बुंदेलखंड में कुछ ऐसा राजनैतिक माहौल

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अगर आबादी की बात करें तो भारत में सबसे बड़ा राज्य उत्तर प्रदेश  को मना जाता है.. और इसे 4 भागों में बांटा गया है .. पूर्वी उत्तर प्रदेश, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, अवध और बुन्देलखंड.. इन इलाकों में सबसे पिछड़े चेत्र  में बुन्देलखंड का नाम आता है …इसका सबसे बड़ा कारण है सुखाड़… इंडिया के metorological डिपार्टमेंट के अनुशार यहाँ पहले मानसून में 52  दिन बारिश हुआ करती थी जो अब घट कर 24 दिन हो गई है…

आपको बता दें कि जब बुन्देलखंड का बंटवारा हुआ था तो इसमें से कुछ हिस्सा मध्यप्रदेश में चला गया … लेकिन फिर भी उत्तर प्रदेश के दक्षिण में इसका बड़ा हिस्सा देखने को मिलता है…. बुन्देलखंड पर काफी समय तक चंदेल वंश का शासन था…. कहते है उनके 3 पीढ़ियों ने इस पर  शासन किया…

अगर हम बुन्देलखंड के नक़्शे को देखें तो पता लगेगा, यह 2 तरफ से पहाड़ों से घिरा हुआ है और दो तरफ नदी से..

वैसे अगर यहाँ की राजनीति की बात करें तो हमेशा  से यह पानी और सुखाड़ पर केन्द्रित रही है … बुन्देलखंड में कुल 7 लोकसभा सीटें है… आपको बताते है कौन कौन सी  है वो सीटें- ललितपुर,महोबा, झासी, जालौन,चित्रकूट, हमिपुर, बाँदा…

ऐसा कहते हैं की बुन्देलखंड का चुनाव बाहुबलियों की शक्ति को दर्शाता है … यहाँ बन्दूक के नोकं पर चुनाव जीते जाते है…

बुन्देलखंड की राजनीति बहुत अहम् भूमिका निभाती है .. झांसी यहाँ का सेंटर पॉइंट है …

तो चलिए जानते हैं झासी लोकसभा सीट के बारे में…

झांसी लोक सभा सीट उत्तरप्रदेश की चंद हाई प्रफिले सीटों में से एक है…. फिलहाल   केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता उमा भारती झांसी से सांसद हैं…

आपको तो मालूओम ही होगा कि 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में झांसी का अहम रोल रहा, रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों से लड़कर उन्हें लोहे के चने चबवा दिए थे…उनकी वजह से दुनियाभर में झांसी को एक अलग तरीके पहचाना गया. बुंदलेखंड के इस इलाके को वीरता-त्याग और आत्मम्मान के लिए भी जाना जाता है…. राजनीतिक रूप से कांग्रेस का मजबूत इलाका रहा है, लेकिन वक्त के साथ बीजेपी ने इस क्षेत्र में अपनी जगह बनाई है….

झांसी लोकसभा सीट पर आजादी के बाद से अभी तक 16 बार लोकसभा चुनाव हो चुके हैं.. इनमें से 9 बार कांग्रेस को जीत मिली हैं….. जबकि 5 बार बीजेपी, एक बार सपा और एक बार लोकदल को जीत मिली है. आजादी के बाद पहली बार 1952 में लोकसभा चुनाव हुए और कांग्रेस के रघुनाथ विनायक धुलेकर ने जीत हासिल की……. इसके बाद कांग्रेस यहां से लगतार पांच चुनाव जीतने में कामयाब रही……..

आपको बता दें की बीजेपी पहली बार झांसी संसदीय सीट पर 1989 में कमल खिलाने में कामयाब रही थी… इसके बाद 1998 तक बीजेपी लगातार चार बार चुनाव जीतने में कामयाब रही…… लेकिन  1999 में कांग्रेस ने फिर वापसी कर ली , हालांकि  2004 में पहली बार सपा इस सीट को जीतने में कामयाब रही है. हालांकि पांच साल बाद 2009 में प्रदीप जैन आदित्य को उतारकर कांग्रेस फिर से कब्जा जमाने में कामयाब रही थी..

2014 के लोकसभा मोदी लहर पर सवार बीजेपी ने फिर वापसी की और यहां से बीजेपी की नेता उमा भारती जीतने में कामयाब रही थी…..

चलिए अब बात करते है हमीरपुर लोक सभा सीट की…. तो बात कुछ ऐसी है

हमीरपुर लोकसभा सीट जो है  चित्रकूट धाम बांदा मंडल का हिस्सा है…. मौजूदा समय में इस सीट पर बीजेपी का कब्जा है…. हमीरपुर लोकसभा सीट यमुना और बेतवा नदियों के संगम पर बसा है….. सिंहमहेश्वरी (संगमेश्वर) मंदिर, चौरादेवी मंदिर, मेहर बाबा मंदिर, गायत्री तपोभूमि, बांके बिहारी मंदिर, ब्रह्मानंद धाम, कल्पवृक्ष और निरंकारी आश्रम आदि यहां के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से हैं…… राजनीतिक रूप से इस संसदीय सीट पर सपा, बसपा, कांग्रेस और बीजेपी चारों पार्टियां जीत दर्ज कर चुकी हैं…..

अब तक 16 बार लोकसभा चुनाव हो चुके हैं…. इनमें से 7 बार कांग्रेस को जीत मिली जबकि बीजेपी को 4 बार, बसपा को 2 बार के अलावा एक-एक बार सपा, जनता दल और लोकदल को जीत मिल चुकी है.

आपको बता दें कि 2011 के जनगणना के मुताबिक 82.79 फीसदी ग्रामीण और 17.21 फीसदी शहरी आबादी है. 2017 में हुए विधानसभा चुनाव के मुताबिक इस लोकसभा सीट पर पांचों विधानसभा सीटों पर कुल 17,11,132 मतदाता और 1,862 मतदान केंद्र हैं. अनुसूचित जाति की आबादी इस सीट पर 22.63 फीसदी है. इसके अलावा राजपूत, मल्लाह और ब्राह्मण मतदाता काफी निर्णायक भूमिका में हैं. 8.26 फीसदी मुस्लिम मतदाता भी हैं.

अब आपको बताते है बाँदा लोकसभा सीट के बरे में….

बांदा लोकसभा सीट उत्तर प्रदेश की एक  ऐसी सीट है, जहां कांग्रेस से लेकर बसपा, सपा, बीजेपी और वामपंथी दल भी चुनावी परचम लहरा चुके हैं….. मध्यप्रदेश से सटा बांदा जिला चित्रकूट मंडल का हिस्सा है… मौजूदा समय में बीजेपी का इस सीट पर कब्जा है.

2019 के लोकसभा चुनाव में सपा ने श्यामा चरण गुप्ता को मैदान में उतारा है. जबकि कांग्रेस ने ददुआ के भाई बाल कुमार पटेल को अपना प्रत्याशी बनाया है. 

आपको बता दें कि 2004 के लोकसभा चुनाव में सपा ने श्यामाचरण गुप्ता को मैदान में उतारा और चुनाव जीतकर वो संसद तक पहुंचे. इसके बाद 2009 के लोकसभा चुनाव में सपा के आरके पटेल सांसद बने. वहीं 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर पर सवार बीजेपी के टिकट पर भैरो प्रसाद मिश्रा यहां से सांसद चुने गए…

चलें अब जालौन की लोकसभा सीट के बारे में चर्चा कर लें..

उत्तर प्रदेश के जालौन लोकसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है….. कहा जाता है कि ऋषि जलवान के नाम पर इस जिले का नाम जौलान पड़ा था…. 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर पर सवार बीजेपी ने सपा से यह सीट छीन ली थी.. जालौन लोकसभा सीट से 2014 में जीते भानु प्रताप सिंह वर्मा का लोकसभा में बेहतर प्रदर्शन रहा है.

अभी तक कुल 14 बार लोकसभा चुनाव हुए हैं. इनमें से पांच बार कांग्रेस और पांच बार ही बीजेपी ने जीत दर्ज की है. जबकि सपा, बसपा, जनता दल और लोकदल को एक-एक बार जीत मिली है…

बुन्देलखंड की राजनीति हमेशा से लोकसभा चुनाव के लिए अहम् रही है … यहाँ की सबसे बड़ी समस्या  किसानों की हैं… क्योकि बारिश ना होने के कारण सुखा पड़ता है … और किसानो की फसल बर्बाद होती है … मौजूदा केन्द्रीय सरकार ने काफी हद तक किसानों की मदद की है और शायद आगे भी करते रहेंगे…