इस बार फिर बिहार विधानसभा चु’नाव में नोटा ने ब’ढ़ायी उ’म्मीद’वारों की मु’श्कि’लें

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बिहार में जहां एक तरफ विधानसभा चुनाव की लह’र शुरू हो गयी है वही दूसरी तरफ सभी पार्टियों ने भी कमर क’स ली है और जनता को लु’भाने के लिए अपनी नयी नयी रण’नीति भी बनाने में लगे हुए है. वही बीजेपी ने भी बिहार के लिए कई सौगा’ते दी है साथ राज्य सरकार भी बिहार के विकास के लिए सौगा’ते दी रही है और पीएम मोदी और CM नीतीश कुमार के सहयोग से बिहार की द’शा को बदला भी जा रहा है.

लेकिन जानकारी के लिए बता दें कि विधानसभा चुनाव 2015 में 19 सीटों पर मतदा’ताओं ने नोटा को प्रभा’वी वोट दिये थे. जिसका असर इन सीटों पर हुई हा’र-जी’त में वोटों का अंतर नोटा को मिले वोटों से कम ही रहा. जिसकी वजह से अब एक बार फिर से नोटा एक बार फिर से मत’दाताओं का बड़ा हथि’यार बन सकता है.

दरअसल नोटा के जरिये प्रत्या’शियों में किसी को पसंद न करने वाले मतदाताओं ने हार-जी’त के परि’णाम को नज’दीक से प्रभावित किया था. जिसकी वजह से विधानसभा चुनाव 2020 के लिए एक बार फिर से मतदाता नो’टा का उपयोग कर सकते है. इसी कारण बस सभी दलों को नो’टा पर वोटिंग करने वाले मतदा’ताओं को नि’यंत्रित करने की बड़ी चुनौ’ती होगी. उल्ले’खनीय है कि पिछले विधानसभा चुनावों में प्रदेश के 913561 मत’दाताओं ने नोटा के बटन को द’बाया था.

जिसका प्र’भाव इस बार के विधानसभा चुना’व पर भी देखने को मिल सकता है. हालाँकि केंद्र और राज्य सरकार लगातार बिहार एक वि’कास के लिए कई सौ’गाते दी रही है. ताकि बिहारवासियों को बेह’तर सु’विधा मिल सके.