महात्मा गाँधी के विचार के विलोम है कांग्रेस पार्टी: प्रधानमंत्री मोदी

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लोक सभा चुनाव 2019 का शंख नाद कांग्रेस पार्टी ने आधिकारिक तौर पर 12 मार्च को हुई कांग्रेस वर्किंग कमेटी कि बैठक में प्रधानमंत्री मोदी के गढ़ गुजरात से शुरू किया. इसी दिन प्रधानमंत्री मोदी ने अपने ब्लॉग में कांग्रेस पर निशाना साधते हुए देश को बताया कि महात्मा गाँधी चाहते थे कि आजादी के बाद कांग्रेस को भंग कर दिया जाये.

नवासी साल पहले 1930 में हुई डांडी मार्च को याद करते हुए जिसमें 80 सत्याग्रही शामिल थे, प्रधानमंत्री ने ग्रैंड ओल्ड पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी महात्मा गाँधी के विचारों कि एक विपरीत विचार धारा बन गयी है. प्रधानमंत्री मोदी ने अपने ब्लॉग में महात्मा गाँधी के इस सत्याग्रह के बारे में भी विस्तार से लिखा. उन्होंने लिखा कैसे महात्मा गाँधी ने साबरमती आश्रम से तटीय गाँव डांडी जाकर सिर्फ एक मुट्ठीभर नमक से अंग्रेजों के साम्राज्य को हिला कर रख दिया था.

आगे वे अपने ब्लॉग में लिखते हैं कि क्या आप जानते हैं कि इस डांडी मार्च कि प्लानिंग में सबसे अहम भूमिका किसकी थी? वे लिखते हैं कि इस 390 किलोमीटर लम्बी मार्च में सरदार पटेल ने हर एक मिनट कि पूरी योजना बनाई थी.

अपने कई लेखों में महात्मा गाँधी ने यह साफ़ कर दिया था कि वे असमानता और जात पात में विश्वास नहीं रखते. लेकिन कांग्रेस ने समाज को बाटने में कभी संकोच तक नहीं किया. वे आगे ब्लॉग में लिखते हैं सबसे भयानक दंगे दलितों के खिलाफ और जाती के आधार पर कांग्रेस के शासन काल में ही हुए हैं.

प्रधानमंत्री आगे लिखते हैं कि महात्मा गाँधी को कांग्रेस कि संस्कृति समझ आ गयी थी तभी वे चाहते थे कि कांग्रेस को 1947 के बाद भंग कर दिया जाये.

प्रधानमंत्री मोदी याद करते हैं कि कैसे अंग्रेजों ने डर के कारण सरदार पटेल को डांडी मार्च शुरू होने से पहले ही गिरफ्तार कर लिया था.

आगे प्रधानमंत्री लिखते हैं कि मुझे गर्व है कि हमारी सरकार के हर कदम गरीबी दूर करने और खुशहाली लाने की दिशा में हैं. बापू ने 1947 में कहा था कि ये हर भारतीय का दायित्व है कि भारत का गौरव बढ़े. भ्रष्टाचार और कुशासन के साथ भारत का गौरव कभी नहीं बढ़ सकता. और भ्रष्टाचार और कुशासन एक दूसरे को बल देते हैं.

प्रधानमंत्री आगे कहते हैं कि हमारी सरकार ने हर वो कदम उठाया है जिससे भ्रष्टाचारी को सजा मिल सके. लेकिन कांग्रेस और करप्शन में अब ज्यादा अंतर नहीं रह गया है. किसी भी क्षेत्र का नाम लीजिये वहीं आपको भ्रष्टाचार मिलेगा अब चाहे वो डिफेन्स हो, टेलिकॉम हो, सिंचाई हो या ग्राम विकास हो.  

आगे प्रधानमंत्री लिखते हैं, “बापू कहते थे कि ज़रूरत से ज्यादा धन नहीं रखना चाहिए”. लेकिन इसके आगे वे कांग्रेस पर तंज कसते हुए लिखते हैं कि कांग्रेस ने ग़रीबों को मूलभूत सुविधाएँ देने के बजाये सिर्फ अपने बैंक अकाउंट भरने और शान शौकत कि ज़िन्दगी जीने का काम किया है.

आगे प्रधानमंत्री बापू के एक किस्से को याद करते हैं जहाँ बापू ने महिलाओं से बात करते हुए कहा था कि उन्हें ऐसी शिकायतें आ रही हैं कि भारत के बड़े नेता अपने बच्चों के ज़रिये पैसे कमा रहे हैं और भाई भतीजावाद के साथ भ्रष्टाचार भी बढ़ रहा है और इसके लिए मुझे जल्द कदम उठाना होगा. उस समय कांग्रेस ही एक प्रमुख राजनीतिक दल था तो ज़ाहिर है बापू का इशारा कहाँ था ये समझा जा सकता है. आगे प्रधानमंत्री लिखते हैं कि बापू को वंशवाद कि राजनीति से सख्त नफरत थी लेकिन कांग्रेस के लिए आज सिर्फ डायनेस्टी फर्स्ट ही सबसे अहम है.

बापू लोकतंत्र में विश्वास रखते थे और उनके अनुसार लोकतंत्र एक कमज़ोर और सशक्त को बराबर के अवसर देता है. लेकिन इसके आगे प्रधानमंत्री कांग्रेस को लोकतंत्र कि हत्या करने का दोषी ठहराते हुए कहते हैं कि कांग्रेस ने देश को इमरजेंसी दी. कांग्रेस ने अनुच्छेद 356 यानी राज्यों में राष्ट्रपति शासन भी सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया और चुनी हुई सरकारों को गिराने का काम किया.

वे आगे लिखते हैं कि गांधीजी को कांग्रेस कल्चर समझ आ गया था तभी वे चाहते थे कि कांग्रेस को भंग कर दिया जाये. बापू ने यह दुःख भी जताया था कि कई कांग्रेसी स्वराज को एक राजनीतिक ज़रूरत समझते हैं न कि एक अनिवार्य लक्ष्य. प्रधानमंत्री गांधीजी को दोहराते हुए कहते हैं कि कांग्रेस के नेता सिर्फ सांप्रदायिक सांठ गाठ करने में लगे हुए है.

1937 में गांधीजी ने कहा था कि वे खुद कांग्रेस को शांतिपूर्ण तरीके से भंग कर देंगे ना कि उसके भ्रष्टाचार का समर्थन करेंगे.

आखिर में प्रधानमंत्री अपने लेख को समाप्त करते हुए केंद्र सरकार के कदमों के बारे में बताते हैं कि कैसे वे बापू के पद चिन्हों पर चल रहे हैं और एक ऐसी जन शक्ति का निर्माण कर रहे हैं जिससे भारत को कांग्रेस कल्चर से मुक्ति मिल सके.