बिहार विधानसभा चुनाव में अभी कुछ महीनों की देर है लेकिन बिसातें बिछने लगी है और समीकरण बनने-बिगड़ने लगे हैं. राजद ने तो साफ़ साफ़ कह दिया है कि तेजस्वी यादव मुख्यमंत्री पड़ के उम्मीदवार होंगे. लेकिन तेजस्वी से उम्र में बड़े और अनुभवी नेता जीतन राम मांझी, शरद यादव, मुकेश साहनी और उपेन्द्र कुशवाहा को ये मंजूर नहीं. कांग्रेस ने इस पुरे मुद्दे पर अभी तक चूपी साध रखी है. लेकिन इसी बीच कुछ ऐसा हुआ कि महागठबंधन की दरार खुल कर सामने आ गई.

बीते दिनों प्रशांत किशोर ने आधिकारिक तौर पर अपने रास्ते नीतीश से अलग कर लिए. ऐसे में बिहार का कम बनने का सपना देख रहे जीतन राम मांझी, मुकेश साहनी और उपेन्द्र कुशवाहा जैसे नेताओं ने गैर भाजपा और गैर राजद एक तीसरे मोर्चे को बनाने की कोशिशें शुरू कर दी. उन्हें लगता है कि प्रशांत किशोर बिहार की राजनीति में कुछ ऐसा कमाल कर सकते हैं कि जिससे तीसरे मोर्चे को सफलता मिल जायेगी. इसी कोशिश में बीते दिनों मांझी, कुशवाहा और साहनी ने प्रशांत किशोर से मुलाक़ात की और तीसरे मोर्चे के गठन के लिए मदद मांगी. हालाँकि प्रशांत किशोर के इनकार से उन्हें झटका लगा. लेकिन राजद को ये मुलाक़ात पसंद नहीं आई.

राजद ने जीतन राम मांझी पर हमला करते हुए कहा कि वो महागठबंधन को कमजोर कर रहे हैं. राजद ने साफ़ साफ़ कह दिया कि वही बिहार में महागठबंधन और सरकार का नेतृत्व करेगी. राजद नेता शिवानन्द तिवारी ने कहा, ‘मांझी छपास की बीमारी से ग्रसित हैं. मांझी हमेशा कुछ वैसा करते रहते हैं जिससे अखबारों में आ जाएं. मांझी ऐसा व्यवहार करते हैं, जैसे लोग राजनीति में नए नए आने के बाद करते हैं. मांझी को समझ लेना चाहिए कि बिहार में गठबंधन का नेतृत्व आरजेडी ही करेगी.’

शिवानन्द तिवारी के बयान पर मांझी की पार्टी हम भड़क गई. हम के राष्ट्रीय प्रवक्ता दानिश रिजवान ने कहा, ‘शिवानन्द तिवारी राजनीति के बुझे हुए कारतूस हैं. दानिश रिज़वान ने कहा कि शिवानन्द तिवारी के कारण आज लालू प्रसाद जेल में हैं. शिवानंद तिवारी को राजनीति से सन्यास ले लेना चाहिए.’