आतंक परस्तों के ऊपर केंद्र सरकार की बड़ी कार्रवाई

303

जम्मू कश्मीर में आतंकवाद को फाइनेंस देने वाले 13 लोगों पर केंद्र एजेंसीज ने शिकंजा कस लिया है. इन 13 लोगों में आतंकवादी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन का हेड स्येद सलाहुद्दीन, अल्गाह वादी नेता और कुछ बिजनेसमैन शामिल है. ये लोग आतंकवादी संगठनों और पत्थर बाजों को पाकिस्तान खुफिया एजेंसी ISI कि तरफ से फंडिंग करते थे.

केंद्र सरकार ने इन आतंक को फंडिंग करने वाले लोगों के ऊपर बड़ी कार्रवाई करनी शुरू कर दी है. ऐसे लोगों पर एक्शन नेशनल इन्वेस्टीगेशन एजेंसी यानी NIA द्वारा लिया जा रहा है.

वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, इस जांच में दोषी पाए इन 13 लोगों के खिलाफ जो सबूत मिले हैं उससे ये साफ़ हो गया है कि ये लोग मुख्य आतंकवादी संगठन जैसे लश्कर ए तय्यबा और हिजबुल मुजाहिदीन के साथ-साथ अल्गाह वादी नेता और पत्थर बाजों को पैसे की मदद करते थे.

इस पैसे से ये आतंकवादी संगठन लोकल यूथ को बहकाना, मोटीवेट करना और उन्हें militancy में recruit करने का काम करते थे.

इतना ही नहीं इसी पैसे से आतंकवादियों कि ऑपरेशनल एक्टिविटीज जैसे सुरक्षा बालों पर, उनके कैंप और उनके काफिलों पर हमला करते हैं.

अल्गाह वादी नेताओं कि टॉप लीडरशिप कि फंडिंग और एक बहुत बड़ी प्रोपगंडा मशीन जिसके द्वारा कश्मीर घाटी के स्थानीय लोगों में केंद्र सरकार के खिलाफ असंतोष पैदा करना भी इसी पैसे से किया जाता है.

पाकिस्तान से आ रहे इस पैसे को बहुत ही समझदारी से मैनेज किया जाता है. इस पैसे का इस्तेमाल सोशल मीडिया में और अखबारों में झूठी खबर फैलाने के काम में लाया जाता है. अधिकारियों के मुताबिक इन्हीं सभी स्ट्रेटेजी के तहत एंटी इंडिया एक्टिविटी, हिंसक विरोध प्रदर्शन और आतंकवादियों के एनकाउंटर के समय सुरक्षा बालों पर पथराव को भी इसी पैसे से बढ़ावा दिया जाता है.

लोकल कश्मीरी को बहकाने के लिए मस्जिद, मदरसा के साथ-साथ जमात ऐ इस्लामी संस्था जिसे अभी-अभी केंद्र सरकार ने बैन किया है, ऐसी संगठनों को भी खूब पैसा दिया जाता है. ज़रा सोचिये कश्मीर में अस्थिरता हो इसके लिए पैसे का कैसा इस्तेमाल किया जाता था.

सबसे पहले तो ज़हूर अहमद शाह वाताली जो अभी दिल्ली के तिहाड़ जेल में बंद है उस का एक बहुत आलीशान बंगला केंद्र एजेंसी ने अपने कब्ज़े में ली लिया था. इससे पहले पाकिस्तान से कश्मीर तक पैसों को पहुँचाने में वाताली बहुत अहम भूमिका निभा रहा था.

एम्फोर्समेंट डायरेक्टरेट के मुताबिक हाफिज सईद, सय्यद सलाहुद्दीन, ISI के साथ-साथ दिल्ली में स्थित पाकिस्तान हाई कमीशन भी वाताली को फंडिंग करते थे. एजेंसीज के मुताबिक वाताली को दुबई के हवाला रूट से पैसा मिलता था. हवाला रूट में एक देश से दूसरे देश में पैसे को illegal तरीके से भेजा जाता है.

वाताली के साथ केंद्र एजेंसीज ने 10 और लोगों को चिह्नित किया है. इस हवाला पैसे से जो भी काम को अंजाम दिया जाता था उनका एजेंसीज ने पता लगाना शुरू कर दिया है और जो भी लोग शक के घेरे में आ रहे है उनपर एजेंसीज कार्रवाई कर रही है.

ये 13 लोग कश्मीर के साथ-साथ भारत के अन्य राज्यों में भी अस्थिरता फ़ैलाने का पूरा-पूरा प्रयास कर रहे थे. आतंकवादी सय्यद सलाहुद्दीन पाकिस्तान जाने से पहले कश्मीर का ही निवासी था. यही वजह है कि इस आतंकी की कश्मीर में जड़े बहुत गहरी हैं और जिसकी वजह से पाकिस्तान से आया पैसा आसानी से हर गतिविधियों के लिए उपलब्ध करा दिया जाता है.

वही हाफिज सईद और अल्गाह वादी नेता भी हवाला रूट के साथ-साथ स्थानीय कश्मीरी लोगों से पैसा इकट्ठा करके भारत विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा देते हैं.

दूसरे नेता जिन पर केंद्र एजेंसी ने शिकंजा कसा है वो हैं आफताब अहमद शाह उर्फ़ फंटूश, मोहम्मद नईम खान, बशीर अहमद भट आदि हैं. फंटूश तहरीक-ए-हुर्रियत का फाउंडर मेम्बर और स्येद Geelani का दामाद है.

मोहम्मद नईम खान आतंकवादी गतिविधियों से जुड़ा हुआ है. फारूक अहमद डार जो 1989 में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में ट्रेनिंग लेकर भारत में आतंकवाद को बढ़ावा देने में लग गया था. डार सबसे बड़े अल्गाह वादी नेता Geelani का सबसे करीबी भी है.

वहीं बशीर अहमद भट भी पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में ट्रेनिंग के बाद से भारत में आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा था. भट Geelani के साथ दिल्ली स्थित पाकिस्तान एम्बेसी भी कई बार आ चुका है.

इन सभी लोगों को बहुत पहले ही जेल भेज देना चाहिए था. लेकिन जांच पड़ताल में समय तो लगता ही है. पुलवामा आतंकी हमले के बाद से तमाम एजेंसीज एक्शन में आ गयी है. कभी यासीन मालिक कि गिरफ़्तारी होती है तो कभी किसी जैश आतंकवादी की. इनकी गिरफ्तारी से एक बात तो साफ़ है कि अब कश्मीर में पाकिस्तान द्वारा बिठाये एजेंट्स की भारत सरकार ने कमर तोड़ दी है.