हैदराबाद : भाजपा बनी बाजीगर क्योंकि हार कर भी वो जीत गई

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ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम चुनाव के जरिये भाजपा ने जो सपना देखा था वो भले ही अधूरा रह गया हो लेकिन इस अधूरे सपने में भी भविष्य के हकीकत की बुनियाद छुपी है. 2016 के नगर निगम चुनाव में महज 4 सीटें जीतने वाली भाजपा के पास खोने को तो कुछ नहीं था लेकिन पाने को पूरा हैदराबाद था. 150 सीटों वाले नगर निगम में भाजपा ने 47 सीटें जीतते हुए दूसरा स्थान हासिल किया. जबकि पिछली बार 99 सीटें जीत कर सत्ता पर काबिज हुई TRS इस बार महज 58 सीटों पर सिमट गई. जबकि ओवैसी की AIMIM ने 43 सीटें जीत कर तीसरा स्थान हासिल किया. कांग्रेस का हाल जानने की न तो किसी को दिलचस्पी है और न खुद कांग्रेस को अपना हाल सुधारने में कोई दिलचस्पी है. इस चुनाव के साथ ही भाजपा ने 2023 के विधानसभा चुनाव की पटकथा भी लिख दी.

दक्षिण का दुर्ग भाजपा के लिए हमेशा से दुर्गम रहा है. दक्षिण के 5 राज्यों तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में से भाजपा का जनाधार सिर्फ कर्नाटक में ही है जबकि शेष राज्यों में पाँव ज़माना उसके लिए सपना था. अपने इस सपने का एक हिस्से को पूरा होते हुए भाजपा ने हैदराबाद में देख लिया. हैदराबाद में लोकसभा की 5 सीटें और विधानसभा की 24 सीटें आती है. भाजपा ने अब मुख्य विपक्षी दल के तौर पर कांग्रेस को हटा कर अपना स्थान बना लिया है. हैदराबाद नगर निगम में भाजपा की सीटों में जो भी बढ़ोतरी हुई वो सत्ताधारी TRS की सीटें है. इस चुनाव के नतीजों ने ये भी साफ़ कर दिया कि 2023 में मुकाबला भाजपा बनाम TRS होने जा रहा है.

इस चुनाव के नतीजों ने ये भी साफ़ कर दिया कि भाजपा की तैयारियां क्या है? मुख्य विपक्षी दल के तौर के कांग्रेस अब राज्यों में ख़त्म हो चुकी है. हैदराबाद के बाद अब भाजपा के सामने बंगाल का रण है. हैदराबाद में भाजपा के मुद्दों ने ये भी साफ़ कर दिया कि बंगाल की सियासी पिच पर भाजपा कौन से शॉट ताबड़तोड़ लगाने जा रही है. भाजपा ने हैदराबाद चुनाव से एक नया ट्रेंड बना दिया है और वो ट्रेंड है लोकल चुनाव से होते हुए राज्य की सत्ता तक पहुंचना. भाजपा ने इस चुनाव को वैसे ही लड़ा जैसे कोई विधानसभा चुनाव लड़ती है और उसे सफलता भी मिली.