अलग अलग राज्यों में फं’से छात्रों, मजदूरों के लिए राहत की खबर, मोदी सरकार ने किया ये ऐलान

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देश में लॉक डाउन लागू होने के बाद से दिहाड़ी मजदूर, श्रमिक इनको लेकर बवाल मचा हैं विपक्ष सरकार पर आये दिन मजदूरों को लेकर हमलावर रहती हैं. इन सबके बीच गृह मंत्रालय ने आज देश के अंदर अलग अलग फंसे प्रवासी मजदूर, पर्यटकों, विद्यार्थियों आदि की आवाजाही की अनुमति दे दी है.

प्रवासी मजदूरों को लेकर गृह मंत्रालय की ओर से जारी नए आदेश में कहा गया है कि ‘सभी राज्य और केंद्रशासित प्रदेश अपने यहां फंसे लोगों को उनके गृह राज्यों में भेजने और दूसरी जगहों से अपने-अपने नागरिकों को लाने के लिए स्टैंडर्ड प्रॉटोकॉल तैयार करें’ यानी, अब हर प्रदेश दूसरे प्रदेशों में फंसे अपने नागरिकों को वापस ला पाएगा और अपने यहां फंसे दूसरे प्रदेशों के नागरिकों को वहां भेज पाएगा. इसके लिए गृह मंत्रालय ने कुछ गाइडलाइन्स भी बनाये हैं जिनको सभी राज्य सरकार पालन कर्ण आहें जब वो अपने मजदूरों और श्रमिको को दुसरे प्रदेश से वापस अपने प्रदेश में ला रहे हों. गाइडलाइन्स इस प्रकार हैं:

 राज्य और केंद्रशासित प्रदेश इस काम के लिए नोडल अथॉरिटीज नामित करेंगे और फिर ये अथॉरिटीज अपने-अपने यहां फंसे लोगों का रजिस्ट्रेशन करेंगी. जिन राज्यों के बीच लोगों की आवाजाही होनी है, वहां की अथॉरिटीज एक दूसरे से संपर्क कर सड़क के जरिए लोगों की आवाजाही सुनिश्चित करेंगी. जो लोग जाना चाहेंगे, उनकी स्क्रीनिंग की जाएगी. अगर उनमें कोविड-19 के कोई लक्षण नहीं दिखेंगे तो उन्हें जाने की अनुमति होगी. लोगों की आवाजाही के लिए बसों का उपयोग किया जा सकेगा. बसों को सैनिटाइज करने के बाद उसमें सोशल डिस्टैंसिंग के नियम के मुताबिक ही लोगों को बिठाया जाएगा.

कोई भी राज्य इन बसों को अपनी सीमा में प्रवेश करने से नहीं रोकेगा और उन्हें गुजरने की अनुमति देगा. अपने गन्तव पर पहुंचने के बाद लोगों की लोकल हेल्थ अथॉरिटीज की ओर से जांच की जाएगी. बाहर से आए लोगों को घूमने-फिरने की अनुमति नहीं होगी और उन्हें होम क्वॉरेंटाइन में ही रहना होगा. जरूरत पड़ी तो उन्हें अस्पतालों/स्वास्थ्य केंद्रों में भी भर्ती किया जा सकता है. उनकी समय-समय पर जांच होती रहेगी. ऐसे लोगों को आरोग्य सेतु एप का इस्तेमाल करना होगा ताकि उनके स्वास्थ्य पर नजर रखी जा सके. गृह मन्त्रालय ने ये आदेश जारी कर के उन प्रवासी मजदूरों काफी राहत की सांस लेंगे. इन सबका कहना था की दुसरे प्रदेश में खाने को नही देती हैं सरकारे जिसको लेकर काफी मशक्कत के बाद आज उन सभी मजदूरों को अपने गृह जनपद वापस जाने का मौका मिलेगा.