चिदंबरम ने पहले भी दिया था देश को धोखा, बाद में खुली पोल

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देश के पूर्व गृह मंत्री, वित्त मंत्री, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और अधिवक्ता पी चिदंबरम इस वक्त जांच एजेंसियों के घेरे में हैं, रिमांड पर हैं.. ये तो आप सभी जानते हैं और ये भी जानते ही होंगे कि आखिर वे किस आरोप में सीबीआई रिमांड पर है? लेकिन ऐसा नही है कि ये कोई पहला मौका जब चिदंबरम पर देश के साथ गद्दारी करने का आरोप लगा हो.. या देश के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगा हो.. आज हम आपको चिदंबरम की एक ऐसी कहानी बताने जा रहे है जो चिदंबरम के ढोंग को खोल कर रख देगी..

TFI में लिखे गये एक लेख के अनुसार, अगर चिदंबरम से जुड़े कुछ पुराने केस को खोलकर पढ़े तो ये समझ आता है कि चिदंबरम साहब ने पहले भी देश की प्रतिष्ठा को दांव पर लगा चुके हैं. दरअसल भारत सरकार के साथ हुए करार में  एक मल्टीनेशनल कंपनी एनरॉन को महराष्ट्र के राज्य में दाभोल पावर प्रोजेक्ट में काम करना था लेकिन कुछ गड़बड़ी के चलते तत्कालीन एनडीए की सरकार ने इस कंपनी की साड़ी सेवायें समाप्त कर दी थी. इसके बाद ये कम्पनी icj पहुँच गयी थी मतलब इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस पहुँच गयी थी. साल 2004 में ये मल्टीनेशनल कंपनी एनरॉन ने तत्कालीन एनडीए सरकार पर अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में मुकदमा दायर किया था. साल 2017 में सबसे पहले ज़ी न्यूज़ के अंग्रेज़ी विभाग WION न्यूज़ चैनल ने इस बारे में खुलासा किया था, जिसमें पी चिदंबरम और कांग्रेस के सत्ता की भूख का सबसे बड़ा पक्ष भी सामने आ गया था. दरअसल जानकारी के अनुसार एनरॉन कंपनी ने पी चिदंबरम की सलाह पर ही icj पहुंची थी. इसके लिए सरकार ने icj में अधिवक्ता के तौर पर हरीश साल्वे को नियुक्त किया था. इस बात की पुष्टि हरीश साल्वे में एक इंटरव्यू में खुद ही किया था. हालाँकि साल 2004 के बाद कांग्रेस की सरकार सत्ता में आई और पासा बिलकुल पलट दिया ..इसके बाद केंद्र की कांग्रेस सरकार ने हरीश साल्वे को हटाकर पाकिस्तानी मूल के वकील खावर कुरैशी को भारत की ओर से वकील के तौर पर नियुक्त किया गया. परिणामस्वरूप भारत ना कि बल्कि ये केस हार गया बल्कि कुरैशी को मोटी रकम भी चुकानी पड़ी थी..

 अब सवाल यही उठता है मन में, कि आखिर इससे भारत को नुकसान क्या हुआ? और इस केस से चिदंबरम का क्या लेना देना है? तो दोस्तों आपको बता दूँ कि खावर कुरैशी रहते तो लन्दन में हैं लेकिन मूल निवासी पाकिस्तान के ही हैं और ये वही खावर कुरैशी है जिन्होंने कुलभूषण जाधव का केस पाकिस्तान की तरफ से लड़ा था.. और भारत की तरफ से हरीश साल्वे को नियुक्त किया गया था, जिन्होंने भारत को जीत दिलाई और पाकिस्तान कि मुंह की खानी पड़ी थी.. कहा तो यह भी जा रहा है कि खावर की नियुक्ति में भी चिदंबरम का ही हाथ था. कुरैशी के विचार और अन्तराष्ट्रीय अदालत में कुलभूषण जाधव के मामले में उनके रुख को देखा जाये तो क्या ये देश के विश्वासघात जैसा नही लगता…जब ये मामला सामने आया तो भारतीय जनता पार्टी की तरफ से कांग्रेस के इस कदम आलोचना की गयी थी कहा गया था कि सरकार ने साल 2004 में एक पाकिस्तानी वकील क्यों रखा? क्या कांग्रेस को भारतीय वकीलों पर भरोसा नहीं था? भाजपा ने कहा कि एनरॉन मामला बेहद संवेदनशील तथा देश के लिए प्रतिष्ठा का सवाल है, आश्चर्य होता है कि जब देश का ढेर सारा पैसा तथा छवि की बात हो, तो भारत कुरेशी जैसे वकील को कैसे रख सकती है।

अब आपको बता दें कि ये वही पी चिदंबरम हैं जिनके अंतर्गत ‘भगवा आतंकवाद’ को सच साबित करना, और इशरत जहां जैसे मामलों में तथ्यों के साथ खिलवाड़ करना जैसे महान कार्य शामिल रहे हैं. इतना ही नही जब मुंबई पर 26/11 को आतंकवादी हमला हुआ था उस समय चिदंबरम साहब गृह मंत्री थे… जानकारी के मुताबिक़ तब तत्कालीन वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल फली होमी मेजर ने हमले के जवाब में आतंकी ठिकानों पर एयर स्ट्राइक्स का सुझाव दिया था लेकिन इसे मानने के बजाय उन्होंने सेना की अन्य टुकड़ियों से भी शांत रहने को कहा था. वोट की लालच और अन्तराष्ट्रीय स्तर पर खुद की छवि को चमकाने के लिए जिस तरफ से चिदंबरम साहब ने कांग्रेस पार्टी के साथ मिलकर देश के साथ विश्वासघात किया था, मंत्री रहते हुए घोटाले हुए और इस घोटाले में चिदंबरम के हाथ होने के सबूत मिल रहे हैं इससे तो साफ़ हो जाता है कि इन्होने देश की प्रतिष्ठा के साथ ना खिलवाड़ किया बल्कि देश को गड्ढे में धकेलने का भी काम किया जा रहा था.. अब चिदंबरम साहब सीबीआई रिमांड पर हैं और जानकारों का कहना है कि चिदंबरम से होने जा रही इस पूछताछ में कांग्रेस से जुड़े नेताओं के और भी बड़े गहरे राज सामने आ सकते हैं. खैर ये तो थी कांग्रेस के उस नेता की करतूत जिसपर देश की बड़ी जिम्मेदारी थी, देश को सँभालने की भी जिम्मेदारी थी..उन्होंने देश के साथ विश्वासघात किया..

इसे पूरे मामले पर आप क्या सोचते हैं कमेन्ट करके जरूर बताइए.