कोटा के बाद अब राजस्थान का यह शहर बन रहा है मासूमों की कब्रगाह

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राजस्थान में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहाल पड़े देखकर राजस्थान के डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने अपनी ही सरकार को कटघरे में लाकर खड़ा कर दिया है. जिसके बाद अशोक गहलोत भी सवालों के घेरे में आ गए हैं.दरअसल कोटा के जेके लोन अस्पताल में दिसम्बर से लेकर अबी तक 110 बच्चों की मौत हो गयी हैं. जिसके बाद से ही राजस्थान सरकार सवालों के घेरे में आ गयी है.इसी के साथ राजस्थान के बीकानेर में भी 162 बच्चों की मौत का मामला सामने आया है. जिसको लेकर अभी अस्पताल प्रसाशन ने पल्ला झाड़ते हुए कहा कि बच्चों कि मौत लापरवाही की वजह से नहीं हुयी हैं. इससे पहले दिसम्बर में भी बूंदी के अस्पताल में 10 बच्चों की मौत का मामला सामने आया था.

बीकानेर के पीबीएम अस्पताल के सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल ने बच्चों की मौत को माना है.लेकिन उन्होंने कहा कि अस्पताल की तरफ से कोई भी लापरवाही नहीं हुई है. इसके साथ ही प्रिंसिपल एचएस कुमार ने कहा कि दिसम्बर महीने में 162 बच्चों की मौत हुई है लेकिन अस्पताल प्रसाशन की तरफ से कोई भी चूक नहीं हुई है. हमारी तरफ से बच्चों को बचाने के लिए पूरी कोशिश की जा रही है.

जेके लोन अस्पताल में दिसम्बर में 110 बच्चों की मौत हुई थी. जिस पर बच्चों के माता-पिता ने भी बताया  कि अस्पताल में डॉक्टरों और नर्स  के पास उपचार के पर्याप्त उपकरणों की व्यवस्था नहीं थी. बता दें 2018 में हुई एक सोशल ऑडिट में खुलासा किया गया था कि अस्पताल के 28 में से 22 नेबुलाइजर्स काम ही नहीं कर रहे हैं. इनफ्यूजन पंप, जिनका इस्तेमाल नवजात बच्चों को दवा देने में किया जाता है, उनमें 111 में से 81 काम ही नहीं कर रहे थे और लाइफ सपॉर्ट मशीनों में 20 में से सिर्फ 6 ही इस्तेमाल लायक बची थीं.

राजस्थान के डिप्टी सीएम सचिन पायलेट ने कोटा के अस्पताल का दौरा करने के बाद मीडिया से करते हुए कहा कि ‘इतने बच्चों की मौत को स्वीकार नहीं किया जायेगा. जिस माँ ने 9 महीने तक अपनी कोख में बच्चे को पला उसके बाद उसके बच्चे की मौत होने के बाद उसकी कोख उजड़ गयी. इसका दर्द सिर्फ वो माँ ही जान सकती है.हम बच्चों को बचाने के लिए प्रयास करेंगे. इतने बच्चों की मौत होने के पीछे जरुर कोई कमी रही होगी.

राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत ने कहा कि इस साल पिछले 6 सालों के मुकाबले कम मौतें हुई है. यह कोई नई बात नहीं है.इससे पहले भी 1400 -1500 तक बच्चों की मौत हुई हैं.इस साल 900 के करीब ही मौतें हुयी हैं. आंकड़ों की बात की जाए तो वर्ष 2019 में अस्पताल में 16,915 नवजात भर्ती हुए, जिसमें से 963 की मौत हुई थी. वहीं  2018 में 16,436 बच्चों में से  1005 नवजात की मौत हो गयी थी. 2014 से यह संख्या लगभग 1,100 प्रति वर्ष रही. जोधपुर के उम्मेद अस्पताल और एमडीएम हॉस्पिटल की हालत बहुत ज्यादा बेहतर नहीं है. दिसंबर महीने में एनआईसीयू और पीआईसीयू में बच्चों की कुल मौतों की संख्या 146 है. एसएन मेडिकल कॉलेज से मिले आंकड़ों के मुताबिक, दोनों ही अस्पतालों में दिसंबर महीने में 4,689 बच्चों को भर्ती कराया गया था. जिसमें से 3,002 नवजात  बच्चे थे  इलाज के दौरान कुल 146 बच्चों में से 102 नवजात बच्चों की मौत हो गई.