एक फोटो और दो मिनट का वीडियो मचा देगा राजनीतिक पार्टियों में बवाल! पढ़िए ये रिपोर्ट

चुनाव आते ही लगभग सभी राजनीतिक पार्टियाँ चुनाव प्रचार में जुट जाती हैं. इसी बीच इन पार्टियों पर विशेष नजर रखना चुनाव आयोग के लिए बड़ी चुनौती होती हैं. चुनाव के समय राजनीतिक पार्टियाँ वोटरों को लुभाने के लिए तमाम तरह के लुभावने वादे और बयान देकर चुनाव आयोग के नियम का उल्लंघन करते हैं. अब इसी पर लगाम कसने के लिए चुनाव आयोग ने एक बड़ा कदम उठाया है. चुनाव आयोग के इस कदम मात्र एक फोटो और दो मिनट का वीडियो मचा सकता हैं राजनीतिक पार्टियों में खलबली!
वीडियो

दरअसल चुनाव आयोग ने अचार सहिंता के समय प्रचार प्रसार करने वाली पार्टियों पर नजर रखने के लिए एक एप्प को लांच करने जा रहा हैं. इस एप्प को इंस्टाल करके आप किसी पार्टी द्वारा अचार संहिता का उल्लंघन करने पर उनका फोटो और वीडियो आप सीधे चुनाव आयोग तक पहुंचा सकते हैं और चुनाव आयोग उनपर कार्रवाई करेगा.
‘सी-विजिल’ नामक ऐप की जानकारी देते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने इस बात की घोषणा की हैं. और बताया कि यह एप्प चुनावों की घोषणा के साथ ही लांच कर दिया जायेगा और मतदान के एक दिन बाद तक यह एप्प सक्रिय रहेगा. उन्होंने बताया कि कोई भी आम नागरिक इस ऐप पर आचार संहिता के उल्लंघन से जुड़ी फोटो या दो मिनट तक की वीडियो भी शेयर कर सकेगा.


अब चुनाव आयोग के इस कदम से राजनीतिक पार्टियों के लिए मुसीबत आने वाली हैं. चुनाव आयोग द्वारा अचार संहिता लागू किये जाने के बाद भी कई छोटे-बड़े नेता और पार्टियाँ इसका उल्लंघन करती हैं. लेकिन चुनाव आयोग सबपर नजर नही रख पाता था. हालाँकि चुनाव आयोग ने इस समस्या से निजात पाने के लिए अब नया तरीका निकाल लिया है जो चुनाव के समय में पार्टियों के लिए मुसीबत बन सकेगा और चुनाव आयोग उन पार्टियों पर कार्रवाई कर सकेगा जो नियमों का उल्लंघन करते हैं. चुनाव आयोग का ये कदम देश की राजनीतिक पार्टियों के लिए किसी बड़े सरदर्द से कम नही है.
इसी के साथ साथ चुनाव आयोग की नजर प्रत्याशियों द्वारा खर्च किये जा रहे रुपयों पर भी रहेगी.आने वाले लोकसभा चुनाव में भी खर्च की सीमा को 28 लाख रूपये ही हैं. राजनीतिक दलों द्वारा सीमा बढाए जाने की मांग की जा रही है लेकिन चुनाव आयोग ने खर्च सीमा को बढाने से साफ इंकार कर दिया है और चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर किसी ने निश्चित राशि से अधिक खर्च करता हैं तो उसे चुनाव लड़ने से अयोग्य करार भी दिया जा सकता है. अब देखने वाली बात तो यह है कि प्रत्याशी और राजनीतिक पार्टियां किसी हद तक चुनाव आयोग के नियमों का पालन करेंगी.

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