ख़त्म हो गई अडानी से दुश्मनी क्योंकि बात कोयले की है भाई

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कोयले की दलाली में हाथ तो काले होते ही हैं, ऐसा हमारे बड़े बुज़ुर्ग कहा करते थे. लेकिन यह भी सच ही है कि इसी कोयले की दलाली से कॉलर सफ़ेद भी होते हैं, और तैयार होता है ‘वाइट कॉलर’ तबका. इस तबके में समाज के ऊंचे लोग शुमार होते हैं. क्योंकि सफ़ेद कपड़ों पर काला निशान खिलता बहुत है.

Source- Bunkerist

यही वज़ह है कि वाइट कॉलर बिजनेसमैन कोयले की खदानों का ठेका पाने के लिए लड़ते रहते हैं. और वाइट कॉलर नेता ठेका दिलाने के लिए. इन लड़ाइयों में एक- दूसरे पर आरोप लगाए जाते हैं. एक- दूसरे को घेरने की कोशिश की जाती है.

कांग्रेस पार्टी एक लम्बे अरसे से उन क्षेत्रों में “माइन डेवलपर कम ऑपरेटर” के तौर पर खदान आबंटन, और कोयला खनन का विरोध करती रही है, जिन क्षेत्रों में भाजपा की सरकार रही है. सरकार में जब कभी बिजनेसमैन गौतम अडानी को किसी खदान का ठेका दिया गया तो कांग्रेस रूठ गई.

उसने साफ़ तौर पर कह दिया कि माइन डेवलपर कम ऑपरेटर यानी एमडीओ का तो तरीका ही गलत है. इस तरीके से खदान का ठेका बिलकुल नहीं देना चाहिए. और गौतम अडानी को तो बिलकुल भी नहीं. लेकिन फिर भी भाजपा सरकार हर बार ऐसा करती है, क्योंकि ये सरकार गौतम अडानी से मिली हुई है.

कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष राहुल गांधी ने तो भाजपा सरकार वाले उन राज्यों में तो बहुत सी सभाएं भी कीं जहां खनन होता है. उन्होंने इन सभाओं से राज्य और केंद्र दोनों सरकारों पर ना जाने कितनी ही बार निशाना साधा. उन्होंने कहा कि एमडीओ गलत है और गौतम अडानी को ठेका देना तो बिलकुल ही गलत.

कांग्रेस के अन्य नेता भी इसी तरह की बातें कर के पिछले कई सालों से भाजपा का विरोध करते आ रहे हैं. लेकिन अभी हाल फिलहाल में माहौल एकदम से पलट गया है. साल 2018 में छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार आई, और मुख्यमंत्री बने भूपेश बघेल.

ये भूपेश बघेल कांग्रेस के वही नेता हैं जो राज्य की सत्ता में आने से पहले, ना जाने कितनी बार भाजपा की राज्य सरकार और केंद्र सरकार पर आरोप लगाए. उन्होंने ना जाने कितनी बार सख्ती से ये कहा कि अडानी को जानबूझकर खदान का ठेका दिया जाता है.

लेकिन छत्तीसगढ़ की इसी कांग्रेस सरकार ने अभी हाल ही में कोरबा की गिधमुड़ी और पतुरिया कोयला खदान का ठेका गौतम अडानी को देने का फ़ैसला किया है. गौतम अडानी की कम्पनी अपने साथ कुछ दूसरी कंपनियों को लेकर इन कोयला खदानों में खनन करेगी. और सबसे बड़ी बात ये कि अडानी को इन खदानों का ठेका एमडीओ के तहत ही दिया जाएगा.

ये बात सच में हज़म होने वाली नहीं है. राज्य में कांग्रेस की सरकार है, भूपेश बघेल मुख्यमंत्री हैं, लेकिन ना तो एमडीओ को रद्द किया गया और ना ही इसकी जांच की गई. बल्कि फिर से एमडीओ के अंतर्गत ही अडानी को खदानों का ठेका दिया जा रहा है.

कांग्रेस सरकार और वर्तमान मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सत्ता में ना रहने पर एमडीओ और अडानी का इतना पुरजोर विरोध किया, लेकिन राज्य की सत्ता में आने के बाद खुद भी उन्ही रास्तों पर चलना शुरू कर दिया.

अब सवाल ये उठते हैं कि ऐसा आखिर हो क्यूँ रहा है? क्या कांग्रेस के भाजपा सरकार पर लगाए गए आरोप झूठे थे? या कि फिर अब कांग्रेस सत्ता में आने के बाद खुद अडानी से मिल गई है?