पाकिस्तानी मंत्री चौधरी फवाद हुसैन का हुआ दिमाग क्रैश

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चंद्रयान-2 मिशन भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि है. कल पूरा देश देर रात तक विक्रम लैंडर को लैंड होते देख रहा था लेकिन अचानक से संपर्क टूटने के कारण जब थोड़ी देर तक कोई जानकारी नहीं मिल पाई तो पाकिस्तान ने फिर अपनी नीच सोच और गैर जिम्मेदाराना हरकत दिखाई. जहां एक ओर पूरा देश इंतज़ार में था की कुछ संपर्क आये वही पाकिस्तान के विज्ञान और तकनीकी मंत्री चौधरी फवाद हुसैन ट्वीट किया कि,‘जो काम आता नहीं पंगा नहीं लेते ना..डियर “एंडिया”.

उन्होंने मिशन में रुकावट आने के कारण इंडिया को “एंडिया” बोलकर संबोधित किया. यह बयान उनकी तुच्छ सोच को दर्शाता है क्या आपको लगता कि किसी देश के मंत्री का यह बयान शोभा देता है? हलाकि पाकिस्तान जैसे देश से यही उम्मीद की जा सकती है क्योकि जो खुद कुछ नही कर सकते वो दुसरो का मजाक आसानी से बना लेते है. फवाद हुसैन के इन तुच्छ बयानों पर उन्हें भारत क्या उनका देश ही दुत्कार रहा है. और फवाद हुसैन भारत को कुछ बोलने से पहले खुद के मुल्क को देखे क्योकि भारत ने तो चंद्रयान-2 को चाँद पर भेजने की कोशिश की ना कि पाकिस्तानी की तरह आतंकियो को इधर उधर दूसरो देशो में भेजा.

फवाद हुसैन ने यह भी कहा की,” प्रिय एंडिया चन्द्रायण के रूप में पागल मिशनों पर पैसा बर्बाद करने के बजाय या एलओसी के पार चाय के लिए #अभिनन्दन की तरह बेवकूफों को भेजने के बजाय..भारत गरीबी के भीतर केंद्रित है, #Kashmir पर आपका दृष्टिकोण एक और चंद्रयान होगा बस मूल्य टैग बहुत बड़ा होगा” वाह फवाद हुसैन ..भारत को गरीबी का पाठ तो ऐसे सुना रहे है जैसे इनके देश में बहुत पैसा है इनके खुद के प्रधानमंत्री चाय बिस्कुट पर रोक लगाते है. खाने को दाना नही है लेकिन बौखने के लिए जुबां बहुत बड़ी है खुद यह भिखारिओ की तरह दुसरो देशो से भीख मांगते है और दुसरो को उल्टा भी बोलते है कभी अपने गिरेवान मे झाको फवाद साहब इतना मैला है की धोने के लिए साबुन के पैसे भी नही है आपके मुल्क के पास.

फिर फवाद हुसैन ने भारतीयों के कमेंट्स सुनने के बाद कहा कि,”भारतीय ट्रोल्स की प्रतिक्रिया पर आश्चर्यचकित हु , वे मुझे गाली दे रहे हैं जेसे की मैंने उनका चंद्रमा मिशन में विफल कर दिया , भाई हमने कहा 900 करोड़ लगाओ इन नालायको पर?” ट्वीट मे 900करोड़ का जिक्र देखकर मेरे मन में एक सवाल है फवाद जी से आपके हाथ नही काँपे 900 करोड़ का जिक्र करते वक़्त आपकी सात पुशतो ने कभी 900 रूपए भी देखे है ?. एक ओर फवाद हुसैन है इतनी गिरी सोच वाले और एक ओर उन्ही देश के कुछ समझदार नागरिको ने उनके ट्वीट का रिप्लाई कर के कहा,”मुझे नहीं पता कि हम इसका मजाक क्यों बना रहे हैं, कम से कम उन्होंने कोशिश की और वे इसे सफल बनाने के लिए बहुत करीब हैं , यह सिर्फ एक दुर्भाग्य है।
कोशिश करने के लिए पूर्ण अंक।”

हलाकि लोग है और लोगो का काम है कहना. फवाद हुसैन के इन बयानों से उनकी बैल बुद्धि साफ़ दिखाई देती है लेकिन भारत का यह प्रयास काबिले तारीफ़ था और ISRO के वैज्ञानिको पर समस्त भारत को गर्व है