यूनिवर्सिटी ने लगाया सरस्वती पूजा पर रोक! कहा- धर्मनिरपेक्ष हैं कैंपस

देश में पिछले कुछ समय से देश में सेक्युलरिज्म को लेकर जोरदार बजस चलती है. ऐसी कई सारे घटनाएँ देश में हुई हैं जिसे देखने के बाद आपको सेक्युलरिज्म शब्द से ही चिढ हो सकती है…आज हम आपको एक ऐसी घटना बताने जा रहे हैं जो वाकई बेहद हैरान कर देने वाली हैं.
दरअसल मामला कोच्ची यूनिवर्सिटी का हैं. जहाँ के वौइस् चांसलर वीसी इस समय विवादो में आ गये हैं. विवाद की वजह हैं. यूनिवर्सिटी में पूजा करने से मना करना.दरअसल मामला बसंत पंचमी से जुड़ा हुआ है. बसंत पंचमी के दिन ‘सरस्वती पूजा’ का त्‍योहार मनाया जाता है. इस बार बसंत पंचमी 9 फरवरी को है। इस दिन मां सरस्वती की पूजा का विशेष महत्‍व होता है. हिंदू धर्म में माता सरस्वती को विद्या और बुद्धि की देवी माना गया है. इसी पूजा का आयोजन करने के लिए उत्तर भारत के कुछ छात्रों ने इच्छा जाहिर की थी लेकिन वीसी साहब ने यह कहते हुए इंकार कर दिया कि ये धर्मनिरपेक्ष यूनिवर्सिटी हैं. यहाँ धार्मिक आयोजन नही किये जा सकते हैं. ये चिठ्ठी देखिये जिसमें वौइस् चांसलर ने यह कहते हुए सरस्वती पूजा की अनुमति देने से इनकार कर दिया कि हमारा कैंपस धर्म निरपेक्ष हैं.


लेकिन मिली कुछ जानकारियों के मुताबिक़ इस कैपस में क्रिसमस को बेहद ही धूमधाम तरीके से मनाया जाता है तो फिर ये धर्मनिरपेक्ष कैसे हुआ? क्या सिर्फ बसंत पंचमी के दिन पूजा करने से ही यूनिवर्सिटी की धर्म निरपेक्षता आहत होती हैं. मामले के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसकी खूब आलोचना हो रही है और इसे बेहद नीची मानशिकता से प्रेरित फैसला बताया जा रहा है.
इतना ही नही आपको यह जानकर और भी हैरानी होगी और गुस्सा आएगा कि यहाँ पढने वाले कुछ छात्रों ने पिछले साल आरोप लगाया था कि उन्हें गुमराह करके गौमांस तक खिला दिया गया था. बताया गया था कि प्रिसिपल साहब ने अपना अहंकार बढाने के लिए ऐसा किया था…
अब यहाँ सवाल उठता है कि क्या हिन्दू छात्रों द्वारा किये जाने वाले सरस्वती पूजा से धर्मनिरपेक्षता आहत हो रही थी? जिन लोगों को इस आयोजन से आपत्ति होती उन्हें इस आयोजन में शामिल होने के कोई दबाव डाला नही गया.. जबकि इसी कालेज में कुछ महीने पहले ही क्रिसमस को बड़े ही धूमधाम से मनाया गया था..केरल में पहले भी इस तरह की कई घटनाएँ सामने आ चुकी हैं जहाँ कई हत्याएं सामने आई. अब सोचने वाली बात यह है कि वौइस् चांसलर के ऐसे फैसले से कैसे देश को धर्म निरपेक्ष बनाया जा सकता है. माना जा रहा है कि इस फैसले को लेकर देश के हिंदूवादी संगठन अब सड़कों पर भी उतर सकते है.

जब यूनिवर्सिटी में छात्रों के अंदर इस तरह के भेदभाव को कुलपति द्वारा पीड़ा किया जा रहा है तो इन छात्रों पर क्या प्रभाव पड़ेगा. अगर यूनिवर्सिटी में किसी भी धार्मिक आयोजन को इसलिए नही किया जाता है क्योंकि यूनिवर्सिटी धर्मनिरपेक्ष हैं तो फिर क्रिसमस का आयोजन क्यों किया गया.

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