United Nations में मसूद को लेकर खुली चर्चा से चीन हो जायेगा बे नकाब

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जैसा कि आप जानते हैं कि चीन ने पिछले दस सालों में चौथी बार आतंकी मसूद अजहर को अंतर्राष्ट्रीय टेररिस्ट घोषित करने में संयुक्त राष्ट्र में अपनी वीटो पॉवर का इस्तेमाल करके बचाया है. चीन को छोड़ कर सभी अन्य संयुक्त राष्ट्र सदस्यों ने इस मामले में भारत का साथ दिया था.

चीन के इस रवैये के बाद अब भारत ने अपने कूटनीतिक प्रयासों को और ज्यादा बड़ा दिया है. भारत इस बार हर हाल में ये सुनिश्चित करना चाहता है कि आतंकी मसूद पर कार्रवाई हो और पाकिस्तान आतंकवादी संगठनों पर एक्शन लेने के लिए मजबूर हो जाये.

इस मामले में भारत संयुक्त राष्ट्र में इन कदमों को उठाने पर विचार कर रहा है.

सबसे पहले इस मामले में नो ऑब्जेक्शन प्रोसीजर जिसके तहत वो देश जो मसूद को आतंकी घोषित करने के लिए ये प्रस्ताव लाये थे वो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सभी पंद्रह सदस्यों को लिखित में पूछेंगे कि आखिर क्या वजह है जो मसूद अजहर को इंटरनेशनल टेररिस्ट घोषित नहीं किया जा रहा है. इसके बाद बॉल चीन के कोर्ट में चली जाएगी और उसे लिखित में अपना रुख साफ़ करना होगा.

अगर इस प्रोसीजर से कुछ बात नहीं बनती तब एक क्लोज डोर मीटिंग की जाएगी सभी पंद्रह सदस्यों के साथ. इधर भी चीनी डिप्लोमेट से पूछा जायेगा कि आपको क्या समस्या है मसूद अजहर को इंटरनेशनल टेररिस्ट घोषित करने में. इसके बाद चीन को लिखित में सभी पंद्रह सदस्यों को देना पड़ेगा कि वो मसूद अजहर को क्यों बचा रहा है

यहाँ भी अगर बात नहीं बनी तो इस मामले को उठाने का तीसरा चरण होगा की भारत इस मामले को सिक्यूरिटी काउंसिल यानी सुरक्षा परिषद् में रेफर करके इसपर ओपन डिस्कशन और वोट करा सकता है. इस डिस्कशन के हर मिनट को पूरी दुनिया देखेगी. इसमें सभी पंद्रह सदस्यों को इस मामले में बताना पड़ेगा कि उनकी क्या राय है आतंकी मसूद के बारे में. जिसके बाद इसपर वोटिंग की जाएगी. अगर यहाँ भी चीन कोई फैसला नहीं लेता है तो ये रेसोलुशन में चीन को छोड़ कर सभी चौदह देश भारत के साथ होंगे. इससे वाकई चीन अलग थलग पड़ जायेगा. इससे ये साबित हो जायेगा पूरी दुनिया के सामने कि सिर्फ चीन एक ऐसा देश है जो बिना किसी रीज़न के मसूद अजहर पर होने वाली कार्रवाई को टाल रहा है. यहाँ एक बात जो सबसे अहम है वो ये है कि इससे पहले चीन सिर्फ एक ईमेल के ज़रिये टेक्निकल होल्ड लगा सकता था लेकिन अब उसे पब्लिक मीटिंग में अपना रुख साफ़ करना होगा. ज़ाहिर है इस पूरी प्रक्रिया में चीन पर ज़बरदस्त दबाव होगा.

आपको बताते चलें कि फ्रांस पहले ही आतंकी मसूद के सारे एसेट्स को फ्रीज़ यानी संपत्ति जब्त कर चूका है.

इसके साथ फ्रांस और जर्मनी, ब्रिटेन के सर्थन से ये पूरी कोशिश कर रहे हैं कि यूरोपियन यूनियन में मसूद को और उसके संगठन जैश ए मोहम्मद हो आतंकवादी संगठन घोषित किया जा सके. यूरोपियन यूनियन यूरोप के 28 देशों का समूह है और एक बहुत बड़ी अर्थव्यवस्था है. ऐसे में यूरोपियन यूनियन जैश के ऊपर आर्थिक कार्रवाई कर सकती है. और फिर भी अगर पाकिस्तान कि ये आतंक की फैक्ट्री बंद नहीं होती है तब यूरोपियन यूनियन पाकिस्तान पर भी आर्थिक प्रतिबंध लगा सकता है. फ्रांस के इस कदम से चीन और पाकिस्तान ज़बरदस्त अंतर्राष्ट्रीय दबाव में है. और इसे हम भारत सरकार कि कूटनीतिक जीत भी मान सकते है.

पाकिस्तान को ये बात नहीं भूलनी चाहिए कि इस समय उसकी अर्थव्यवस्था कुछ ठीक नहीं है और विश्व स्तर पर भी वो अलग थलग पड़ गया है. ज़ाहिर है भारत जिस इच्छा शक्ति से आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा है उससे पाकिस्तान अब  किसी अन्य देश के पीछे नहीं छुप सकता है.