सीबीआई के पूर्व डायरेक्टर आलोक वर्मा पर हैं ये गंभीर आरोप! पढ़िए से पूरी रिपोर्ट

सीबीआई के पूर्व चीफ आलोक वर्मा पर इतने बड़े आरोप?अपने पद का कितने समय से दुरुपयोग कर रहे थे आलोक वर्मा?
पिछले काफी समय से सीबीआई और सरकार में तकरार देखने को मिल रही हैं. मोदी सरकार ने सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा को उनके पद से हटा दिया. बाद में सुप्रीम कोर्ट ने आलोक वर्मा को फिर से बहाल कर दिया लेकिन पीएम मोदी की अध्यक्षता में हाई पावर कमिटी ने 2:1 से वर्मा को हटाने का फैसला लिया गया. इस कमिटी में कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड्गे , जस्टिस एके सीकरी और पीएम मोदी शामिल में थे. आलोक वर्मा को हटाये जाने के बाद विवाद बढ़ गया है. लेकिन जिस आलोक वर्मा को लेकर देश में बवाल मचा हुआ है उनके कामों के बारे में जानते हैं आप?


आइये हम बताते हैं… आलोक वर्मा पर रिश्वतखोरी से लेकर पशु तस्करों की मदद करने तक के आरोप है. भगोड़े कारोबारियों के जाने से मोदी सरकार की नीतियों पर सवाल खड़ा किया था लेकिन क्या आप जानते हैं कि नीरव मोदी को देश से भगाने में आलोक वर्मा का हाथ था. नीरव मोदी के केस में सीबीआई के कुछ आंतरिक ईमेलों के लीक होने पर भी आरोपी को पकड़ने और खोजने के बजाय मामले को छुपाने और दबाने की कोशिश करने का भी आरोप आलोक वर्मा पर है. साल 2015 में विजय माल्या के खिलाफ जारी लुकआउट सर्कुलर को कमजोर करने का आरोप भी आलोक वर्मा पर ही है. जिसकी वजह से माल्या को देश से भागने में मदद मिली. इन सभी के साथ केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) ने उनके खिलाफ 6 आरोपों को लेकर जांच शुरू कर दी है, जिससे आलोक वर्मा के कारनामों की असलियत सामने आएगी.

CBI Director, Alok Kumar Verma

आलोक वर्मा पर लगे नये आरोपों के संबंध में सीवीसी ने सरकार को अवगत करा दिया है .12 नवंबर, 2017 को सुप्रीम कोर्ट के सामने आलोक वर्मा की जांच रिपोर्ट दाखिल करने के बाद एंटी करप्शन टीम ने शिकायतें दी थीं. आलोक वर्मा पर सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना ने आरोप लगाया था. इन्ही आरोपों के आधार पर रिपोर्ट में कहा गया कि वर्मा पर लगे आरोपों की जांच की जाए. अब आलोक वर्मा की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं.

पिछले काफी दिनों से सीबीआई और सीबीआई, सीबीआई और सरकार के बीच में विवाद चल रहा है. मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुँच गया. सरकार ने सीबीआई के डायरेक्टर को उनके पद से हटा दिया था लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में अलोक वर्मा को फिर से सीबीआई की गद्दी पर बैठा दिया. हालाँकि पीएम मोदी. मल्लिकार्जुन खड्गे और सुप्रीम कोर्ट के जज की कमेटी में अलोक वर्मा को उनकी गद्दी से हटाये जाने का फैसला लिया गया. जिसके बाद देश की राजनीति सीबीआई को लेकर चर्चा जोरों पर है.

सीबीआई पर सरकार के इशारे पर काम करने का आरोप लगता रहता है. पूर्व यूपीए की सरकार पर सीबीआई का इस तरफ उपयोग करने का आरोप लगा था कि लोग सीबीआई को तोता कहने लगे. हालाँकि सीबीआई ने अपने कामों के बल पर इस धब्बे से निकलने की कोशिश की है. अब एक बार फिर सीबीआई पर लगे गंभीर आरोपों से उसकी सत्यता पर लोग सवाल खड़ा कर रहे हैं.

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