चीन मुद्दे पर अलग थलग पड़ी कांग्रेस, दोस्तों ने भी छोड़ा साथ और मोदी सरकार के साथ दिखाई एकजुटता

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चीन के साथ तनाव के मुद्दे पर कांग्रेस भले ही राहुल गाँधी के नेतृत्व में पीएम मोदी पर ह’मला’वर हो, लेकिन इस पूरे मसले पर कांग्रेस अलग थलग पड़ गई है. विपक्ष में कोई भी ऐसा दल नहीं जो इस वक़्त कांग्रेस के साथ खड़ा हो. यहाँ तक कि कांग्रेस के दोस्त भी उसका साथ छोड़ कर मोदी सरकार के साथ खड़े हैं. शरद पवार, जिनकी पार्टी महाराष्ट्र में कांग्रेस के साथ मिल कर सरकार चला रही है, वो राहुल के हमलों से पीएम मोदी के बचाव में ढाल की तरह खड़े हो गए हैं. यही नहीं, उन्होंने 1962 का जिक्र करते हुए राहुल गाँधी को आइना भी दिखा दिया. शरद पवार ने तो सोनिया गाँधी के सामने ही राहुल गाँधी को लताड़ लगाते हुए संवेदनशील मुद्दों पर संभल कर बोलने की नसीहत दी थी.

मोदी सरकार की धुरविरोधी रही ममता बनर्जी ने भी कांग्रेस का साथ छोड़ दिया और इस पूरे मसले पर मोदी सरकार के साथ मजबूती के साथ खड़े होने का ऐलान कर दिया. सर्वदलीय बैठक में ममता बनर्जी ने कहा था कि टीएमसी संकट की इस घड़ी में देश के साथ खड़ी है. ममता ने कहा था, ‘चीन एक लोकतंत्रिक देश नहीं है. वो एक तानाशाह है. वो जो महसूस करते हैं वह कर सकते हैं. दूसरी ओर, हमें साथ काम करना होगा. भारत जीत जाएगा, चीन हार जाएगा.’ उन्होंने कहा था कि टीएमसी पूरी तरह से केंद्र सरकार के साथ है.

बसपा सुप्रीमों ने भी इस मुद्दे पर केंद्र सरकार के साथ एकजुटता दिखाई. एक तरफ राहुल गाँधी जहाँ बचकानी राजनीति कर रहे हैं वहीँ मायावती ने परिपक्वता का परिचय देते हुए कहा कि राजनीतिक लड़ाई का चीन भी फायदा उठा सकता है और इसका देश की जनता को नुकसान हो रहा है. देशहित के मसले पर बसपा केंद्र के साथ है, चाहे केंद्र में किसी की भी सरकार हो. सर्वदलीय बैठक में मायावती ने कहा था, ‘इस मुद्दे को पूरी तरीके से सरकार पर छोड़ देना चाहिए कि जो देश के लिए बेहतर हो वह फैसला सरकार ले, क्योंकि यह सरकार का दायित्व भी है. इस मामले पर सत्ता पक्ष और विपक्ष को भी अपनी परिपक्वता दिखानी चाहिए.’

समाजवादी पार्टी हो या तेलंगाना रष्ट्र समिति, YSR कांग्रेस हो या बीजू जनता दल, सबने केंद्र सरकार के साथ एकजुटता दिखाई और कहा कि ये वक़्त राजनीति करने का नहीं है. कहाँ तो कांग्रेस ने सोचा था कि इस मुद्दे पर वो मोदी सरकार को घेर कर अपनी ताकत का अहसास कराएगी, लेकिन वो पूरे मुद्दे पर खुद ही अलग थलग पड़ गई.