दिल्ली चुनाव के परिणाम लगभग साफ होते दिख रहे है. वही अरविंद केजरीवाल ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और कांग्रेस पर झाड़ू लगा दिया है. कुल पड़े मतों का 50 परसेंट से ज्यादा हिस्सा हासिल कर केजरीवाल तीसरी बार दिल्ली का ताज पहनेंगे. ताजा रुझानों के मुताबिक आम आदमी पार्टी (आप) 45 से 55 सीटें जीतने की ओर तेजी से बढ़ रही है. दिल्ली के दंगल ने कई राजनैतिक संदेश दिए हैं. राजस्थान, मध्य प्रदेश , पंजाब के बाद दिल्ली ने साबित किया है कि विधानसभा चुनाव में जनता स्थानीय मुद्दों को तरजीह देती है. शाहीन बाग का मुद्दा भले ही गले नहीं उतरा हो लेकिन बीजेपी ने अपनी स्थिति मजबूत ज़रूर की है.

बीजेपी दिल्ली के दंगल में लेट से कूदी जिसका खामियाजा भुगतना पड़ा है. शाहीनबाग से माहौल बदलने की कोशिश हुई थी. शुरुआत में केजरीवाल की हवा तेज थी लेकिन अमित शाह के आक्रामक प्रचार ने हालात बदल दिए लेकिन तब तक देर हो चुकी थी. केजरीवाल ने बेहद चालाकी से दिल्ली के मुद्दों पर फोकस करना जारी रखा। ये आप के पक्ष में गया। दूसरी ओर कांग्रेस ने मानो शुरू से ही हार मान ली थी. ये तो उनके उम्मीदवार मुकेश कुमार के ट्वीट से ही पता चलता है. उन्होंने काउंटिग शुरू होने से पहले ही हार मान ली थी.

चुनाव की घोषणा के समय तो ये लड़ाई भी एकतरफा मानी जा रही थी। बाद में बीजेपी ने वापसी की। इस वापसी का इंजन बना राष्ट्रीय मुद्दे, पीएम नरेंद्र मोदी का चेहरा और शाहीनबाग। दूसरी ओर अऱविंद केजरीवाल बिजली – पानी जैसे बुनियादी मुद्दों को उठाते रहे है.


दिल्ली की पब्लिक ने स्थानीय मुद्दों पर वोट दिया, ऐसा लगता है. ताजा रुझानों के मुताबिक स्लम, अनियमित कालोनियों और ग्रामीण इलाकों में केजरीवाल की पार्टी जबर्दस्त प्रदर्शन कर रही है. विकास के मामले में ये पीछे है. यहां बिहार – उत्तर प्रदेश के लोगों की तादाद काफी है. उसके बाद भी बीजेपी के हांथ से जीत बहुत दूर रही.