भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) आज कल चुनाव जीतने से ज्यादा चुनाव हार रही है. बीजेपी की बात करें तो साल 2019 उसके लिए चुनाव के मद्देनज़र उतार चढ़ाव भरा रहा. साल 2019 की बात करें तो बीजेपी अकेले दम पर  लोकसभा में 303 सीटों के साथ नरेन्द्र मोदी दुसरी बार देश के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली. लेकिन, साल जाते-जाते बीजेपी को कई राज्यों के विधानसभा चुनाव में हार झेलनी पड़ी थी, और कई राज्य में उसने किसी तरह गठबंधन की सरकार बनाई है. आपको बता दें 2014 में जब बीजेपी ने पहली बार सत्ता हासिल की थी.

उस वक्त बीजेपी ने लगातार कई राज्य जीत के देश के नक्शे पर हर जगह भगवा छाता हुआ नज़र आ रहा था. लेकिन 2019 में स्थिति बदलती हुई नज़र आ रही है. लेकिन बीजेपी हार मानने वाली पार्टीयों में से नही है. हर पार्टी में उतार चढ़ाव आते रहते हैं. हाल में बात करें तो बीजेपी ने कई राज्य गवांये है, और कुछ राज्य में गठबंधन कर के सत्ता में बरकरार रखा है.

बात करें महाराष्ट्र की तो बीजेपी ने अपने साथी शिवसेना के साथ मिल के विधानसभा चुनाव लड़ा था.चुनाव जीतने के बाद शिवसेना ने प्रमुख उध्दव ठाकरे ने अपने पुत्र जो पहली बार विधायक बने थे. उनको मुख्यामंत्री बनाने की मांग कर रहे थे. बीजेपी ने चुनाव से पहले ही कह दिये था कि मुख्यामंत्री बीजेपी से ही होगा लेकिन ऐसा नही हो सका. शिवसेना पुत्र मोह के चलते बीजेपी से अपने रास्ते अलग कर लिए. उसके बाद शिवसेना ने एनसीपी और कांग्रेस के साथ मिलकर महाराष्ट्र में सरकार बना ली और शिवसेना प्रमुख उध्दव ठाकरे मुख्यामंत्री चुने गए.

नई सरकार बनने के कुछ दिन बाद महाराष्ट्र में हुए जिला परिषद चुनाव में बीजेपी के दिग्गज नेता और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का गढ़ माने जाने वाला नागपुर में पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा है. नागपुर के धापेवाड़ा में हुए जिला परिषद के चुनाव में बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा है. यहां से कांग्रेस के उम्मीदवार को जीत मिली है.31 सीट जीतकर कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनी है.

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का गांव धपेवाड़ा नागपुर में ही पड़ता है. माना जाता है कि इस इलाके में नितिन गडकरी अच्छी खासी साक है की वजह से बीजेपी की मजबूत पकड़ है. लेकिन जिला परिषद चुनाव में बीजेपी को हार का सामना करना पडा था. अबकी बार वहां से कांग्रेस उम्मीदवार महेंद्र डोंगरे को जीत मिली है. धापेवाड़ा सीट से महेंद्र डोंगरे अच्छे मतों के साथ चुनाव जीतने में सफल रहे हैं. एक तरफ जहां महेंद्र डोंगरे को 9,444 वोट मिले, वहीं बीजेपी प्रत्याशी मोमकुवर को महज 5,501 वोट ही हासिल हुए. जिला परिषद की धापेवाड़ा सीट तीन बार से बीजेपी के ही कब्जे में थी. लेकिन इस बार उन्हें  कांग्रेस ने बड़ी मात दी है.