ये हैं वो नेता जिन्हें अपने ही चेले से करना पड़ा हार का सामना

लोकसभा चुनाव के नतीजे सामने आ गये हैं. देश में एक बार फिर मोदी सरकार बनने जा रही हैं. जल्द ही नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे.. लेकिन इस चुनाव में जहाँ मोदी विरोध की हवा बनाने की कोशिश की गयी थी, गठबंधन कर बीजेपी को सत्ता से बाहर करने के लिए सभी दल साथ आने की बात कर रहे थे वहीँ जब नतीजे सामने आये तो बड़े बड़े नेता चुनाव हार गये.. कई पूर्व मुख्यमंत्री चुनाव हार गये… कई मुख्यमंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे चुनाव हार गये.. हालाँकि आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि वो कौन से नेता है जिनके चेले ने ही उन्हें हार का मुंह दिखा दिया है. वो कौन से नेता है जो अपने चेले से ही हार गये हैं. और वो कौन से नेता है जिन्होंने अपने राजनीतिक गुरु को ही हराकर सांसद बन गये हैं

इस लिस्ट सबसे ऊपर हैं ज्योतिरादित्य सिंधिया… कांग्रेस के बड़े नेता है,, मध्य प्रदेश में बड़ा प्रभाव है.. लोकसभा चुनाव में पशिचमी उत्तर प्रदेश के प्रभारी भी थे.. सिंधिया खुद मध्य प्रदेश के गुना से चुनाव लड़ रहे थे. लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा है.. गुना सीट सिधिया की पारिवारिक सीट थी. कहा तो यह भी जाता था कि इस सीट से सिंधिया के परिवार में से किसी को भी किसी पार्टी से चुनाव लडवा दिया जाए तो उसकी जीत पक्की है.. लेकिन इस बार ज्योतिरादित्य सिंधिया के ही चेले उन्हें शिकस्त दे दी है. दरअसल कभी सिंधिया गाडी में बैठे होते थे तो उनके साथ सेल्फी केपी सिंह सेल्फी लेते थे और सिंधिया उन्हें लगातार इग्नोर करते थे.. लेकिन केपी सिंह ने सिंधिया से विधानसभा चुनाव में टिकट कि मांग की तो भी सिंधिया ने नजरअंदाज कर दिया. इसके बाद सिंधिया के राजदार केपी सिंह ने कांग्रेस को बाय बाय कर बीजेपी ज्वाइन कर ली और बीजेपी ने इन्हें सिंधिया के खिलाफ खड़ा कर दिया और आज केपी सिंह सिंधिया को हरा कर जीत हासिल कर ली है. केपी सिंह की सिंधिया के साथ वाली सेल्फी सोशल मीडिया  पर खूब छायी रही..

अगले नंबर पर हैं कांग्रेस के ही बड़े नेता और अहम पदों पर रह चुके मल्लिकार्जुन खडगे.. मल्लिकार्जुन खडगे की हार से कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है लोकसभा में कांग्रेस संसदीय दल के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे की जीत पर उनकी पार्टी को वायनाड में राहुल गांधी की जीत से भी अधिक यकीन था, लेकिन परिणाम चौंकाने वाला रहा है। खडगे को भी अपने ही चेले से हार का सामना करना पड़ा है. भाजपा नेता और कभी खड़गे से राजनीति की एबीसीडी सीखने वाले उमेश जाधव ने ही पहले चुनाव में खडगे को हरा दिया. गुलबर्गा सीट से 9 बार विधायक और दो बार सांसद रह चुके खडगे को 95,452 वोटों से पराजित होना पड़ा अपने ही चेले से..
अगले नंबर पर भी कांग्रेस के बड़े नेता और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरिष रावत जी हैं.. हरीश रावत ने हरिद्वार सीट को छोड़कर नैनीताल से चुनाव लड़ा था लेकिन रावत को बीजेपी के प्रत्‍याशी और उनके पुराने चेले अजय भट्ट ने 339096 वोटों से मात दी। इससे पहले भी उन्हें विधानसभा चुनाव में रावत को हार का सामना करना पड़ा था.

शिबू सोरेन.. झारखंड मुक्ति मोर्चा सुप्रीमो शिबू सोरेन को भी उनके चेले ने इस बार के चुनाव में जोरदार झटका दिया है। सोरेन को अपनी बिरादरी के अपने ही  चेले सुनील सोरेन से 32 हजार से अधिक मतों से हार का सामना करना पड़ा है. सुनील ने भी अपनी महत्‍वाकांक्षा के कारण ही अपने गुरु से अलग राह पकड़ी थी..

ये थे वे नेता जिन्हें अपने ही चेले से हार का सामना करना पड़ा है. हालाँकि विपक्ष ने को उम्मीद थी कि उनके रणनीति के आगे बीजेपी और एनडीए को हार का सामना करना पड़ेगा लेकिन चुनाव नतीजों ने सबको हैरान कर दिया है. भारतीय जनता पार्टी की प्रचंड जीत से विपक्ष कमजोर हो गया है. कांग्रेस दूसरी बार 100 के आकडे को पार कर पाने में असफल हुई है.. वहीँ भारतीय जनता पार्टी को लगातार दूसरी बार पूर्ण बहुमत मिला है और देश को लगातार दूसरी बार पूर्ण बहुमत वाली सरकार मिलने जा रही है.

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