नेपाल की कई एकड़ जमीन पर चीन ने किया कब्ज़ा, नेपाली लोगों ने जलाए शी जिनपिंग के पुतले

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सोमवार को नेपाल की सड़कें “गो बैक चाइना” के नारों से गूँज उठी. ना सिर्फ नारे लगे बल्कि चीन के राष्ट्रपति सही जिंगपिंग के पुतले भी जलाए गए. चीन के खिलाफ नेपाल के लोगों में गुस्से की बात सुनकर आपको हैरत होगी क्योंकि हाल की खबरों में आपने पढ़ा होगा कि कभी छोटी से छोटी चीजों के लिए भारत पर निर्भर रहने वाला नेपाल धीरे धीरे चीन से अपनी नजदीकियां बढ़ा रहा है. चीन ने नेपाल में निवेश कर रखा है और वहां रेल पटरियां भी बिछा रहा है. तो फिर इस गुस्से की वजह क्या है?

दरअसल नेपाल का आरोप है कि चीन के इसकी जमीनों पर कब्ज़ा कर लिया है. हाल ही में नेपाल के सर्वे डिपार्टमेंट द्वारा जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन ने नेपाल की 36 एकड़ जमीन पर कब्ज़ा कर लिया है. नेपाल -चीन सीमा पर बसे नेपाल के चार जिलों संकुवासाभा, रसुवा, सिन्धुपल चौक और हुमला में कई हेक्टेयर जमीन पर चीन ने अतिक्रमण कर सड़क निर्माण करना शुरू कर दिया है. चीन द्वारा हडपी गई ये जमीने अब तिब्बत के फुरांग इलाके में शामिल हो गई है.

सभी पड़ोसियों के साथ है चीन का सीमा विवाद

चीन की विस्तारवादी नीति नई नहीं है. दुनिया की सबसे ज्यादा आबादी आले देश चीन की सीमा 14 देशों से लगती है. यानी कि दुनिय के 14 देश चीन के पडोसी है और इन सभी देशों के साथ उसका सीमा विवाद चल रहा है. किसी के साथ जमीनी सीमा का विवाद तो किसी के साथ समुद्री सीमा का विवाद. चीन को विस्तारवाद की आदत लग चुकी है और हर देश की कुछ न कुछ जमीने हडपते रहता है.

भारत की हज़ारों हेक्टेयर जमीन पर चीन कब्ज़ा कर के बैठा है और अरुणाचल प्रदेश को अपना हिस्सा बताता है तो तिब्बत पर भी उसने कब्ज़ा कर के खुद में मिलाये हुए है. कभी स्वतंत्र देश रहे ताइवान को चीन ने अपना एक राज्य घोषित कर रखा है जबकि दुसरे स्वतंत्र देश मंगोलिया के बारे में चीन का मानना है कि पूरा मंगोलिया चीन का हिस्सा है.

सोवियत संघ से अलग हुए देश किर्गिस्तान और तजाकिस्तान के कुछ हिस्सों पर भी चीन अपना दावा जताते रहता है. फिलिपिन्स और कम्बोडिया के कुछ हिस्सों को भी चीन अपना मानता है. चीन के युआन राजवंश के समय बर्मा चीन का हिस्सा हुआ करता था लेकिन बाद में अलग हो गया. इतिहास को आधार बना कर चीन म्यांमार के बड़े हिस्से पर अपना दावा करता है. चीन के मुताबिक़ वियतनाम पर भी उसका हक़ है क्योंकि 1368 से 1644 ईस्वी के दौरान मिंग राजवंश के शासन में वियतनाम चीन का हिस्सा था.

समुद्री सीमा विवाद

न सिर्फ जमीनी विवाद बल्कि चीन का कई देशों के साथ समुद्री सीमा का भी विवाद है. साउथ चाइना सी इंडोनेशिया से लेकर ताइवान तक फैला है. लेकिन इसके 80 फीसदी हिस्से पर चीन अपना हक़ जताता है. इसके लिए तर्क ये देता है कि साउथ चाइना सी में चाइना शब्द शामिल है इसलिए ये उसका हिस्सा है. ऐसी बकैती सिर्फ चीन ही कर सकता है क्योंकि भारत ने कभी नहीं कहा कि इन्डियन ओसन यानी हिन्द महासागर उसका हिस्सा है या फिर मैक्सिको ने कभी नहीं कहा की मैक्सिको की खाड़ी उसकी है.

जापान के साथ भी चीन का समुद्री सीमा विवाद है. चीन की हरकतें देखने के बाद आप समझ सकते हैं कि अगर नेपाल कह रहा है कि चीन के उसकी भूमि कब्जाई है तो वो गलत नहीं कह रहा. चीन की आदत है दूसरों की जमीन कर कब्ज़ा करने की. जरूरत है सभी पडोसी मिल कर उसे सबक सिखाएं.