आखिर निर्भया की सुनवाई से खुद को अलग क्यों कर लिए सीजेआई? बतायी ये वजह

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निर्भया केस के आरोपियों को फांसी पर लटकाए जाने का इंतजार पूरा देश कर रहा है. इस इंतजार के में अब बड़ी दे हो रही है. पूरा देश पूछ रहा है कि आखिर कब होगी फांसी? मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में एक दोषी की याचिका पर सुनवाई होने वाली थी लेकिन चीज जस्टिस ने खुद सुनवाई करने वाले बेंच से अलग कर लिया है. इसके पीछे का कारण भी खुद चीज जस्टिस ने ही दिया है.

मंगलवार को सीजेआई शरद अरविंद बोबडे की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस आर. भानुमति की पीठ ने निर्भया मामले के आरोपी अक्षय की याचिका की सुनवाई की. अब इस मामले की सुनवाई के लिए बुधवार को नई बेंच गठित होगी. दरअसल सुनवाई के दौरान जस्टिस अशोक भूषण ने पुराने कोर्ट ऑर्डर शीट की ओर ध्यान दिलाया, जिसमें पीड़िता की ओर से बतौर वकील सीजेआई के भतीजे अर्जुन बोबडे अदालत में पेश हुए थे. इसीलिए सीजेआई ने खुद को इस पीठ से अलग कर लिया है.

निर्भया का दोषी अक्षय ने उस फैसले की समीक्षा करने की अपील की है जिसमें उसे फांसी दिए जाने की सजा सुनाई गयी है. इसी के साथ तीन अन्य दोषी 30 वर्षीय मुकेश, 23 वर्षीय पवन गुप्ता और 24 वर्षीय विनय शर्मा की पुनर्विचार याचिकाएं यह कहते हुए खारिज कर दी थीं कि 2017 के फैसले की समीक्षा करने के लिए कोई आधार नहीं दिया गया है.

निर्भया के आरोपियों को सजा दिलाने के लिए पूरा देश एक साथ खड़ा था. आन्दोलन हुए हालाँकि सात साल बीत जाने के बाद भी उन्हें फांसी पर लटकाया नही गया. ऐसा कहा जा रहा है कि जल्दी ही इन्हें फांसी की सजा दी जाएगी, जिसके लिए तिहाड़ प्रशासन तैयारी भी कर रहा है.