बिहार में चुनाव से पहले ही महागठबंधन में महाभारत, महागठबंधन की हालत ‘ज्यादा जोगी मठ उजाड़’ वाली

589

इस साल बिहार में विधानसभा चुनाव होना है. हालाँकि अभी तारीखों का ऐलान नहीं हुआ लेकिन सियासी दांव पेंच शुरू हो गए हैं और शुरू हो गई है महागठबंधन में महाभारत. महागठबंधन में जितनी पार्टियाँ हैं उतने ही मुख्यमंत्री के उम्मीदवार सामने आ रहे हैं और सारी पार्टियाँ अपनी ढपली अपना राग अलाप रही हैं. और विपक्ष में मची इस महाभारत का फायदा भाजपा और जेडीयू गठबंधन को मिल रहा है.

राजद ने पहले ही तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री का उम्मीदवार घोषित कर दिया है लेकिन सबसे पुरानी और राष्ट्रीय पार्टी होने के नाते कांग्रेस चाहती है कि विधानसभा चुनाव उसके नेतृत्व में लड़ा जाए और सबसे अधिक सीटें भी उसे ही दी जाए. दो दिन पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यपाल निखिल कुमार के पटना स्थित आवास पर कांग्रेस नेताओं की बैठक हुई थी. इस बैठक में पूर्व केंद्रीय मंत्री अखिलेश सिंह, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सदानंद सिंह सरीखे कई नेता शामिल हुए थे. इस बैठक में तय किया गया कि कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी है इसलिए उसके हिस्से ज्यादा सीटें आनी चाहिए. कांग्रेस ये भी चाहती है कि जेडीयू के महागठबंधन से बाहर होने के बाद उसके हिस्से की 101 सीटें कांग्रेस को मिलनी चाहिए.

इसके अलावा महागठबंधन में शामिल तीनों छोटी पर्त्तियां भी अपनी अलग खिचड़ी पका रही हैं. महागठबंधन में राजद और कांग्रेस के अलावा हम, रालोसपा और वीआईपी पार्टी शामिल है. इन तीनों पार्टियों को लगता है कि राजद और कांग्रेस के बीच ज्यादा सीटों ई खींचतान में कहीं इनकी झोली खाली ना रह जाए. इसलिए ये तीनों पार्टियाँ अब कांग्रेस के साथ मिलकर गैर राजद एक अलग महागठबंधन बनाने की जुगत में लगी हैं. एक वजह ये भी कि जीतन राम मांझी और उपेन्द्र कुशवाहा जैसे वरिष्ठ नेता तेजस्वी जैसे जूनियर का नेरिव स्वीकार नहीं करना चाहते.

राजद पहले ही सबसे अधिक सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान कर चुकी है. अब कांग्रेस भी राजद से कम सीओं पर चुनाव लड़ने को तैयार नहीं. जीतनराम मांझी ने महागठबंधन में 85 सीट पर दावा ठोक चुके हैं. उन्होंने कहा था कि बिहार में 85 सीटों पर उनकी पार्टी की पकड़ हैऐसे में उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि महागठबंधन का नेतृत्व कौन करेगा? इसका फैसला महागठबंधन की बैठक के बाद ही तय होगा. जब तक महागठबंधन की बैठक नहीं होती तब तक सीट शेयरिंग या फिर नेतृत्व की बात करना उचित नहीं है.