पश्चिम बंगाल में एक और भाजपा कार्यकर्ता की हत्या

चुनाव के दौरान शुरू हुई भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमले और हत्याओं का सिलसिला अब भी जारी है. बीते तीन दिनों के अन्दर दुसरे भाजपा कार्यकर्ता की हत्या हो गई. ताजा घटना राज्य के 24 परगना जिले की है. रविवार की रात 25 वर्षीय चन्दन शॉ की अज्ञात लोगों ने गोली मार कर हत्या कर दी. भाजपा ने इसका आरोप तृणमूल कांग्रेस पर लगाया है. तीन तीनों के भीतर दूसरी हत्या से इलाके में तनाव पैदा हो गया है. स्थिति बिगड़ने की आशंका को देखते हुए क्षेत्र में सुरक्षा बालों की तैनाती कर दी गई है. पुलिस का कहना है कि शुरूआती जांच में किसी तरह की राजनीतिक संलिप्तता नज़र नहीं आ रही. विस्तृत तहकीकात जारी है.

भाजपा कार्यकर्ताओं ने 24 परगना में प्रदर्शन किया और हत्यारों की तुरंत गिरफ्तारी की मांग की. इससे पहले 24 मई को नादिया जिले के चकदहाँ में शांतू घोष की हत्या कर दी गई थी. शांतू घोष टीएमसी छोड़ कर भाजपा में शामिल हुए थे, इस सम्बन्ध में पुलिस ने एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया था. प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने राज्य में जारी भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या के लिए टीएमसी पर आरोप लगाया है .

पिछले कई सालों से बंगाल में भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या का सिलसिला जारी है. जब से भाजपा ने राज्य में अपना जनाधार बढाया है और मुख्य विपक्षी दल के तौर पर अपनी स्वीकार्यता बढाई है, उसके बाद से भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमले और तेज हुए हैं. लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं पर काफी हमले हुए थे . कार्यकर्ताओं के अलावा भाजपा के उम्मीदवारों और आसनसोल से सांसद बाबुल सुप्रियो को भी टीएमसी कार्यकर्ताओं के हमले का सामना करना पड़ा था .चुनाव के आखिरी चरण में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के कोलकाता में हुए रोड शो के दौरान हालात काफी बिगड़ गए थे और चुनाव आयोग को एहतियातन तय समय सीमा से एक दिन पहले बंगाल में चुनाव प्रचार रोकना पड़ा था .

इस बार लोकसभा चुनाव में भाजपा के तृणमूल कांग्रेस के वर्चस्व को चुनौती देते हुए राज्य की 42 लोकसभा सीटों में से 18 सीटों पर कब्ज़ा किया है जबकि राज्य में सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस को काफी नुक्सान उठाना पड़ा और मात्र 22 सीटों हासिल हुई . राज्य की 294 विधानसभा सीटों में से भाजपा ने 128 विधानसभा सीटों पर अपनी बढ़त बनाई जबकि 158 विधानसभा में तृणमूल आगे रही. 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा ने जिस तेजी से बंगाल में पैर पसारे उससे ममता बनर्जी की नींद उडी हुई है.

बंगाल में राजनीतिक हत्याओं का ये सिलसिला नया नहीं है, इसका इतिहास बहुत पुराना है. जब भी पहले से स्थापित पार्टी को लगता है कि कोई नयी पार्टी उसके वर्चस्व को चुनौती दे रही है. उस नयी पार्टी के खिलाफ हिंसा बढ़ जाती है. तृणमूल के उभार के दिनों में इसी तरह के संघर्ष लेफ्ट और तृणमूल के खिलाफ देखने को मिलता था, तब बंगाल पर लेफ्ट का राज था. धीरे धीरे राज्य में लेफ्ट और कांग्रेस का आधार ख़त्म होता गया और भाजपा तेजी से उभरकर तृणमूल को चुनौती देने लगी तो भाजपा के खिलाफ इस तरह की हिंसा शुरू हो गई.

राज्य में 2021 में विधानसभा चुनाव होने हैं और ममता बनर्जी को करीब से जानने वालों का मानना है कि वो इतनी आसानी से अपनी किले पर भगवा झंडा लहराने नहीं देंगी और अपना किला बचाने के लिए हर कोशिश करेंगी … ऐसे में आने वाले दिनों में भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमले और बढ़ेंगे. देखना ये है कि क्या अपने विरोधियों को हिंसा के जरिये कुचल कर टीएमसी अपनी सत्ता बचा पाती है या नहीं ?

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