पढ़ाई में आगे होने के बावजूद केरल नहीं लगा पा रहा बाल विवाह पर रोक

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एक चर्चित न्यूज़ पोर्टल पर एक तस्वीर दिखाई देती है जिसमें करीब पांच- सात साल की एक छोटी सी बच्ची अपने नन्हे- नन्हे मेहंदी वाले हाथ दिखा रही है. वो बच्ची दुल्हन वाले जोड़े में सजी हुई है. उसके होठों पर शादी के जोड़े से मिलती हुई लिपस्टिक है. छोटी- छोटी आँखों में गहरा काजल है. कानों में झुमके हैं. माथे पर मांगटीका है और मांग में भरा है सिन्दूर.

एक चर्चित न्यूज़ पोर्टल पर एक तस्वीर दिखाई देती है जिसमें करीब पांच- सात साल की एक छोटी सी बच्ची अपने नन्हे- नन्हे मेहंदी वाले हाथ दिखा रही है. वो बच्ची दुल्हन वाले जोड़े में सजी हुई है. उसके होठों पर शादी के जोड़े से मिलती हुई लिपस्टिक है. छोटी- छोटी आँखों में गहरा काजल है. कानों में झुमके हैं. माथे पर मांगटीका है और मांग में भरा है सिन्दूर.

ये तस्वीर हमें बिलकुल भी सुन्दर नहीं लगी. उल्टा हुआ ये कि इस तस्वीर ने हमें चौंका दिया, और थोड़ा सा डरा भी दिया. क्योंकि उस बच्ची के चेहरे पर जो भाव हैं वो समझ नहीं आते. क्योंकि वो बच्ची शायद खुद नहीं जानती कि उसके साथ क्या हो रहा है. किसी ने उससे कह दिया होगा शायद कि तुम्हें कैमरे के सामने अपने मेहंदी वाले हाथ दिखाने हैं, बस.

ये तस्वीर भारत के एक राज्य का सच बयान करती है. पुराने ज़माने में लोग कम पढ़े- लिखे होते थे. वो जब कम उम्र में बच्चियों की शादी कर देते थे, तो समझ आता था. लेकिन आज के ज़माने में ऐसी तस्वीरें और खबरें आना डरावना लगता है, वो भी केरल जैसे राज्य से, जो हाई लिटरेसी रेट के लिए जाना जाता है.

कुछ रिपोर्ट्स की मानें तो केरल में कम उम्र में बच्चियों की शादी कर दी जाती है. इसी साल एक रिपोर्ट पब्लिश की गई, जिसमे साल 2017 के इकोनोमिक और स्टेटिस्टिक्स डिपार्टमेंट का डाटा दर्ज किया गया है.

ये डाटा हमें बताता है कि साल 2017 में राज्य की जिन महिलाओं ने बच्चों को जन्म दिया, उनमें से 4.48 प्रतिशत महिलाओं की औसत आयु 15 से 19 साल के बीच थी.

सिर्फ एक साल में ही, शहरी छेत्र में बच्चों को जन्म देने वाली, इस उम्र की महिलाओं की कुल संख्या 16,639 है, और ग्रामीण छेत्र में ये संख्या 5,913 है.

साल 2017 के इन आंकड़ों में 137 ऐसी महिलायें भी शामिल हैं जिन्होनें महज़ 19 साल की उम्र में अपने दूसरे बच्चे को जन्म दिया है.

इन आंकड़ों में 48 महिलाएँ ऐसी हैं जिन्होंने महज़ 19 साल की उम्र में अपने तीसरे बच्चे को जन्म दिया. और 37 महिलायें वो भी हैं जिन्होंने अपने चौथे  बच्चे को भी जन्म दिया है.

अगर धर्म के आधार पर इनको बांटा जाए तो इन महिलाओं में 17,082 महिलायें वो हैं जो मुस्लिम धर्म से है, 4,734 महिलायें हिन्दू  और 702 इसाई.

रिपोर्ट यह बताती है कि इसमें से 17,202 औरतें या तो मेट्रिक पास हैं या तो अभी तक graduate भी नहीं हुई. करीब 96 महिलायें ऐसी थीं जिन्होंने सिर्फ शुरुआती पढ़ाई की है.

इन महिलाओं में 86 महिलायें ऐसी भी निकली जो अनपढ़ है और अपना नाम तक लिखना नहीं जानतीं. और करीब 3,420 औरतों औरतें ऐसी भी थीं जिन्होंने अपनी शिक्षा को लेकर कुछ बात ही नहीं की.

ये बात सच में सोचने वाली है कि वो महिलायें, जो महज़ 19 साल की उम्र में अपने तीसरे या चौथे बच्चे को जन्म दे रही हैं, शादी के वक़्त उनकी उम्र क्या रही होगी. आज के वक़्त में भी यह सब देखना अजीब है. एक तरफ जहां हमारे देश की विदेश मंत्री और रक्षा मंत्री दोनों महिलायें हैं, उसी देश में इस तरह की रिपोर्ट्स का सामने आना हमारे लिए दुर्भाग्य की बात है.

लोगों को समझना चाहिए कि महिलायें घर का चूल्हा चौका और बच्चे पैदा करने के लिए ही नहीं बनी हैं बल्कि उनके टैलेंट और उनकी काबिलियत को अगर सराहा जाये तो यकीन मानिए लडकियां फर्श से अर्श तक पहुँच सकती हैं, और पहुंची भी हैं.

देखिये हमारा वीडियो: