कांग्रेस द्वारा हिन्दू आतंकवाद के झूठे षड्यंत्र का हुआ पर्दाफाश, 12 साल बाद मिला हिन्दुओं को न्याय

432

करीब 12 साल पहले पानीपत के पास हुए Samjhauta Express blast मामले में NIA की विशेष अदालत ने बुधवार को महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। अदालत ने स्वामी असीमानंद सहित मामले के चार आरोपी लोकेश शर्मा, राजेंद्र चौधरी और कमल चौहान को बरी कर दिया है. स्वामी असीमानंद ने इसे सच्चाई जीत बताया है.

समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट एक आतंकवादी घटना थी जो तत्कालीन युपीए सरकार कि एक बहुत बड़ी विफलता थी. इस विफलता को छिपाने के लिए यूपीए सरकार ने पूरी भारतीय संस्कृति को कलंकित करने का एक षड्यंत्र रचा. इस दौरान तुष्टिकरण की राजनीति ऐसी थी की तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने दिसम्बर 2006 में ये कह दिया था कि देश के संसाधनों पर मुसलमानों का सबसे पहला अधिकार है. दो महीने बाद यानी 18 फ़रवरी 2007 को समझौता एक्सप्रेस में ब्लास्ट हुआ और केंद्र एजेंसीज ने इस घटना में स्वामी असीमानंद समेत अन्य लोगों को गिरफ्तार कर लिया पूरी कोशिश की गयी कि हिन्दुओं को कैसे आतंकवाद से जोड़ा जाये.

इस घटना के बाद कांग्रेस की लीडरशिप जैसे तत्कालीन गृह मंत्री चिदंबरम, यूपीए 2 में गृह मंत्री शुशील kumar शिंदे, मणि शंकर अय्यर, कांग्रेस राष्ट्रीय महासचिव दिगविजय सिंह जैसे नेताओं ने देश में हिन्दू आतंकवाद कि एक झूठी theory को चलाने का प्रयास किया.

समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट ट्रेन भारत पाकिस्तान के बीच हफ्ते में दो दिन चलती है. ट्रेन दिल्ली से लाहौर जा रही थी. विस्फोट हरियाणा के पानीपत जिले के दीवाना स्टेशन के नजदीक हुआ था. हादसे में 68 लोगों की मौत और 12 लोग घायल हुए थे. धमाके में जान गंवाने वालों में भारत और पाकिस्तान के नागरिक थे.

इस मामले में 19 फ़रवरी 2007 को FIR दर्ज हुई इसके बाद आतंकवादी घटनाओं से निपटने की सबसे बड़ी जाँच एजेंसी नेशनल इन्वेस्टीगेशन एजेंसी NIA ने इस केस में जांच शुरू कर दी. सबसे पहले इन ब्लास्ट का जिम्मेदार हरयाणा पुलिस और महाराष्ट्र ATS ने अभिनव भारत नाम के एक हिन्दू संगठन को माना था. इसके बाद NIA ने 26 जून 2011 यानी धमाकों के चार साल बाद अपनी charge sheet दाखिल की. चार्ज शीट किसी भी केस में सबसे अहम होती है क्योंकि चार्ज शीट ही पूरी जाँच कि बुनियाद होती है एक बेस होती है, जिसके आधार पर जांच एजेंसी कोर्ट में आरोपी को अपराधी साबित करती है.

आखिर में 8 साल बाद सभी आरोपिओं को कोर्ट ने बरी कर दिया. इसके बाद तमाम नेताओं ने ट्वीट करके देश को गुमराह करने कि कोशिश की. ऐसा सन्देश देने की कोशिश की जैसे कि ये फैसला गलत है. कांग्रेस के दिग्गज नेता कपिल सिब्बल ने ट्वीट करके जस्टिस सिस्टम पर तंज कसते हुए कहा कि समझौता ब्लास्ट हुआ लोगों की जानें गयी लेकिन किसी को ये नहीं पता कि ये ब्लास्ट किसने किया. वहीं राणा अयूब नाम कि एक पत्रकार ने ट्वीट करके ये कहा कि राईट विंग आतंकवाद को एक बार फिर से क्लीन चिट मिल गयी.

इस मामले में हिन्दु धर्म को आतंकवादी धर्म बताने कि कोशिश की. लेकिन इस केस में कई ऐसे सवाल थे जिसके बाद कोई भी ये समझ जायेगा कि ये सिर्फ हिन्दू धर्म को बदनाम करने कि एक साजिश थी.

सबसे पहला सवाल, चार्ज शीट यूपीए के समय दाखिल हुई थी और जाँच भी तभी शुरू हो गयी थी और इस पूरे केस के दौरान सरकार बदलने के बाद भी NIA ने अपनी दलीलें नहीं बदली थी. साथ ही इस मामले में कुल मिला के 224 लोगों ने गवाही दी थी. वहीं दूसरी ओर बचाव पक्ष यानी असीमानंद के पक्ष में एक भी गवाह नहीं था. उसके बाद भी असीमानंद समेत चार आरोपियों को NIA दोषी क्यों नहीं साबित कर सकी. इसका जवाब है कि इन ब्लास्ट से हिन्दू संगठन या हिन्दू धर्म का कोई भी लिंक साबित ही नहीं हो सका.

दूसरा और सबसे अहम सवाल ये है कि 2009 में यूनाइटेड नेशंस 1267 कमेटी में ये बात साफ साफ लिखी है कि लश्कर-ए-तैयबा का चीफ कोऑर्डिनेटर आरिफ क़स्मानी ने समझौता एक्सप्रेस में ब्लास्ट करवाया था. आप सोच रहे होंगे कि ब्लास्ट भारत में हुआ तो क़स्मानी के बारे में ये जानकारी यूनाइटेड नेशंस ने कैसे दी. तो आपको बता दें कि इंटेलिजेंस ब्यूरो ने 2007 में पाकिस्तान और अमेरिका को क़स्मानी कि समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट में इन्वोल्वेमेंट के सबूत खुद दिए थे.

वहीं जनवरी 2010 में पाकिस्तान के इंटीरियर मिनिस्टर रहमान मल्लिक ने कहा था कि पाकिस्तान ने आतंकवादी हायर किए थे ब्लास्ट को अंजाम देने के लिए.

अमेरिका में हुई एक निजी जांच में भी पाकिस्तान और लश्कर ऐ तय्यबा के खिलाफ कई सबूत मिले थे. इसी जाँच में मुंबई धमाकों को अंजाम देने वाले आतंकवादी डेविड coleman हेडली की पत्नी फैज़ा ओउतल्ला ने 2008 में ये माना था कि समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट में हेडली का रोल था.

2007 में स्टूडेंट ऑफ़ इस्लामिक मूवमेंट ऑफ़ इंडिया यानी SIMI जो कि एक आतंकवादी संगठन है उसके लीडर सफ़दर नागोरी ने नार्को टेस्ट में ये कबूला था कि उन्होंने पाकिस्तान के लोगों को इस ब्लास्ट के लिए बहुत मदद की थी. सिमी के और लोगों के नार्को टेस्ट में भी ये बात साफ़ हो गयी थी कि ये ब्लास्ट में सिमी के एहतेशाम सिद्दीकी और नासिर सीधे तौर पर जुड़े थे.

सवाल ये है कि इतनी जरुरी जानकारियाँ जब प्रेस में और जाँच एजेंसीज के पास उपलब्ध थी तो NIA असीमानंद और अन्य 4 लोगों के पीछे क्यों पड़ी हुई थी. NIA ने आखिर किसके कहने पर सिमी और पाकिस्तान एंगल कि जाँच नहीं की? कौन पाकिस्तान कि मदद करना चाहता था?

सीनियर कोलुम्निस्ट गुरुमुर्थी के अनुसार शिंदे हिन्दुओं को इस घटना का ज़िम्मेदार मानते रहे तो क्या इसका मतलब ये समझा जाये कि यूनाइटेड नेशंस, अमेरिका और वाशिंगटन पोस्ट अख़बार लश्कर ऐ तय्यबा और  क़स्मानी के ऊपर झूठे आरोप लगा रहे थे?

सच्चाई तो ये थी कि कांग्रेस पार्टी एक तरफ तो मुसलमानों के वोट लेना चाहती थी वही दूसरी और हिन्दू आतंकवाद कि झूठी कहानी कि मदद से बीजेपी को राजनीति में पीछे करना चाहती थी. इस षड़यंत्र से देश को शर्मसार तब होना पड़ा जब जनवरी 2013 में सुशिल kumar शिंदे ने हिन्दू आतंकवाद को परिभाषित किया और जिसके जवाब में लश्कर ऐ तय्यबा के हेड हाफिज सईद ने आरएसएस और बीजेपी पर बैन कि बात की. बात यहीं नहीं रुकी इसके आगे हाफिज सईद ने मांग की कि भारत को एक आतंकवादी देश घोषित कर देना चाहिए क्योंकि भारत के गृह मंत्री ने खुद हिन्दुओं को आतंकवादी बताया है. भारत जैसे शांति प्रिय देश को एक आतंकवादी की ऐसी बातें सुन्नी पड़ी सिर्फ हमारे गृह मंत्री शिंदे कि वजह से.

हाला की शिंदे पहले ऐसे कांग्रेस नेता नहीं थे जिसने हिन्दुओं को आतंकवादी कहा था. इससे पहले चिदंबरम भी राज्य के DGP को कह चुके थे कि आप सैफरन यानी भगवा terror से निपटने कि वार्निंग तक दे चुके थे.

Wikkileaks के अनुसार राहुल गाँधी ने तो अमेरिकी ambassador से यहाँ तक कह दिया था कि भारत को लश्कर ऐ तय्यबा से इतना खतरा नहीं है जितना कि हिन्दुओं से है. इसके बाद कांग्रेस ने कभी भगवा आतंकवाद कह के कभी संघी आतंकवाद कह के तो कभी हिन्दू आतंकवाद कह के हिन्दुओं को बदनाम करती रही. आतंकवाद का जब धर्म नहीं होता तो हिन्दू आतंकवाद को कांग्रेस पार्टी ने क्यों परिभाषित किया?

कांग्रेस पार्टी को समझना चाहिए था कि भगवा से हिन्दू से हमारे देश भारत का इतिहास, संस्कृति और खुद भारत जुड़ा हुआ है. सिर्फ राजनीति कि वजह से पूरे हिन्दू धर्म को बदनाम करके कांग्रेस न तो 2014 चुनाव जीत पाई और न ही हिन्दू आतंकवाद को साबित कर सकी.

वीडियो