ICAI से क्यों हैं छात्र इतने नाराज़ ?

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सोमवार से सैकड़ों छात्र दिल्ली के आईटीओ में स्थित आईसीएआई के कार्यालय के बाहर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं।

“प्यार किया था तो प्यार का अंजाम कहाँ मालूम था,
वफ़ा के बदले मिलेगी बेवफाई कहाँ मालूम था,
सोचा था तैर के पार कर लेंगे प्यार के दरिया को,
पर बीच दरिया मिल जायेगा भंवर कहाँ मालूम था।”

आप गलत समझ रहे हैं हम किसी हीर- रांझा या रोमियो-जूलियट की बात नहीं कर रहे, ये दुख भरी पंक्तियां एक सिए छात्र की हैं, जिसकी हीर ‘ आईसीएआई‘ यानी इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट ऑफ इंडिया ने बेवफाई इस कदर कर दी कि कल सोमवार से सैकड़ों छात्रों ने दिल्ली के आईटीओ में स्थित आईसीएआई के कार्यालय के बाहर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्रों का क्रोध आसमान छू रहा है। छात्रों का दावा है कि उनके पेपर का मूल्यांकन सही तरीके से नहीं किया गया। उनका आरोप है कि पेपर चेकिंग में सही उत्तर में भी अंक नहीं दिए गए। आईसीएआई की परीक्षा साल में दो बार आयोजित की जाती हैं, मई और नवंबर में। मई में हुई परीक्षा का रिजल्ट अगस्त में आ गया था। जिसमें काफी छात्रों को अपने रिजल्ट पर शक हुआ तो उन्होंने आरटीआई के माध्यम से अपनी उत्तर पुस्तकाएं मंगवा ली, जिन्हें देख छात्र हक्के बक्के रह गए। आप को बता दें कि 2018 तक सीए एक्ट के तहत छात्रों को अपनी उत्तर पुस्तिका देखने की अनुमति नहीं थी। लेकिन 2018 में एक धरने के बाद इसकी अनुमति दी गई।

अपनी उत्तर पुस्तिका को मॉडल अंसर की के साथ तुलना करने पर उन्होंने पाया कि चेकिंग में बहुत सी गलतियां हैं और सरासर लापरवाही बरती गई है। छात्रों का रोष दिल्ली के आईटीओ के साथ साथ ट्विटर पर भी देखने को मिल रहा है। #DearIcaiPleaseChange ट्विटर पर फुल ट्रेंडिंग पर है। नाराज़ छात्रों ने आरटीआई से मंगवाई अपनी अंसर शीट को सोशल मीडिया पर फैला दिया है। छात्रों की मांग है कि उनके पेपर की दोबारा चेकिंग हो और लापरवाही बरतने वालों को सज़ा दी जाए।

छात्रों का नाराज़ होना जायज़ है। आखिर यह उनके भविष्य का सवाल है। अब आप सोचेंगे क्या इन सब के दौरान आईसीएआई जो कि भारत का सबसे पुराना प्रोफेशनल बॉडी है शांत है या कोई प्रतिक्रिया दे रहा है?

आपको बता दें कि आईसीएआई ने 21 सितंबर को ही इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए अपनी वेबसाइट पर लिखित नोटिस में ये लिखा कि हमे पता चला कि सीए परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन की प्रणाली से संबंधित कुछ प्रतिकूल रिपोर्ट सोशल मीडिया पर शेयर हो रही हैं। इस संबंध में सुधार किए जा रहे हैं।
इस सुधार में डिजिटल मूल्यांकन, सेंट्रल मूल्यांकन, मशीन आधारित मूल्यांकन, स्टेवाइज मार्किंग और एग्जामनर की अनिवार्य ऑन-लाइन परीक्षा भी शामिल है। आईसीएआई का कहना है कि छात्र किसी भड़कावे में ना आएं। सुधार के लिए कदम निश्चित रूप से उठाए जाएंगे। आईसीएआई ने एक जवाबदेही संस्थान की तरह पूरे मामले की ज़िम्मेदारी ली है। लेकिन छात्रों का रोष कम नहीं हो रहा। उनका साथ देने के लिए देश भर की सीए की कोचिंग वाले भी मैदान में उतर आए हैं।

छात्रों की नाराज़गी उचित है लेकिन जिस तरह की सकारात्मक प्रतिक्रिया आईसीएआई की तरफ से आयी है उस हिसाब से छात्रों को भी थोड़ा धैर्य रखना चाहिए। एक प्रोफेशनल बॉडी को सुधार कदम उठाने में थोड़ा तो समय लगता ही है। इस तरीके धरना प्रदर्शन अराजकता की स्थिति को बुलावा दे सकती है…