शाहीन बाग़ में CAA विरोधियों ने क’श्मी’री पंडितों के साथ की मा’रपी’ट

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शाहीन बाग़ में CAA विरोधी प्रदर्शन चल रहा है. कहा जा रहा है कि महिलाओं को 500 से 1000 रुपये दिए जा रहे हैं प्रोटेस्ट पर बैठने के लिए. इसी बीच 19 जनवरी को कश्मीरी पंडितों को क’श्मी’र से बेदखल किये जाने की 30 वीं बरसी है. आज ही के दिन लाखों कश्मीरी पंडित कश्मी’र घाटी से भगा दिए गए थे. उनके घरों में आ’ग ल’गा दी गई थी और बहन बेटियों की इ’ज्जत लू’टी गई थी.

19 जनवरी को कश्मीरी पंडित शाहीन बाग़ पहुँच गए और अपने लिए न्याय मांगने लगे. लेकिन उनलोगों को ये बर्दास्त नहीं हुआ जिनकी कौम ने 30 साल पहले कश्मीरी पंडितों से उनका सबकुछ छीन लिया था. शाहीन बाग़ में CAA विरोधी प्रदर्शनकारियों ने कश्मीरी पंडितों के साथ हा’थापा’ई की. कश्मीरी पंडित वहां नारे लगा रहे थे ‘कश्मीरी पंडितों को न्याय दो.’

जंतर मंतर पर कश्मीरी पंडित

सोशल मीडिया पर बाकायदा लिबरल और वामपंथी गैं’ग ने कश्मीरी पंडितों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए बाकायदा पोस्टर और बैनर शेयर कर रहे थे. जिस तारीख को कश्मीरी पंडित बेदखल किये गए थे अपनी जड़ों से उसी दिन शाहीन बाग़ में जश्न-ए-शाहीन कार्यक्रम मनाया जा रहा था. अब सवाल ये उठता है कि जब इस दिन को कश्मीरी पंडित काला दिवस के रूप में मना रहे हैं तो कोई इस दिन को जश्न के रूप में कैसे मना सकता है? सोशल मीडिया पर वामपंथी गुटों द्वारा कश्मीरी पंडितों के साथ एकजुटता की बातें महज एक दिखावा और झूठ के सिवा और कुछ नहीं.