राजेश खन्ना और शत्रुघ्न सिन्हा के बिगड़े रिश्ते की वजह

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bollywood में फिल्मों को लेकर, और ऊटपटांग को स्टेटमेंट को लेकर सितारों के बीच मनमुटाव आम बात है… लेकिन हमारे bollywood के कुछ सितारों ने आपसी मनमुटावों की इस प्रथा को सिर्फ बॉलीवुड तक ही सीमित नहीं रखा बल्कि bollywood के साथ-साथ राजनीति तक भी पहुंचाया.
आज हम ऐसी ही एक कहानी पर बात करेंगे. इस कहानी में हम जानेंगे शत्रुघ्न सिन्हा और राजेश खन्ना के बीच आई दरार के बारे में.

लाजपत नगर में मूलचंद मेट्रो स्टेशन से सटा जो नेशनल पार्क है वो गुजरे जमाने के बॉलीवुड सुपरस्टार रहे राजेश खन्ना के नाम पर बनवाया गया है… पिछले साल इसका उद्घाटन राजेश खन्ना की पत्नी डिंपल कपाड़िया ने किया था…. आपके अंदर एक सवाल पैदा हो रहा होगा कि लाजपत नगर में राजेश खन्ना के नाम पर पार्क क्यों? सवाल वाजिब भी है…. दरअसल वो नई दिल्ली सीट से 1992 में हुए लोकसभा के लिए हुए उपचुनाव में जीते थे…. नेशनल पार्क उसी नई दिल्ली सीट का अंग है…..

राजेश खन्ना 1992 से लेकर 1996 तक नई दिल्ली सीट के दावेदार रहे थे…. वो बेहद लोकप्रिय और मिलनसार नेता के रूप में अपनी छवि बनाने में कामयाब हुए थे….. दरअसल नई दिल्ली सीट का वो उप चुनाव सच में बॉलीवुड के दो बड़े सितारों के बीच हुआ था…. जहां राजेश खन्ना कांग्रेस के उम्मीदवार थे, वहीं शत्रुघ्न सिन्हा को भाजपा ने टिकट दिया था….

उस उप चुनाव की नौबत इसलिए आई थी कि 1991 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के कद्दावर नेता लाल कृष्ण आडवाणी गांधीनगर और नई दिल्ली से लड़े और जीते….वो नई दिल्ली सीट पर जैसे-तैसे ही राजेश खन्ना को हरा पाए थे… उस जीत का अंतर केवल 1500 वोटों का था…लेकिन लोकसभा चुनाव में आडवाणी जी को गुजरात के गाँधीनगर सीट से भी जीत हासिल हुई थी … इसलिए उन्हें दिल्ली की seat छोड़नी पड़ी….

अब दो फिल्मी सितारे एक दूसरे के आमने-सामने थे…….आडवाणी के नई दिल्ली सीट को छोड़ने के बाद भाजपा की तरफ से शत्रुघ्न सिन्हा को नई दिल्ली सीट से खड़ा किया गया था……उन्होंने पार्टी का फैसला मानते हुए बॉलीवुड के मित्र से लड़ने के लिए हामी भर दी….. राजेश खन्ना मतदाताओं से घर-घर जाकर मिल रहे थे…. वह जनता से तमाम वादे भी कर रहे थे…. तब भी नई दिल्ली के कुछ मतदाताओं और राजनीतिक समीक्षकों को लग रहा था कि राजेश खन्ना भी अमिताभ बच्चन की तरह भाग जाएंगे….

वैसे आपको बता दें कि कांग्रेस ने 1984 के लोकसभा चुनाव में इलाहाबाद जो अब प्रयागराज बन चुका है… वहाँ से राजेश खन्ना को टिकट दिया था पर कथित बोफोर्स घोटाले के सुर्खियां बनने के कारण उन्होंने अपनी लोकसभा सीट को छोड़ दिया था….इसलिए उस वक़्त यह हॉट टॉपिक था डिस्कशन के लिए कि राजेश खन्ना भी एक बार चुनाव जीतने के बाद अपने मतदाताओं को भूल जाएंगे, उन्हें छोड़ देंगे… अंतत: चुनाव तो राजेश खन्ना मजे से जीत गए, लेकिन बॉलीवुड के दोस्तों की दोस्ती टूट गई….
बहरहाल शत्रुघ्न सिन्हा ने खुद माना कि चुनाव में हारने की वजह से बड़ा नुकसान ये हुआ था कि राजेश खन्ना उनसे खफा हो गए…. फिर वो संबंध कभी सामान्य नहीं हुए….