इस लोकसभा में बिहार क्या भूमिका निभाने जा रहा

333

जयप्रकाश नारायण की जन्मभूमि “बिहार”… जहां की हवाओं में राजनीति बहती है … चाय की दूकान हो या फिर बस स्टैंड हर जगह आपको सत्ता और राजनीति पर चर्चा जरूर सुनने को मिल जाएगी … अगर आप किसी भी राज्य से बिहार जा रहे हैं और वो भी ट्रेन में तो राजनीति को लेकर बहस जरूर सुनने को मिल जाएगा…

वैसे अब हमारा देश 2019 लोकसभा चुनाव में उतर चूका है… सब तैयार है चुनावी जंग के लिए … इस बीच बिहार सियासत की एक अलग तस्वीर पेश कर रहा है …
एनडीए बनाम महागठबंधन की लकीर बिहार में जितनी साफ तौर पर उभर कर सामने आई है….उतनी शायद ही देश के किसी और राज्य में दिख रही हो…यहां तक कि देश के सबसे बड़े राज्य यूपी में भी त्रिकोणीय मुकाबला है जबकि बिहार में इस बार मुकाबला द्विपक्षीय और आमने-सामने का होने जा रहा है…..
2019 चुनाव के लिए राज्य के तमाम दल दोनों में से किसी न किसी खेमे में शामिल हो चुके हैं…. एनडीए में जहां बीजेपी, नीतीश कुमार की जेडीयू और रामविलास पासवान की एलजेपी शामिल हैं तो वहीं मुकाबले के लिए महागठबंधन में आरजेडी, कांग्रेस के अलावा उपेंद्र कुशवाहा की रालोसपा, जीतनराम मांझी की हम और मुकेश सहनी की वीआईपी पार्टी एकजुट होकर उतरे हैं…. राज्य की सियासत में आमने-सामने के मुकाबले वाली ऐसी तस्वीर 15 साल बाद देखने को मिल रही है…. इससे पहले 2004 में ऐसा मुकाबला हुआ था….

वैसे आज से 15 साल पहले भी कुछ ऐसा ही हुआ था… यानी की 2004 में… लोकसभा चुनाव में बिहार में सीधे मुकाबले की स्थिति बनी थी….. जब केंद्र की अटल सरकार को चुनौती देने के लिए आरजेडी, कांग्रेस, एलजेपी, राकांपा और माकपा ने हाथ मिलाया था….. मुकाबले के लिए बीजेपी और जेडीयू का गठबंधन सामने था… तब लालू प्रसाद यादव की पार्टी आरजेडी को 22, कांग्रेस को 3 और एलजेपी को 4 सीटें मिली थीं. इस गठबंधन को बिहार की 40 में से 29 सीटों पर जीत मिली थी. जबकि 43.35 प्रतिशत वोट शेयर….. दूसरी ओर बीजेपी-जेडीयू को 11 सीटें मिली थीं और वोट शेयर 36.93 फीसदी था….

बिहार की सियासत में पाले बदलते हैं तो वोटों का गणित भी बदल जाता है…. 2009 के चुनाव में नीतीश कुमार तो एनडीए के पाले में रहे लेकिन कांग्रेस और आरजेडी में बात नहीं बनी… तब लालू प्रसाद की आरजेडी और रामविलास पासवान की एलजेपी साथ मिलकर चुनाव में उतरे तो कांग्रेस अकेले…इस चुनाव में बीजेपी-जेडीयू को 32 सीटें मिली थीं… जबकि वोट शेयर 37.97 फीसदी रहा था… वहीं आरजेडी को 4 सीटें मिलीं और 19.30 प्रतिशत वोट. एलजेपी खाता भी नहीं खोल सकी. जबकि अकेले चुनाव में उतरी कांग्रेस 2 सीट ही जीत सकी. कांग्रेस को 10.26 फीसदी वोट मिले… दो सीटें अन्य के खाते में गईं थीं…

2014 के लोकसभा चुनाव में बिहार की सियासी तस्वीर एकदम अलग थी. बीजेपी मोदी लहर पर सवार होकर उतरी तो मोदी के खिलाफ एनडीए का साथ छोड़कर नीतीश कुमार की जेडीयू अलग से मैदान में थी. जबकि आरजेडी और कांग्रेस साथ कदमताल कर रहे थे. मोदी लहर के बूते एनडीए ने बिहार की 40 में से 31 सीटें जीत ली. बीजेपी को 22, रामविलास पासवान की लोजपा को 6, आरएलएसपी को 3 सीटें मिलीं. जेडीयू को सिर्फ 2 सीटें मिलीं. वहीं आरजेडी को 4 और कांग्रेस को 2 और एनसीपी को बस 1 सीट पर जीत हासिल हुई.

वोट शेयर की बात करें तो 2014 में एनडीए को 38.8 फीसदी और नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू को 15.80 प्रतिशत वोट मिले… जबकि राष्ट्रीय जनता दल को 6.4 फीसदी, एनसीपी को 1.2 फीसदी और कांग्रेस को 8.4 फीसदी वोट हासिल हुए थे….इस बार यानी 2019 के लोकसभा चुनाव में लड़ाई सीधी है… एनडीए और महागठबंधन आमने-सामने हैं… एक तरफ नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार की जोड़ी का कमाल देखना है तो दूसरी ओर राहुल गांधी की अगुवाई वाली कांग्रेस और तेजस्वी यादव की अगुवाई वाले आरजेडी के महागठबंधन से मुकाबला है….

हालांकि यह पहली बार होगा की लालू यादव बिहार की सियासी तस्वीर से बाहर हैं…. और रांची में चारा घोटाले के केस में सजा काट रहे हैं…. लेकिन, रांची के रिम्स अस्पताल से ही वे महागठबंधन के लिए रणनीति बनाने और सियासी गोटियां सेट करने में बेटे तेजस्वी के लिए पर्दे के पीछे से चाणक्य की भूमिका में हैं….
बहरहाल हम देख सकते है कि बिहार में मुकाबला बहुत साफ़ है … जीत किसकी होगी ये बताना थोडा मुश्किल है लेकिन इस बात से भी इनकार नहीं कर सकते कि पिछले 5 साल में बिहार के डेवलपमेंट के पीछे नितीश कुमार और उनके NDAसरकार का बहुत योगदान है .