकड़े करने की सोच रखने वाले लोगों के साथ खड़ा है।.