रोजगार से जुड़ा कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडियन इंडस्ट्रीज का सबसे बड़ा सर्वे

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दोस्तों भारत दुनिया का सबसे युवा देश है. ऐसा इसीलिए क्योंकि भारत कि वर्किंग पापुलेशन जिसमें 15 साल से 59 साल के लोग आते है वो भारत कि जनसंख्या का 62 प्रतिशत से भी ज्यादा है. इसी के चलते नौकरियों से लेकर आर्थिक गति के क्षेत्र में भारत में अपार संभावनाएं हैं. 2013 में विश्व प्रसिद्ध इन्वेस्टमेंट बैंक मॉर्गन स्टेनली ने भारत को फ्राजायिल फाइव यानी कमजोर पांच अर्थव्यवस्थाओं में रखा था. लेकिन आज अंतरराष्ट्रीय संस्था विश्व बैंक भारत को पूरे विश्व की सबसे तेज़ गति से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था बता रहा है.

इसी से संबंधित कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडियन इंडस्ट्रीज यानी CII का आज तक का सबसे बड़ा सर्वे नौकरियों को लेकर सामने आया है. आगे बात करने से पहले आपको कुछ बातें बता होनी चाहिए. सबसे पहले कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडियन इंडस्ट्रीज यानी CII एक बिज़नस समूह है जिसे 1895 में गठित किया गया था. ये समूह इंडस्ट्री से और इंडस्ट्री के द्वारा चलाया जाता है और ये भारत सरकार की नीतियाँ बनाने में भी मदद करता है.

दूसरा, ये सर्वे अभी तक का सबसे बड़ा सर्वे है जिसमें एक लाख पांच हज़ार से भी ज्यादा इंडस्ट्रीज को शामिल किया गया है. इस सर्वे में भारत के सभी राज्य शामिल हैं.

तीसरा, माइक्रो, स्माल और मीडियम इंटरप्राइजेज यानी उद्योग. माइक्रो इंटरप्राइज वो होते हैं जिनमें इन्वेस्टमेंट 25 लाख से ज्यादा की नहीं होती. वही स्माल एंटरप्राइज वो होती हैं जिनमें इन्वेस्टमेंट 25 लाख से ज्यादा और 5 करोड़ से कम की होती है. मीडियम इंटरप्राइजेज में इन्वेस्टमेंट 5 करोड़ से ज्यादा और 10 करोड़ से कम होती है. नौकरियों की दृष्टि से देखें तो माइक्रो इंटरप्राइजेज आम लोगों को सबसे ज्यादा नौकरियां देने में सक्षम होती हैं.

तो अब आपको सर्वे के बारे में बताते हैं. सर्वे सबसे पहले हाल ही में सरकार द्वारा उठाये कदमों को गिनाता है जिससे नौकरी सृजन में काफी मदद मिली है. पहली है, इंटरेस्ट subvention स्कीम मतलब जब MSME इंडस्ट्रीज लोन लेती है तो लोन को लौटते हुए उन्हें उस लोन पर कम इंटरेस्ट देना होता है. दूसरा, श्रम सुविधा पोर्टल जिसमें MSME इंडस्ट्रीज सरकारी कानून जैसे इंस्पेक्शन का पालन इन्टरनेट के ज़रिये ही करती है. और तीसरा है ट्रेड्स पोर्टल जिससे छोटे उद्योगों को क्रेडिट लेने में बहुत आसानी हो जाती है. छोटे उद्योगों के लिए क्रेडिट सबसे मुख्य होता है जिससे उनका बिज़नस बढ़ता है.

इसके बाद सर्वे बीते चार सालों में नौकरियों की रिपोर्ट कार्ड देता है. सर्वे के मुताबिक पिछले चार साल में भारत का एम्प्लॉयमेंट बेस 2013 के मुकाबले 14% बढ़ा है और हर साल छोटे उद्योगों में डेढ़ करोड़ नौकरियां हर साल पैदा हुई हैं. सर्वे में भाग लेने वाले 66% उद्योगों ने बताया कि उन्होंने पिछले चार सालों में हायरिंग 2013 के मुकाबले बड़ाई है. जिसमें की माइक्रो इंडस्ट्रीज यानी सबसे छोटे उद्योगों ने सबसे ज्यादा नौकरियां दी हैं. सेक्टर्स कि बात की जाये तो होटल और टूरिज्म सेक्टर के बाद टेक्सटाइल सेक्टर और ट्रांसपोर्ट सेक्टर ने सबसे ज्यादा नौकरियां दी हैं.

अगर राज्यों कि बात की जाये तो सर्वे के मुताबिक सबसे ज्यादा रोजगार महाराष्ट्र के बाद गुजरात और तेलंगाना में है.

छोटे उद्योग जो अपना माल भारत में बेचते हैं वो सबसे ज्यादा नौकरियां देते है. ये वही उद्योग हैं जो एक आम आदमी को रोज़गार देते है और जो आपसे और हमसे सीधे तौर पर जुड़े होते हैं. जैसे फ़ूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री जो किसान के आलू से लेस चिप्स बनाती हैं. एक किलो आलू जब चिप्स में बदलते है तो उनकी वैल्यू अडिशन बहुत बढ़ जाती है. इससे किसान को बहुत मुनाफा होता है और आप चिप्स का स्वाद लेते हैं.

सर्वे ये भी बताता है कि आने वाले एक साल में करीब 21 % ज्यादा एम्प्लॉयमेंट जनरेशन होगा. जिसमें सबसे छोटे उद्योग 73% नौकरियां देंगे.

आने वाले तीन सालों में सर्वे के मुताबिक हमारा एम्प्लॉयमेंट बेस करीब 35 % तक और बढ़ जायेगा जो कि काफी बड़ा आकड़ा है. जिसमें नॉन एक्सपोर्टर्स जिनका व्यापार भारत तक ही सीमित होता है वो सबसे ज्यादा 74 % नौकरियां देंगे. टूरिज्म, होटल, टेक्सटाइल बिज़नस इन नॉन एक्सपोर्टर्स में शामिल है.

जब सर्वे में पूछा गया कि 2013 के बाद से जो एम्प्लॉयमेंट बेस बड़ा है उसके मुताबिक उद्योग नयी हयिरिंग कब तक कर लेंगे तो 87% उद्योगों ने दावा किया कि वे सिर्फ तीन महीने में ही नयी नौकरियां लोगों को दे देंगे.

आपको बता दें पिछले साल ही प्रधानमंत्री मोदी ने छोटे लघु उद्योगों को दीवाली गिफ्ट के तौर पर कई सौगातें दी थी. जैसे छोटे उद्योगों को अब सिर्फ एक घंटे में 1 करोड़ रुपय तक का लोन बिना किसी कोलैटरल के मिल सकता है. पब्लिक सेक्टर के लिए ये अनिवार्य कर दिया गया की वे 25% तक की खरीद अब छोटे उद्योगों से ही करेंगे. ये एक बहुत बड़ा कदम इसलिए है क्योंकि सरकार हाईवे, मेट्रो जैसे हजारों करोड़ के प्रोजेक्टों में सीमेंट, स्टील 25% अब छोटे उद्योगों से ही लेगी. इसके साथ छोटे उद्योग द्वारा लिए गए एक करोड़ तक के लोन में 2% इंटरेस्ट कम लिया जायेगा. इसके साथ छोटे उद्योगों में नयी टेक्नोलॉजी आये इसके लिए 6000 करोड़ का प्रावधान किया गया था. सबसे अहम दीवाली गिफ्ट ये था कि सरकार के इंस्पेक्टर अब उद्योगों को परेशान नहीं कर पाएंगे क्योंकि अब से उद्योग इन्टरनेट के माध्यम से ही कानूनों का पालन कर सकते है.

इस CII सर्वे को काफी अहम माना जा रहा है क्योंकि ये एक प्राइवेट संस्था है जिसका सर्वे एकदम निष्पक्ष है. CII के साथ साथ विश्व प्रसिद्ध संस्थाएं जैसे विश्व बैंक और IMF भारत सरकार कि आर्थिक नीतियों की कई बार तारीफ कर चुकी है. अगर देश की आर्थिक नीति और गति इसी दिशा में आगे बढ़ती रहेगी तो जल्द ही भारत का न्यू इंडिया का सपना पूरा हो सकेगा.

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