स’त्ता की बात हो और बिहार का जि’क्र न हो तो भारत की राजनीति अधूरी है. सियासत का न’शा एक बार अगर किसी पर चढ़ जाता है तो उससे दूर होना इतना आसान नहीं होता. कुछ ऐसा ही हाल है बिहार का. बिहार में एक बार फिर से सियासी हलचल चालू हो गयी है. जिसके बाद अब तेजस्वी यादव ने पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के ऊपर नि’शाना सा’धा है.

दरअसल हुआ यह है कि पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बीच मुलाकात हुई और इस मुलाकात के बाद लोगो को दि’क्कतें होने लगी जिसके बाद उन्होंने मांझी के ऊपर निशा’ना सा’धा. वही तेजस्वी यादव ने दोनों की मुलाकात पर निशा’ना सा’धते हुए कहा कि अगर महागठबंधन में अगर कोआर्डि’नेशन कमेटी नहीं होती तो उनके बेटे संतोष मांझी विधान परिषद के सदस्य कैसे बनते?

जिससे यह तो स्पष्ट हो गया है कि कोऑर्डिनेशन कमिटी पहले से थी और काम कर रही थी. और तेजस्वी यादव कोई भी फै’सला लेने के लिए स्वतंत्र है. जिसके बाद मांझी ने तेजस्वी के बया’न का जवाब देते हुए कहा कि महागठबंधन में बने रहने के लिए उनके पास कई बार फोन आते रहे है और उनके बेटे को खुद के फायदे के लिए विधान परिषद् में भेजा गया था. जिस पर मांझी की तरफ से कोई पहल नहीं की गयी थी.

गौरतलब मांझी का नीतीश से मुलाकात करना करने के पीछे क्या का’रण थे इसका मांझी ने खुला’सा नहीं किया है. लेकिन एक बात तो साफ़ है कि कही इस मुलाकात से कोई नयी पहल तो नहीं की जा रही है. जिसके बारे में न ही नीतीश कुमार ने कुछ कहा है और न ही मांझी ने. लेकिन इस मुलाकात का असर कई ऐसे लोगो पर पड़ा है. जिनको अब इस मुलाकात से दि’क्कत हो रही है. वहीं इससे बीजेपी को फा’यदा हो सकता है.