महाराष्ट्र में होने वाले MLC चुनावों को लेकर भाजपा ने चल दी ऐसी चाल कि बढ़ गयी CM उद्धव ठाकरे की परेशानी

एक तरफ महाराष्ट्र में कोरोना के लगातार बढ़ रहे मरीजों ने सीएम उद्धव ठाकरे की मुश्किलें बढ़ा दी हैं तो वहीँ दूसरी ओर राज्य में होने वाले MLC चुनाव के चलते उनकी टेंशन बढ़ती जा रही है. बीजेपी ने महाराष्ट्र में होने वाले एमएलसी चुनावों के चलते एक बार फिर सभी को चौंकाने वाला कदम उठाया है. जी हाँ भाजपा ने एक बार फिर राज्य में दिग्गज नेताओं को दरकिनार करते हुए नए चेहरे को तरजीह दी है.

जानकारी के लिए बता दें भाजपा ने राज्य विधान परिषद् के लिए घोषित 4 उम्मीदवारों के दावेदारों में बड़े नामों की जगह नए चेहरे चुनाव मैदान में उतारने का फैसला लिया है. भाजपा के इस फैसले के बाद सीएम उद्धव ठाकरे की बेचैनी बढ़ गयी है. बीजेपी हाईकमान के इस कदम के बाद उद्धव ठाकरे के सामने एक नई परेशानी खड़ी कर दी है क्योंकि उन्हें अब अपनी सहयोगी पार्टियों के साथ तालमेल बनाना पड़ेगा.

दरअसल अब उद्धव ठाकरे को निर्विरोध जीत के लिए उद्धव ठाकरे को एनसीपी और कांग्रेस के बीच तालमेल बिठाना पड़ेगा. वहीँ बीच में महाराष्ट्र से तीनों दलों में कुछ मुद्दों को लेकर आंतरिक कलह की खबरें भी आई थी अब ऐसे में उद्धव के सामने इन दोनों दलों के बीच तालमेल बिठाना बड़ा ही मुश्किल हो सकता है. अब अगर सत्तारूढ़ गठबंधन 6 सीटों पर लड़ता है तो उद्धव ठाकरे का निर्विरोध निर्वाचन संपन्न नहीं हो सकेगा.

गौरतलब है कि 21 मई को 9 सीटों पर चुनाव होने हैं. जिसके चलते भाजपा ने अपने पत्ते खोल दिए हैं. भाजपा ने इन चुनावों के लिए डॉ. अजित गोपछडे, प्रवीण डटके, गोपीचंद पडलकर और रणजीत सिंह मोहित पाटिल को मैदान में उतारा है. गोपीचंद पडलकर वंचित बहुजन आगाड़ी को छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए हैं,, वहीँ मोहित पाटिल और रणजीत सिंह एनसीपी से भाजपा में आये हैं. विधान परिषद् की एक सीट के लिए करीब 32 वोटों की जरुरत पड़ती है. इस हिसाब में महाराष्ट्र में इस समय 288 विधानसभा सदस्य हैं. जिसमें से सत्ताधारी महा विकास आघाड़ी को 170 विधायकों का समर्थन हासिल है. जिसमें से एनसीपी के 54, शिवसेना के 56 और कांग्रेस के 44 विधायकों के साथ 16 अन्य विधायक उनके साथ हैं वहीँ विपक्ष का नेतृत्व करने वाले भाजपा के पास 115 विधायक हैं और 2 एआईएमआईएम और एक मनसे के विधायक हैं. ऐसे में अगर सत्तापक्ष 6 और विपक्ष 4 उम्मीदवार उतारता है तो मतदान कराना होगा और महाराष्ट्र के गठबंधन में सीटों को लेकर खींचतान मची हुई है जिससे उद्धव ठाकरे की मुश्किलें बढ़ गयी हैं.