दलितों की आड़ में वामपंथी मिशनरी इस तरह से देश की संस्कृति को कर रहे ख़त्म

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किसी देश को कमजोर करने के लिए सबसे पहले वहां की संस्कृति को कमजोर करना पड़ता है. संस्कृति कमजोर होती है तो वहां के लोग कमजोर होते हैं और लोग कमजोर होते है तो सभ्यता कमजोर होती है और फिर एक दिन देश खंड खंड हो जाता है. इसी मिशन के तहत देश में मिशनरियां काम करती हैं. इन मिशनरियों के निशाने पर होते हैं गरीब और कमजोर तबके के लोग. क्योंकि इन्हें बहलाना बहुत आसान होता है. सोशल मीडिया पर अक्सर हमें विडियो देखने को मिल जाते हैं. अत्यंत पिछड़े और सुदूर इलाके में एक पैकेट चावल के बदले भी धर्म परिवर्तन करा लिया जाता है मिशनरियों द्वारा.

मिशनरियों के अलावा एक और गैंग सक्रीय है जो देश की सभ्यता और संस्कृति को ख़त्म करने की जुगत में लगा हुआ है. ये है वामपंथियों और फेमिनिस्टो का गैंग. इस गैंग को आप हिन्दू त्योहारों का विरोध करते हुए अक्सर सोशल मीडिया पर देखते हैं. जैसे करवाचौथ आया तो उसे महिलाविरोधी बता दिया, रक्षा बंधन को महिला विरोधी बता दिया. बिंदी, सिन्दूर, मंगलसूत्र ये सब हिन्दू सभ्यता और संस्कृति का प्रतीक हैं लेकिन फेमिनिस्टो के लिए ये चीजें महिला विरोधी चीजें हैं. इस गैंग को पता है कि महिलायें विद्रोही होंगी तो परिवार टूटेगा, परिवार टूटेगा तो समाज टूटेगा और समाज टूटेगा तो देश टूटेगा, सभ्यता ख़त्म होगी.

अब आपको हम एक विडियो दिखाते हैं. इस विडियो में जय भीम का नारा लगाते आँखों पर काला चश्मा लगाये कुछ महिलाएं हैं. जो मंगलसूत्र पहने महिलाओं को ये कह कर मंगलसूत्र तोड़ने को उकसा रही हैं कि क्या इसके पहनने से पति की उम्र लम्बी हो जायेगी? वो ये सवाल भी उठा रही है कि क्या करवाचौथ करने से पति की उम्र लम्बी हो जायेगी. आपके पति तो नहीं पहनते.

ये महिला संविधान की बता कर रही है और कह रही है कि हम बाला साहब की बेटियां है. हमारे पास संविधान की ताकत है इसलिए तोड़ कर फेंक दो इस मंगलसूत्र को. संविधान करेगा तुम्हारे पति की रक्षा. अब आप उन बेचारी महिलाओं को देखिये जिन्होंने मंगलसूत्र पहन रखा है. मुस्कुराते हुए बिना किसी प्रतिरोध के अपना मंगलसूत्र उतारने की कोशिश करती है लेकिन तब तक गैंग वाली महिला उसका मंगलसूत्र तोड़ देती है.

ये विडियो है बरौडा में दलितों के संकल्प भूमि कार्यक्रम का. इस कार्यक्रम में मनुवाद को काटने और मिटाने की बात की जा रही है. लेकिन मनुवाद तो सिर्फ बहाना है इसके बहाने हिन्दू सभ्यता और संस्कृति को मिटाने का एजेंडा चलाया जा रहा है और दलितों की आड़ लेकर ये एजेंडा चला रहे हैं मिशनरी और वामपंथी. लेकिन आप इन्हें कुछ कह नहीं सकते. जानते हैं क्यों? क्योंकि कुछ मत बोलो सेक्युलरिज्म है.

ये आपके देवी देवताओं का अपमान करेंगे. ये आपके प्रतीकों को तोड़ कर फेंक देंगे. लेकिन आप इन्हें कुछ नहीं कह सकते क्योंकि आपको दलित विरोधी घोषित कर दिया जाएगा. आप पर किसी की अभिव्यक्ति की स्वतंत्र को दबाने का आरोप लगा दिया जाएगा.