चाँद पर ऐसी जगह पर उतरेगा चंद्रयान -2 जहाँ कोई देश अब तक नहीं पहुँच पाया है

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अब से कुछ ही घंटो बाद भारत का चंद्रयान -2 चाँद के सफ़र पर रवाना होगा . इसरो ने इस ऐतिहासिक पल से रूबरू कराने के लिए लाइव टेलीकास्ट की व्यवस्था की है . पुरे देश के लोग इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बनेंगे . सारी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। काउंटडाउन चल रहा है। ये चंद्रयान मिशन ना सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि पहली बार दुनिया का कोई देश चाँद के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचेगा . चाँद के इस हिस्से के बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं है .

चाँद पर पहुँच चुके रूस, अमेरिका और चीन भी अब तक चाँद के इस हिस्से पर नहीं पहुंचे हैं . जब भारत ने चन्द्रयान -1 को चाँद पर भेजा था तब चाँद के दक्षिणी च्रुव पर बर्फ होने की जानकारी सामने आई थी . उसके बाद दुनिया भर के देश चाँद के इस हिस्से के बारे में जानना चाह रहे थे .

चाँद का साउथ पोल, नार्थ पोल की तुलना में अधिक दिलचस्प और रहस्मयी है . चाँद के साउथ  पोल वाले हिस्से पर छाया रहती है जबकि नार्थ पोल वाला हिस्सा सूरज की रौशनी से जगमग रहता है . उम्मीद जताई जा रही है कि शायद चाँद के इस हिस्से पर पानी हो. क्योंकि अगर बर्फ है तो पानी भी होना चाहिए . चांद के साउथ पोल में ठंडे क्रेटर्स (गड्ढों) में प्रारंभिक सौर प्रणाली के लुप्‍त जीवाश्म रिकॉर्ड मौजूद है।

चंद्रयान -2 के लैंडर और रोवर दो गड्ढों- मंजिनस सी और सिमपेलियस एन के बीच वाले मैदान में लगभग 70° दक्षिणी अक्षांश पर सफलतापूर्वक लैंडिंग का प्रयास करेगा। इसरो ने लैंडर को विक्रम और रोवर को प्रज्ञान नाम दिया है . लैंडर का नाम भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक डॉ विक्रम साराभाई के नाम पर रखा गया है .

चाँद पर हीलियम की अत्यधिक उपलब्धता के कारण रूस, अमेरिका और चीन की दिलचस्पी भी हाल के वर्षों में चाँद के प्रति बढ़ी है . एक अनुमान है कि एक टन हीलियम-3 की कीमत करीब 5 अरब डॉलर हो सकती है . चीन ने इसी की खोज में चांग ई 4 यान भेचाँद पर भेजा था .