वोटबैंक तो सिर्फ मुसलमान है इसलिए सिख, जैन, पारसी की बात कर दी तो हंगामा मच गया

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आज लोकसभा में नागरिकता संसोधन विधेयक पेश हुआ. ये तो तय था कि इस पर विपक्ष हंगामा करेगा और विपक्ष ने हंगामा किया भी. विपक्ष का हंगामा इस बात के लिए था कि इस विधेयक से अल्पसंख्यक क्यों बाहर है? यूँ तो इस देश में हिन्दुओं के अलावा बाकी सभी धर्म अल्पसंख्यक ही है. लेकिन अगर बात वोटबैंक की आती है तो अल्पसंख्यक का मतलब सिर्फ मुसलमान रह जाता है. सिख, बौद्ध, जैन, पारसी सभी गौण हो जाते हैं. उनके लिए आवाज उठाने वाला कोई नहीं रहता. लेकिन आज गृहमंत्री अमित शाह ने इनके लिए आवाज उठाई तो हंगामा हो गया.

1947 में देश का बंटवारा धर्म के आधार पर हुआ था. टू नेशन की थ्योरी देते हुए जिन्ना ने कहा था कि हिन्दुओं को हिन्दुस्तान मिल गया, मुसलमानों को क्या मिला? मुसलमानों को पाकिस्तान चाहिए और वो ले कर ही माने. इसके लिए खून बहा. हालाँकि तब भी कुछ हिन्दू, सिख, पाकिस्तान में ही रह गए लेकिन उनकी हालत कितनी बदतर होती गई ये किसी से छुपा नहीं है. अब अगर पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में सताए गए हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन और पारसियों के लिए भारत में शरण देने और नागरिकता देने की बात हो रही है तो आपत्ति क्यों? क्यों उनके लिए कोई आवाज नहीं उठाता? वो वोटबैंक नहीं है क्या इसलिए?

इस बिल पर सवाल खड़ा करते हुए विपक्ष के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि यह विधेयक संविधान की मूल भावना के विरुद्ध है, क्योंकि यह बिल समानता का उल्लंघन करता है. सरकार अनुच्छेद 14 को नष्ट कर रही है. यह विधेयक मुसलमानों के खिलाफ है और भारतीय संविधान के अनुच्छेद-14 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन करता है. उन्होंने आगे कहा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है. इसलिए यह बिल नहीं लाया जाना चाहिए, क्योंकि इसमें लोगों के साथ धर्म के आधार पर भेदभाव किया जा रहा है? इस बिल का विरोध करने वाली सपा, कांग्रेस, एआईएमआईएम, तृणमूल कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल शामिल हैं.

लेकिन अमित शाह ने सबको जवाब दिया. अमित शाह ने जवाब देते हुए कहा कि यह बिल 0.001 प्रतिशत भी अल्पसंख्यकों के खिलाफ नहीं है. बार बार टोके जाने पर अमित शाह भड़क गये उन्होंने कहा कि ये बिल सिर्फ कांग्रेस की वजह से लाना पड़ रहा है क्योंकि कांग्रेस ने धर्म के आधार पर देश का बंटवारा किया था. शाह ने कहा कि ”कुछ लोग कह रहे हैं कि अल्पसंख्यकों को स्पेशल ट्रीटमेंट मिलनी चाहिए. मैं पूछता हूं कि क्या बांग्लादेश के अल्पसंख्यकों को स्पेशल ट्रीटमेंट नहीं मिलनी चाहिए? पाकिस्तान में रहने वाले अल्पसंख्यकों को स्पेशल ट्रीटमेंट नहीं मिलनी चाहिए?”

उनका कहना गलत भी नहीं था. कुल मिलकर अगर देखे तो समझ आता है कि विपक्ष की एक ही समस्या है कि इस इसमें मुसलमानों को शामिल क्यों नही किया गया. इस पर सरकार की तरफ से कहा गया है कि अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश ये तीनों भारत के पडोसी देश हैं और तीनों ही इस्लामिक देश है. ऐसे में वहां रह रहे गैर मुस्लिमों पर अत्याचार किया जा रहा है. क्योंकि अब वे वहां नही रहना चाहते और भारत में आकर कई सालों से रह रहे हैं या फिर आकर रहना चाहते है तो भारत ऐसा देश है जो उन्हें अपने यहाँ रखना चाहता है तो इसमें दिक्कत क्या है?

सवाल है कि जब मुसलमानों ने लड़ कर अपने लिए पाकिस्तान लिया था. खून बहा कर अपने लिए पाकिस्तान लिया था तो अब वो शरणार्थी बनकर भारत क्यों आना चाहते हैं? उनके लिए तो दुनिया भर के 100 से ऊपर मुल्क है लेकिन जैन, पारसी, सिख और हिन्दुओं के लिए तो एक ही देश है.