CAA हिं’सा में था बड़ा हाथ, मोदी सरकार लगा सकती है इस संगठन पर बैन

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संशोधित नागरिकता कानून और NRC के विरोध में देश भर में हो रहे हिंसक प्र’दर्श’न के बाद अब केंद्र सरकार ने PFI (पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया) की जांच शुरू कर दी है. कई अधिकारियों ने कहा है कि तीन राज्यों ने आरोप लगाये हैं कि देश में CAA और NRC के खिलाफ हिं’सा को इस संगठन ने भड़काया है. जिसमें असम, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश के नाम आये हैं. केंद्र सरकार  ने तीनो राज्यों से रिपोर्ट मांगी है. बता दें कई वर्षो से PFI सरकार के निशाने पर है जिसमें देशभर में गैर का’नूनी गतिविधियों को भड़काने जैसे मुद्दे शामिल हैं. इसके अलावा दूसरी एजेंसी के संगठन में शामिल होने के कारण उनके खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है. नेशनल इन्वेस्टीगेशन एजेंसी ने PFI को बैन करने के लिए अपील की है. NIA ने चार मामले ऐसे पेश किये हैं जिसमें PFI के सदस्यों ने इस्ला’मिक स्टेट की तर्ज पर देश को बनाने की कोशिश की है.

यूपी में हुए हिं’स’क प्रदर्शन के बाद PFI को मिल रही फंडिंग की जांच की जा रही है. जिसके बाद अब PFI की मुश्किलें बढ़ सकती हैं.गृह मंत्रालय  के एक अधिकारी ने बताया कि जांच अभी पूरी नहीं हुई है.जांच के बाद PFI पर बैन लग सकता है. बता दें लखनऊ और मेरठ में CAA के विरोध में हुए प्रदर्शन के बाद जांच में PFI के कुछ सदस्यों के नाम आये हैं. जिसके बाद पुलिस ने उन सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया था और तीनो राज्यों से PFI को बैन करने के लिए रिपोर्ट मांगी है.

इसके अलावा कई एजेंसी भी PFI की जांच कर रही है.और NIA ने भी बैंकों से खातों की जानकारी मांगी है. PFI के खिलाफ इससे पहले भी NIA जांच कर रहा था. बता दें दिसम्बर यूपी पुलिस ने गृह मंत्रालय को ख़त लिख कर आतंकवादी निरोध कानून यूएपीए के तहत PFI को बैन करने कि मांग की थी. एक्ट के विरोध में हुए हिं’स’क प्रदर्शन के बाद यूपी पुलिस ने PFI के सदस्यों के नाम पाए थे जिसके बाद असम में भी पुलिस ने PFI के सदस्यों के शामिल होने की बात कही है.

एक अधिकारी ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बताया कि ‘ ऐसे संगठन जो गैर का’नूनी गतिविधियों को बढ़ावा देते हैं , उन पर हमारी सुरक्षा एजेंसी नज़र रखती है  और देश की कानूनी व्यवस्था को बनाये रखने के लिए ऐसे किसी भी व्यक्ति या संगठन के लोगों के खिलाफ जांच करके मामला दर्ज कर सकती है. 31 दिसम्बर को जारी प्रेस रिलीज में PFI के जनरल सेक्रटरी एम मोहम्मद अली जिन्ना  ने पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस ने खुद को बचाने के लिए बेबुन्यादी इलज़ाम लगाए है. अभी तक 39 संगठनों को बैन किया जा चुका है. जिसमें सि’मी, इंडियन मुजा’हि’द्दीन, लश्कर-ए-तैयबा और ब’ब्बर खा’ल’सा जैसे इंटरनेशनल संगठन शामिल है. दरअसल मोदी सरकार ने पिछले साल अगस्त में यूएपीए एक्ट में संशोधन किया था जिसके बाद जैश-ए-मोहम्मद के मसूद अजहर, जमात उद दावा के चीफ हाफिज सईद और उसके सहयोगी जकीउर्रहमान लखवी और अं’डर’वर्ल्ड डॉ’न दाऊद इब्राहिम को आ’तंक’वा’दी घोषित कर दिया था.