अगर बंगाल में बीजेपी जीत जाती, तो क्या बदल सकता था

आज पश्चिम बंगाल काफी अधिक चर्चा में है और इसके पीछे का कारण है यहाँ पर जो भी चुनावी प्रदर्शन देखने में आये है. कही न कही ममता बनर्जी की जो जीत हुई है वो अपने आप में चौंकाने वाली है लेकिन अब जो ममता करेगी वो तो करेगी ही, लेकिन मान लेते है कि अगर बीजेपी जीत जाती तो फिर क्या कुछ हो सकता था? सवाल तो जाहिर तौर पर वाजिब है. आखिर बंगाल के लोगो ने क्या ठुकराया है? चलिये इस बारे में जान लेते है और ये हम बीजेपी शासित राज्य जो वर्तमान में है या फिर रहे है उनसे तुलनात्मक आधार पर बतायेंगे.

मिलता बंगाल को एक अनुभवी प्रशासन
अभी फ़िलहाल बंगाल योजनाओं को लागू करने के मामले में राजनीतिक लोगो के जीवन को बचाने के मामले में प्रशासनिक रूप से काफी अधिक अक्षम देखा जाता है. लेकिन अगर केंद्र और राज्य दोनों जगह पर एक ही पार्टी पॉवर में होती तो कही न कही एडमिनिस्ट्रेशन बेहतर हो जाता.केंद्र के अनुभवी लोगो के अनुभव से सरकार चलती जबकि टीएमसी के पास में एक छोटे से एरिया का ही अनुभव है.

बंगाल को मिल सकती थी भरपूर एफडीआई, केपिटलिज्म फलने की संभावना
बंगाल में गरीबी का इतिहास बहुत ही बुरा रहा है. यहाँ के स्टॉक एक्सचेंज को धराशायी कर दिया गया, सिंगुर जैसे प्लांट को बंद करा दिया गया, लोगो के जीवन स्तर को सुधरने नही दिया गया. जहां यूपी और गुजरात जैसे राज्यों में आज फोरेन इन्वेस्टमेंट की लाइन लग रही है, वैसे ही बंगाल में भी लाइन लगती और आज वहां पर चीजे और अधिक बेहतर हो सकती थी. इसके लिए एक केपिटलिस्ट सरकार की जरूरत होती है.

केंद्र की योजनाओं का मिल पाता सीधे लाभ
अभी फ़िलहाल ममता सरकार कुछ न कुछ बहाने देकर के केंद्र की कई योजनाओं को ब्लाक करके रख देती है जिससे गरीब लाभान्वित नही हो पाते है, अगर बंगाल में इस वजह से कई गरीबो तक केंद्र की योजनाओं के लाभ पहुँच नही पाते है. ऐसे में अगर केंद्र और राज्य में एक ही पार्टी रहती है तो फिर ये योजनाएं काफी त्वरित रूप से पहुँच पाती है.

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