मायावती के इस ऐलान ने उड़ाये दिल्ली में सभी पार्टियों के होश

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भारत एक ऐसा देश है जहाँ पर हर महीने चुनाव होते रहते हैं अगर चुनाव की बात करें तो अभी हाल ही में महाराष्ट्र के चुनाव सम्पन्न हुए हैं और देश की राजधानी दिल्ली में विधानसभा चुनाव 2020 का ऐलान चुनाव आयोग के द्वारा कभी भी हो सकता है और अमूमन  दिल्ली में राजनीतिक माहौल गर्म ही रहता है. एक बार फिर से दिल्ली में चुनाव को लेकर पारा चढ़ने वाला है. अभी किसी भी तरह से दिल्ली विधानसभा चुनाव  का ऐलान हुआ नही है लेकिन फिर भी सभी राजनीतिक पार्टियों ने अपनी कमर कसना शुरू कर दिया है.

बीते दिन बहुजन समाजवादी पार्टी प्रमुख मायावती ने लखनऊ से अपने कार्यालय से प्रेस कांफ्रेंस कर के दिल्ली विधानसभा चुनाव को  साधने की तैयारी शुरू कर दी है. वहीँ बसपा सुप्रीमो मायावती ने दिल्ली चुनाव को लेकर एक ऐलान कर दिया और दिल्ली चुनाव में पूरी ताकत झोंकने के लिए कमर कस ली है. अपने मुख्यालय में चुनाव की समीक्षा बैठक करते हुए मायावती ने चुनावी रणनीति को अंतिम रूप दिया है. उन्होंने ऐलान किया कि दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020 में हमारी पार्टी (बसपा) सभी 70 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी और उन्होंने पार्टी के भरोसेमंद कार्यकर्ताओं को दिल्ली चुनाव को लेकर ये जिम्मेदारी दी है.अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि सभी पदाधिकारी अपने-अपने क्षेत्र में जाएँ और देखें कि क्या क्या-कमी है और उसके बाद वहां पर उस कमी को दूर करें.

बसपा सुप्रीमो ने खासकर 3 वरिष्ठ सांसदों राजाराम, डॉ अशोक सिद्धार्थ और वीरसिंह एडवोकेट एक-एक लोकसभा सीट की 10-10 विधानसभा सीटों की जिम्मेदारी एक सिलसिलेवार तरीके से सौंपी गई है. दक्षिण दिल्ली की जिम्मेदारी राजाराम, अशोक सिद्धार्थ को पूर्वी दिल्ली व वीरसिंह को चांदनी चौक की कमान सौंपी गई है. सूत्ररों के मुताबिक मायावती ने कुछ सीटों के प्रत्याशी तय कर दिये हैं, लेकिन उन् प्रत्याशियों को अभी प्रभारी ही कहा जायेगा और चुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद उन्हें प्रत्याशी माना जायेगा.

सूत्रों के मुताबिक ये भी खबर आ रही है की कुछ प्रभारी पश्चिमी उत्तर प्रदेश के भी दिल्ली चुनाव की कमान सँभालते हुए दिखेंगे बीते वर्ष दिल्ली के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी की लहर में बसपा शून्य पर सिमट गई थी. यही वजह है की इस बार बसपा दिल्ली के विधानसभा चुनाव में किसी तरह की कोई भी कमी छोड़ना नही चाहती है और वो जातिगत राजनीति कर के वोटरों को लुभाना चाहती है.