केंद्र को राज्यों की चेतावनी नही मानी ये बात तो लगा देंगे राष्ट्रपति शासन

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केन्द्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने कुछ महीने पहले संसद के दोनो सदनो से बिल पारित किया था और वो बिल राज्य मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम 2019 का था. उसमें मोदी सरकार ने कई बदलाव किये थे और उस बदलाव में हेल्मेट ना लगाना, डीएल बिना गाड़ी चलाना, सीट बेल्ट ना लगाना, और इस दिशा निर्देश को ना मानने वाले लोगों पर कार्यवाई की जायेगी और भारी भरकम जुर्माना वसूला जायेगा. इस वजह से भाजपा शासित कुछ राज्य भी केन्द्र के इस फैसले से खुश नही थे और कुछ ने राज्य में भाजपा सरकार होने के बाद भी लागू नही करने का फैसला लिया था. वहीं कांग्रेस शासित राज्य ने तो इस बिल को सिरे से ही खारिज कर दिया है और कहा कि कांग्रेस इस बिल को नही मानती है.    

इस पर केन्द्र में मोदी सरकार ने एक बड़ा बयान जारी करके कहा है कि जिस राज्य में बीजेपी की सरकार नही है. वहां पर या कांग्रेस शासित राज्यों क जो भी राज्य मोटर वाहन अधिनियम (2019) को लागू नही करेंगे  राज्य पर मोदी सरकार ने राष्ट्रपति शासन लगाने की चेतावनी दी है.       

Delhi Traffic Police challan Higher penalties for traffic violations from today after moter vehicles Amendment bill 2019 passed , Express photo by Prem Nath Pandey 01 sep 19

केंद्र ने अपनी बात में आगे कहा है कि यातायात के संशोधित नियमों को ना मानने वाले राज्य के खिलाफ कार्यवाई की जायेगी और जुर्माना वसूलने का भी प्रावधान बनाया है और किसी भी राज्य को केन्द के इस नियम के खिलाफ जाने वाले राज्यों के पास ऐसा करने का अधिकार नहीं है। अगर कोई राज्य सरकार नियमों के खिलाफ जाकर जुर्माने की राशि को घटाती है तो इसे संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन मानते हुए केंद्र वहां राष्ट्रपति शासन भी लगा सकती है.

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि कोई भी राज्य मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 के वैधानिक प्रावधानों के तहत तय किए गए जुर्माने की राशी उसकी निर्धारित सीमा से कम नहीं कर सकता है. मंत्रालय ने कहा कि कोई भी कानून किसी भी राज्य सरकार द्वारा तब तक लागू नहीं किया जा सकता है जब तक कि उसे भारत के राष्ट्रपति की सहमति प्राप्त न हो। 

केंन्द्रीय सड़क परिवाहन और राजमार्ग मंत्रालय ने राज्यों को भेजे अपने परामर्श में कहा है कि मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम 2019 संसद से पारित कानून है. भारत सरकार ने कहा है कि कोई भी राज्य अपने हिसाब से तय जुर्माने की सीमा को घटाने को लेकर कोई कानून पास नहीं कर सकता है और न ही कार्यकारी आदेश जारी कर सकता है, क्योंकि ये कानून केन्द्र सरकार द्वारा बनाया गया है. उसमें कई राज्यों द्वारा कुछ मामलों में जुर्माने की राशि को कम करने के बाद परिवहन मंत्रालय ने इस मुद्दे पर कानून मंत्रालय से सलाह मांगी थी। क्योंकि सितंबर 2019 से लागू नए मोटर वाहन एक्ट में यातायात नियमों के उल्लंघन पर प्रावधानों को कड़ा किया गया है.