जिनफिंग की अगुवाई में पीपुल्‍स लिबरेशन आर्मी की ज’ड़े हुई और भी कमजोर

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भारत के साथ चल रहे चीन के सीमा वि’वाद के बाद चीन बौखलाया हुआ है. दरअसल गलवान घाटी में चीन के धोखे के बाद से ही चीन के खि’लाफ देशभर में सुर तेज़ हो गए है.  इसके अलावा चीन के धोखे से बार करने की वजह से धो’खा देने में चीन ने अपनी अलग पहचान बना ली है. वही दूसरी तरफ चीन की खुद ही हालत इतनी खस्ता है. जिसे छुपाने क लिए चीन उलटी सीधी हरकते कर रहा है.

दरअसल चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी जब बख्‍’तरबंद गाड़‍ियों के काफिले, मिसाइल यूनिट्स की आवाज और हेलिकॉप्‍टर्स की गड़गड़ाहट के बीच मार्च करती है तो ऐसा लगता है जैसे मानो चीनी सेना से बेहतर कोई नहीं है. लेकिन चीन की PLA खुद अंदर से इतनी खो’खली हो गयी है. जिसके बाद से उसकी स्थिति काफी ख़राब है. वही 35 साल तक लागू रही वन-चाइल्‍ड पॉलिसी और भ्रष्‍’टाचार ने PLA को और कमजोर कर दिया है.

वही 1979 में वियतनाम से PLA को मुंह की खानी पड़ी थी उस दौरान PLA के  62,500 जवान मारे और 550 गाड़‍ियां तबा’ह  हुई थी. इसके बावजूद भी PLA की स्थिति नहीं सुधरी. वही जब शी जिनपिंग स’त्ता संभाली टी तो उस वक्त भी PLA की हालत ख़राब थी. यहाँ तक कि उस समय शी जिंगफिंग को सेंट्रल मिलिट्री कमिशन के दो वाइस चेयरमैन को बाहर करना पड़ा था. इसके अलावा 100 से ज्‍यादा जनरल्‍स को भी बाहर करना पड़ा था.

वही PLA किसी भी मुकाबले को सामने से करने से डरती है. लेकिन पीछ पीठे बार करने में उसे म’हारत हांसिल है. जिसकी वजह से PLA की पाकिस्तान की सेना के साथ भी ब’खूबी जमती है. वही चीन अब इतना समझ ले ली कि ये 1962 का वक्त नहीं है, 2020 है. जहाँ पर ईट का जवाब पत्थर से दिया जायेगा. वही अगर चीन जंग करता है तो PLA के लिए मु’श्किले बढ़ सकती है.