48 हज़ार करोड़ रुपये के रक्षा सौदे को मंजूरी, वायुसेना को मिलेंगे 83 तेजस लड़ाकू विमान

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भारत सरकार ने आज 48 हज़ार करोड़ रुपये के एक बड़े रक्षा सौदे को मंजूरी दी. इस सौदे के अंतर्गत 83 तेजस लड़ाकू विमानों को भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल किया जाएगा. प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) ने इन सौदे पर मुहर लगाई. इस डील पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस डील के बारे में कहा कि वायुसेना की मजबूती के लिए यह फैसला किया गया है. उन्होंने कहा कि भारतीय रक्षा विनिर्माण सेक्टर को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ये डील रक्षा क्षेत्र में गेमचेंजर साबित होगी.

तेजस स्वदेशी तकनीक से बना हल्का लड़ाकू विमान है जो हवा से जमीन और हवा से हवा में मिसाइल दाग सकता है. इसमे एंटीशिप मिसाइल, बम और रॉकेट भी लगाए जा सकते हैं. तेजस को हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड ने तैयार किया है. तेजस 42% कार्बन फाइबर, 43% एल्यूमीनियम एलॉय और टाइटेनियम से बनाया गया है. तेजस स्वदेशी चौथी पीढ़ी का टेललेस कंपाउंड डेल्टा विंग विमान है. ये चौथी पीढ़ी के सुपरसोनिक लड़ाकू विमानों में सबसे छोटा और सबसे हल्का है.

अगस्त 1983 में हल्का युद्धक विमान यानी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट प्रोजेक्ट को मंजूरी दी गई थी. 18 सालों बाद 4 जनवरी, 2001 को तेजस ने पहली उड़ान भरी. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 2003 में इसे ‘तेजस’ का नाम दिया था. ये नाम संस्कृत से लिया गया. संस्कृत में तेजस शब्द का मतलब होता है असीम शक्ति यानी सबसे शक्तिशाली